बच्चों के भाषा-विकास पर मोबाइल का नकारात्मक प्रभाव
आधुनिक तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है, किंतु इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं, विशेषकर बच्चों के विकास के संदर्भ में। वर्ष 2007 में स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग के साथ यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया था। आज स्थिति यह है कि लोगों का अधिकांश समय स्क्रीन के साथ बीतता है। इस बदलते परिवेश का बच्चों के भाषा-विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जो चिंता का विषय है।
शिशु और प्रारंभिक बाल्यावस्था वह संवेदनशील अवधि होती है, जब बच्चे भाषा के मूलभूत कौशल विकसित करते हैं। इस चरण में वे अपने माता पिता, परिवार के अन्य सदस्यों, परिवेश और प्रत्यक्ष अनुभवों से सीखते हैं। किन्तु जब माता पिता स्वयं बच्चों के सामने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो आपसी संवाद की प्रक्रिया बाधित होती है। शोध यह संकेत देते हैं कि माता-पिता का स्क्रीन पर अधिक समय बिताना बच्चों के भाषा-विकास में कमी ला सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि स्क्रीन आधारित माध्यम एकतरफा संप्रेषण प्रदान करते हैं जबकि भाषा सीखने के लिए दोतरफा संवाद आवश्यक होता है।
बच्चों में मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कई नकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। सबसे प्रमुख समस्या बोलने में देरी की है। जिन बच्चों का स्क्रीन समय अधिक होता है, उनमें शब्दों को समझने और व्यक्त करने की क्षमता अपेक्षाकृत धीमी विकसित होती है। इसके साथ ही उनकी शब्दावली सीमित रह जाती है और संवाद कौशल कमज़ोर पड़ने लगता है। बच्चे जब अधिक समय स्क्रीन पर बिताते हैं, तो वे सामाजिक सम्पर्क से दूर हो जाते हैं, जिससे भाषा सीखने के अवसर कम हो जाते हैं।
इसकेअतिरिक्त मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। लगातार बदलते दृश्य और ध्वनि प्रभाव बच्चों के मस्तिष्क को तत्काल उत्तेजना के लिए अभ्यस्त बना देते हैं, जिससे वे वास्तविक जीवन की धीमी और स्थिर प्रक्रियाओं में रुचि नहीं ले पाते। इसका परिणाम यह होता है कि वे बातचीत, पढ़ाई या किसी अन्य गतिविधि में लम्बे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्क्रीन पर प्राप्त जानकारी को वास्तविक जीवन में लागू करना छोटे बच्चों के लिए कठिन होता है। तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों में संदर्भ परिवर्तन की क्षमता पूर्ण रूप से विकसित नहीं होती, जिसके कारण वे स्क्रीन पर देखी गई बातों को व्यवहार में नहीं उतार पाते। इससे उनकी सीखने की प्रक्रिया बाधित होती है और संज्ञानात्मक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भाषा समझने और अभिव्यक्त करने की क्षमता पर भी स्क्रीन समय का सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि बच्चे प्रतिदिन दो घंटे या उससे अधिक समय मोबाइल पर बिताते हैं, तो उनकी समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता कमज़ोर हो सकती है। इसके साथ ही सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव भी प्रभावित होता है, क्योंकि माता-पिता के साथ बिताया जाने वाला गुणवत्तापूर्ण समय कम हो जाता है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए अभिभावकों और शिक्षकों दोनों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। सबसे पहले बच्चों के साथ नियमित और सार्थक बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शिशु अवस्था से ही बच्चों से संवाद करना, उन्हें दैनिक गतिविधियों के बारे में बताना और उनके प्रयासों पर प्रतिक्रिया देना भाषा-विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। (एजेंसी)

