गर्मियों में काश्त के लिए फूलों की किस्में
ग्रीष्म ऋतु आ गई है। आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने की सम्भावना है। लोग अपने घरों और दफ्तरों को सजाने तथा अपने स्वास्थ्य एवं मन को खुश रखने के लिए फूल लगाते हैं। फूलों की काश्त अब व्यापारिक स्तर पर भी हो रही है। सर्दियों में लगाने के लिए फूलों की कई किस्में हैं—जैसे गेंदा, गुलाब, गुलदाउदी आदि। गुलदाउदी और गुलाब ऐसी किस्में हैं जिन्हें प्रतियोगिता में भी शामिल किया जाता है। गुलाब के फूल पांच सितारा होटलों और बड़े-बड़े स्थानों पर बहुत महंगे बिकते हैं।
गुलदाउदी के फूलों से भरा एक गमला 200 से 300 रुपये तक बिक जाता है। लेकिन गर्मियों में लगाने के लिए परम्परागत फूलों की कोई सफल किस्म दिखाई नहीं देती। सर्दियों में लगाए हुए फूल अब लगभग खत्म हो गए हैं। फूलों और फलों के विशेषज्ञ बागवानी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. स्वर्ण सिंह मान कहते हैं कि गर्मियों में लगाने के लिए फूलों की चाहे कोई परम्परागत किस्म उपलब्ध नहीं, फिर भी आसपास के माहौल को सुन्दर और मनमोहक बनाया जा सकता है। देसी फूलों की किस्मों के बजाय अब नर्सरियों में हाइब्रिड फूलों की पौध मिल जाती है, जिनमें से अब निम्नलिखित किस्में लगाई जा सकती हैं :
दोपहर खिड़ी : इसे अंग्रेज़ी में पार्चुलाका कहते हैं। इसमें कई रंग जैसे नारंगी, बैंगनी, लाल, गुलाबी, पीला तथा सफेद मिल जाते हैं। यह अधिक धूप वाली जगह, किनारों तथा हैंगिंग बास्किट, कम गहरे गमले तथा ग्राउंड कवर के तौर पर लगाए जा सकते हैं।
कोचिया : यह किस्म भी गर्मियों में लगाने के लिए अनुकूल है। चाहे इसे फूल तो नहीं लगते, परन्तु इसका पौधा ग्लोब की तरह होता है और पत्ते हरे रंग के सुन्दर दिखाई देते हैं। इसके पौधे बार्डर पर, गमलों में तथा पर्दा करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं।
सूरजमुखी : इसकी हाइब्रिड छोटी किस्म की पौध मिल जाती है। इसके फूलों का रंग पीला, नारंगी तथा तांबे जैसा होता है। इसकी पौध बार्डर बनाने, बैड््डों पर तथा पर्दा करने के लिए भी लगाई जा सकती है। इसके फूल कट्ट फ्लावर के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
गोमफ्रेना : इसके फूलों का रंग बैंगनी, नारंगी, गुलाबी, सफेद, गहरा लाल होता है। इसके पौधे बैड्डों, बार्डर तथा गमले में भी लगाए जा सकते हैं।
गेलार्डिया : इसका फूल पीला, नारंगी, भूरा तथा क्रिमसन रंग का हो सकता है। यह सिर्फ बैड्डों पर ही लगाए जा सकते हैं और फूलों को कट्ट फ्लावर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कॉसमॉस : इसके फूलों का रंग पीला, नारंगी, ऑफ-व्हाइट तथा गहरा लाल होता है। इसके पौधे भी बैड्डों तथा बार्डर पर लगाए जा सकते हैं।
कोरेयाबस्स : इस किस्म के फूलों का रंग पीला तथा केन्द्र में मैरून होता है। यह बैड्डों पर, पर्दे के लिए तथा बार्डर पर लगाए जा सकते हैं।
इन हाइब्रिड किस्मों के अतिरिक्त अप्रैल-मई में अमरेंथस, सिलोसिया, कॉक्सकांब, बालमस आदि सदाबहार फूलों की पौध लगाई जा सकती है। यह किस्म जुलाई से सितम्बर-अक्तूबर तक फूलों की बहार लेकर आती हैं।
इन सभी फूलों की पौध लगाने से 10-15 दिन पहले तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, जिसमें क्यारी को 6-10 इंच गहरा खोदकर कम से कम एक सप्ताह धूप लगानी चाहिए। फिर 5 किलो अच्छी तरह गली-सड़ी रूड़ी खाद, 30 ग्राम किसान खाद या 20 ग्राम यूरिया खाद, 45 ग्राम सुपर फास्फेट और 30 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद प्रति वर्ग मीटर डाल देनी चाहिए। इन सभी खाद को अच्छी तरह मिला देना चाहिए। फिर हल्की सिंचाई की ज़रूरत होती है। धूप आने पर दोपहर के बाद पौध लगाकर पानी दे देना चाहिए। दो-अढ़ाई सप्ताह के बाद 20 ग्राम यूरिया प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से डालने की ज़रूरत है।
गमले में फूल लगाने के लिए मिश्रण तैयार करने की ज़रूरत होती है। इसमें 30 ग्राम किसान खाद या 20 ग्राम यूरिया, 45 ग्राम सुपर फास्फेट और 20 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद प्रति घन मीटर डालनी ज़रूरी है। फिर गमले के छेद में मिट्टी का टुकड़ा रखकर यह मिश्रण डाल देना चाहिए। मिश्रण डालने के बाद हल्का पानी लगा देना चाहिए। एक गमले में 3-3 पौधे लगाए जा सकते हैं।
कीड़े-मकौड़ों से बचाव के लिए मैलाथियान या रोगोर दवा 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करने की ज़रूरत है। फफूंद रोगों से बचाने के लिए डाइथेन एम 45 की 2 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में डाल कर छिड़काव कर देना चाहिए। यह बारादरी बाग पटियाला, पीएयू लुधियाना तथा अन्य निजी नर्सरियों से भी खरीदी जा सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा भी फूलों की कई किस्में विकसित की गई हैं, जो किसानों ने व्यापारिक स्तर पर अपनाई हैं।
फूलों की काश्त के लिए आईएआरआई ऐसी अनुसंधान संस्था है जो फूलों की कई किस्में विकसित करने में अग्रणी है। फूलों की काश्त करने से फसली विभिन्नता भी आती है। पीएयू भी फूलों की काश्त को उत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रही है। लोग पर्यावरण संबंधी बढ़ रही समस्याओं के प्रति जागरूक हो रहे हैं और अपने घरों एवं पार्कों में अलग-अलग तरह के फूल लगा रहे हैं। बेरोज़गार लोग गमलों में फूल उगाकर भी बेच सकते हैं।
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