भारत की दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ती सामरिक साझेदारी
भारत और दक्षिण कोरिया के सामरिक संबंध बीते कुछ सालों में मज़बूती के साथ आगे बढ़े हैं। पिछले दिनों की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दक्षिण कोरिया की यात्रा ने दोनों देशों के सामरिक संबंधों को एक नई दिशा प्रदान की है। इस यात्रा से भारत और दक्षिण कोरिया बदलते वैश्विक सामरिक शक्ति संतुलन, हिन्द-प्रशांत क्षेत्र बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चीन की आक्रामक नीतियों के बीच एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझीदार बनकर उभरे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी का संकेत थी। निश्चित है कि यह सामरिक साझेदारी भविश्य में एशिया की राजनीति व सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेगी।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ आपसी रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने के साथ-साथ सैन्य आदान-प्रदान, समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय सुरक्षा, उद्योग, उत्पादन, नवीनतम प्रौद्योगिकियों एवं रसद जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक बढ़ाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा तथा साइबर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने, भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय व दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा सहयोग पर समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। यही नहीं दोनों पक्षों ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और दक्षिण कोरिया के क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टिकोण के बीच बढ़ते तालमेल को स्वीकार किया तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांत बनाए रखने के साझा उद्देश्यों के अनुरुप आपसी रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया। इस प्रकार यह समझौता नई दिल्ली और सियोल के बीच सामरिक संबंधों को अधिक गहरा करता है। इसके अतिरिक्त यह विषेश रूप से आधुनिक युद्धों और खुफिया चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय हुई जब एशिया में सुरक्षा एवं सामरिक चुनौतियां लगातार बढ़ रहीं हैं। दरअसल चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव, उत्तर कोरिया की बढ़ती मिसाइल ताकत ने भारत और दक्षिण कोरिया को ज्यादा नजदीक आने के लिए प्रेरित किया है। इसीलिए दोनों देशों के बीच उक्त मुद्दों पर सहमति बनी। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत व दक्षिण कोरिया अब केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं बल्कि सामरिक क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।
रक्षा मंत्री की यात्रा में दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन में संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। यह सामरिक संबंधों की प्रगाढ़ता का एक मजबूत पक्ष है। उल्लेखनीय है कि आधुनिक रक्षा तकनीक और हथियार निर्माण के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया विश्व के अग्रणी देशों में स्थान रखता है। दक्षिण कोरियाई कंपनी के सहयोग से बनाई गई के-9 बज्र होवित्जर तोपों का उदाहरण सबसे प्रमुख है। इन तोपों से भारतीय तोपखाने को को काफी मजबूती मिली और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिला। भविश्य में दक्षिण कोरिया के साथ मिसाइल सिस्टम, नौसैनिक उपकरण और आधुनिक सैन्य तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ सकती है। इससे भारत की आत्मनिर्भरता की नीति एवं मेक इन इंडिया नीति को भी मज़बूती मिलेगी।
सम्प्रति हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक राजनीति का केन्द्र बन गया है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत और दक्षिण कोरिया दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैसे भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक मज़बूत शक्ति के रूप है और दक्षिण कोरिया वैश्विक समुद्री व्यापार पर अत्यधिक निर्भर देश है, लेकिन चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों ने दोनों देशों के लिए चिन्ताएं पैदा की हैं। इसलिए समुद्री सुरक्षा दोनों देशों की प्राथमिकता बन गई है और अब दोनों देश समुद्री डकैती रोकने, समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने, नौसैनिक अभ्यास बढ़ाने तथा मानवीय सहायता व आपदा प्रबंधन जैसे मामलों पर सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देशों का मानना है कि इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन होना चाहिए और समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता बनी रहे।
आधुनिक युद्ध अब केवल पारम्परिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे क्योंकि साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वर्तमान समय की सामरिक शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। दक्षिण कोरिया इस समय तकनीकी नवाचार में अग्रणी देशों में शामिल है, तो भारत तेज़ी से डिजिटल व तकनीकी शक्ति के रूप में उभरता हुआ देश है। इन क्षेत्रों में दोनों देशों का आपसी सहयोग बढ़ेगा। यह सहयोग आधुनिक युद्धों से संबंधित रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने एवं भविष्य की युद्ध-रणनीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत और दक्षिण कोरिया के सामरिक संबंधों का आर्थिक पक्ष भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण कोरिया भारत में बड़े निवेशकों में शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक और वाहन कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है।
भारत व दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते सामरिक संबंध चीनी मामले में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। भारत का चीन के साथ सीमा विवाद चल रहा है जिससे उसकी सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है क्योंकि वह उत्तर कोरिया का सहयोगी है। अब यदि दोनों देश सामरिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं तो यह सामरिक साझेदारी एशिया की एक महत्वपूर्ण सामरिक साझेदारी में बदल सकती है। भविश्य में यदि दोनों देश आपसी सहयोग को और गहरा करते हैं तो दोनों देश सुरक्षा और विकास के पक्ष से मज़बूत होंगे, जिससे एशिया में एक नया संतुलन स्थापित होगा। (एजेंसी)



