हारा मन क्यों हारा ?
किसने जख्म दिया?
मन व्यथित हुआ
हर बार हुआ
यह एक बार हुआ।
बीते सुनहरे पल
आ गया कोई दल-बल
उठा गया तूफान
मच गया घमासान।
विदाई का समय
मन में थी आस
मिलेगी खुशियों की सौगात
आज मन हो गया उदास।
क्यों हुई यह बात?
हर दिन और रात
यही थी पुकार
बस एक बार।
कर्म की है बात
मन न हो निराश
यह नहीं बड़ा आघात
होगी उज्ज्वल प्रभात।
-वीरेन्द्र शर्मा वात्स्यायन
-मो. 9417280333
#हारा मन क्यों हारा ?

