वर्चस्व की लड़ाई में गैंगवार पर उतरा कोचिंग उद्योग

कभी बिहार में गैंगवार का संबंध जमीन, ठेकेदारी, रंगदारी और राजनीतिक वर्चस्व से जोड़ा जाता था, लेकिन अब एक नया और चिंताजनक परिदृश्य उभरता दिखायी दे रहा है, यह परिदृश्य शिक्षा के उस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसे समाज भविष्य निर्माण का माध्यम मानता है। जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा, यह कोचिंग उद्योग है। हाल के सालों में जैसे-जैसे बेरोज़गारी बढ़ी है और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था बदहाल हुई है, वैसे-वैसे देशभर में कोचिंग उद्योग का जाल बिछ गया है। इसका आकार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। आज कोचिंग उद्योग 60 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इसका मतलब है कि यह उद्योग, देश के दर्जनों व्यवस्थित जमे-जमाये उद्योगों से भी बड़ा हो चुका है। इसलिए अब कोचिंग उद्योग पर अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए कई कोचिंग मालिक, कोचिंग माफिया बनने की राह पर उतर आये हैं। गुजरे 2 जून, 2026 को इसकी एक भयावह झलक बिहार की राजधानी पटना में देखने को मिली। पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में, जिसे कोचिंग राजधानी कहा जाता है, लोकप्रिय शिक्षक खान सर की कोचिंगस के बाहर मारपीट हुई और यहीं से एक ऐसे झगड़े ने सिर उठाया जो आज कोचिंग उद्योग के खूंखार चेहरे के रूप में प्रकट होकर सामने आया है। 
खान सर की कोचिंग के गेट पर कुछ गार्ड और उनके कुछ बाउंसर मौजूद थे, उसी वक्त वहां कुछ छात्रों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और इस झगड़े के दौरान किसी ने खान सर की कोचिंग के एक बेनर को गिरा दिया। इसके बाद छात्रों के बीच की मारपीट की यह खबर खान सर की कोचिंग सैंटर में पहुंची और खान सर निकलकर बाहर आए। इसके बाद जो कुछ हुआ वह फौरी एफआईआर से लेकर एक प्रतिद्वंदी कोचिंग संस्थान के निदेशक की गिरफ्तारी तक बात पहुंच गई, लेकिन करीब 48 घंटे बाद जो नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया, उसके बाद तो पूरा मामला ही बदल गया। इस नये सीसीटीवी कैमरे और इंवेस्टीगेशन से पता चला कि खान सर ने ही अपने गार्ड्स को हवा में फायरिंग करने के लिए कहा, जिससे कि माहौल बन सके। खान सर के कहने पर उनके ही सुरक्षा गार्डों ने तीन चार राउंड फायर की, इसके बाद खान सर अंदर चले गये। बाद में इसी फायरिंग को आधार बनाकर खान सर के पास ही चल रही दूसरी कोचिंग ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद की गिरफ्तारी हुई। तब से लगातार पटना कोचिंग बवाल का गढ़ बना हुआ है। 
हालांकि सीसीटीवी फुटेज आने के बाद खान सर अपने फायरिंग वाले बयान से तो पीछे हट गये हैं, लेकिन रातोंरात कहीं गायब हो गये हैं, ताकि पुलिस की गिरफ्तारी से बच सके। क्योंकि अब यह साफ हो गया है कि उन्हीं के उकसावे के कारण फायरिंग हुई और बाद में उलटा दूसरी कोचिंग वाले पर फायरिंग का आरोप लगाकर न सिर्फ एफआईआर दर्ज करायी गई बल्कि प्रतिद्वदी को पुलिस के द्वारा गिरफ्तार भी करा दिया गया। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद, पिं्रस गौरव और अभिषेक जेल में थे। हालांकि जेल जाते समय रौशन आनंद ने मीडिया को चीख-चीखकर बताया था कि उन्हें खान सर की साजिश के चलते निराधार गिरफ्तार किया जा रहा है, लेकिन जब तक वह वीडियो सामने नहीं आया था, जिसमें खान सर खुद अपने बॉडी गार्ड से फायरिंग करके माहौल बनाने की बात कर रहे थे, इसलिए तब तक पुलिस ने उन पर कोई कार्यवाई नहीं की थी और जब यह वीडियो सामने आ गया है तो खान सर अंडरग्राउंड हो चुके थे। यही नहीं इस बीच यह सारा मुद्दा कोचिंग बनाम कोचिंग की खूनी जंग से हटकर बड़ी चालाकी मीडिया बनाम कोचिंग का मुद्दा बना दिया गया। ताकि सारा फोकस कोचिंग माफिया के गैंगवार की जगह कोचिंग बनाम मीडिया पर हो जाए। 
लेकिन ऐसा हो नहीं सका और सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई सारी साजिश के सामने आते ही बिहार में गैंगवार में तब्दील होते कोचिंग उद्योग का खुरदुरा चेहरा सामने आ गया। दरअसल जैसे-जैसे बेरोज़गारी अपने चरम पर पहुंचती जा रही है, वैसे-वैसे कोचिंग उद्योग पहले से कहीं ज्यादा तेज़ रफ्तार से फैल रहा है। अब हर कोई इस उद्योग की मलाई पर कब्जा चाहता है, इसलिए अपने प्रतिद्वंदियों से बाजार छीनने के लिए आज कोचिंग माफिया वही सारे हथकंडे अपना रहे हैं, जैसे किसी जमाने में मुंबई में अंडरवर्ल्ड माफिया आजमाया करता था। चाहे पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका हो या राजस्थान का कोटा शहर या फिर राजधानी दिल्ली। आज देश में एक दर्जन से ज्यादा शहर और इन शहरों के कुछ खास इलाके कोचिंग उद्योग के गढ़ में तबदील हो चुके हैं। हजारों, करोड़ रुपये की फीस, हॉस्टल उद्योग, किताबें, ऑनलाइन कोर्स और यू-ट्यूब चैनल तथा भर्ती परीक्षाओं की तैयारी का विशाल नेटवर्क, यह सब मिलकर एक ऐसे खतरनाक उद्योग में तब्दील हुआ है, जहां लोकप्रियता के दम पर रातोंरात करोड़ नोट छापे जा सकते हैं। 
इसलिए आज की तारीख में कोचिंग उद्योग बेहद प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ बेहद आक्रामक और किसी हद तक हिंसक हो चुका है। हाल की घटनाओं से पता चलता है कि तथाकथित ऑनलाइन शिक्षक आज अपने प्रतिद्वंदी को ऐन-केन-प्रकारेण रास्ते से हटाना चाहते हैं, चाहे उसके लिए झूठी फायरिंग और हमले का झूठा प्रपंच ही क्यों न गढ़ना पड़े। 
आज की तारीख में बड़े कोचिंग संचालकों के हजार, दो हजार नहीं लाखों की तादाद में अनुयायी हैं। ऐसे में ये राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित कर रहे हैं। यही कारण है कि कोचिंग संस्थानों के बीच का संघर्ष आज केवल व्यावसायिक संघर्ष नहीं रह गया बल्कि प्रभाव और जनसमर्थन की लड़ाई बन चुका है। जिस तरह इन दिनों खान सर का मामला पूरे देश की मीडिया का विमर्श बन गया है, उससे साफ होता है कि आज कोचिंग उद्योग किस कदर प्रभावी और संवेदनशील हो चुका है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पटना पुलिस हाल के इस कोचिंग विवाद पर विभिन्न कोणों से जांच कर रही थी और विभिन्न स्रोतों से जो खबरें फ्लैश की जा रही थीं कि अंडरग्राउंड रहते हुए भी खान सर अपनी अग्रिम जमानत की व्यवस्था कर ली है। उससे हो सकता है यह मामला चूंकि काफी ज्यादा तूल हासिल कर चुका है, इसलिए दबा दिया जाए, लेकिन जिस तरह से गोलीबारी और गैंगवार में कोचिंग उद्योग तबदील होता दिख रहा है, उससे बहुत जल्द ऐसे अनेक मामले सतह पर आकर कोचिंग उद्योग के अपराधीकरण को बेनकाब करेंगे। बात सिर से गुजरे और सरकार को बहुत खतरनाक कदम उठाना पड़े, उसके पहले ही कोशिश यह होनी चाहिए कि शिक्षा का व्यावसायीकरण, व्यावसायिक होने की प्रक्रिया में तब्दील न हो। कोचिंग की टेरीटरी का वार अंडरवर्ल्ड माफिया में तबदील हो, इसके पहले ही सरकार को गंभीर रुख अपनाना लेना चाहिए, नहीं तो बेरोज़गारी के कोढ़ में यह खाज बनकर पूरे समाज को दिशाहीन कर देगा।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

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