मोदी-ट्रम्प की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों में गर्मजोशी नहीं आ सकी

लगभग 16 माह बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फ्रांस में एवियन जी-7 सम्मेलन की साइडलाइंस पर द्विपक्षीय बैठक हुई। यह इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण थी कि नई दिल्ली व वाशिंगटन के बीच, वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, अंतरिम व्यापार समझौता होना अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और व्यापार समझौते का पहला हिस्सा जुलाई के मध्य तक लागू हो सकता है। यह इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि 19 जून, 2026 को अमरीका व ईरान स्विट्ज़रलैंड में अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिससे मध्य पूर्व में न सिर्फ युद्ध पर विराम लगेगा बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से तेल, गैस व खाद के वैश्विक व्यापार को राहत मिलेगी। इससे लगभग सभी देशों को अपने यहां बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने का अवसर मिलेगा। 
लेकिन अपनी द्विपक्षीय बैठक से पहले दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत की, जिसमें ओमान की खाड़ी में हाल ही में अमरीकी नौसेना द्वारा मारे गये तीन भारतीय नाविकों का मुद्दा उठाना लाज़मी था। मोदी ने हमले के लिए अमरीका का सीधे नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प से कहा है कि उन्हें विश्वास है कि शांति समझौता लागू करते समय नाविकों के मुद्दे को ‘उच्चतम वरीयता’ दी जायेगी। साथ ही उन्होंने इस समझौते को करने के लिए ट्रम्प के ‘ज़बरदस्त प्रयासों’ की भी सराहना की। जबकि ट्रम्प से जब यह मालूम किया गया कि क्या उनके पास भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदना के शब्द भी हैं, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि ‘हां, हैं’ और साथ ही इस निंदनीय घटना को कोई विशेष महत्व न देते हुए उन्होंने कहा कि इस किस्म की घटनाएं होती रहती हैं और अतीत में भी हुई हैं। 
गौरतलब है कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर, जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी शामिल है, सैंकड़ों भारतीय नाविक कार्य कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बहरहाल, ट्रम्प के साथ अपनी वार्ता के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों से लोगों के संबंध के संदर्भ में द्विपक्षीय सहयोग पर ‘नियमित प्रगति’ की समीक्षा की। पश्चिम एशिया में शांति व स्थिरता पुन:स्थापित करने के लिए प्रयासों में जो प्रगति हुई है, उसकी भारत सराहना करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने नाविकों सहित नागरिकों की रक्षा व सुरक्षा को सुनिश्चित करने के महत्व पर भी पुन: बल दिया। 
दूसरी ओर ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘कठिन नेगोशिएटर’ कहते हुए कहा कि भारत व अमरीका बहुत जल्द ‘व्यापार समझौता’ करने जा रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार वह भविष्य में भारत की यात्रा कभी भी कर सकते हैं लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अमरीका की यात्रा के लिए अपने निमंत्रण का कोई उल्लेख नहीं किया। ध्यान रहे कि पिछले महीने जब अमरीका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो भारत आये थे, तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने मोदी तक अमरीका आने का ट्रम्प का निमंत्रण पहुंचाया है। राष्ट्रपति ट्रम्प की, प्रधानमंत्री मोदी संग, मीडिया से वार्ता ऐसे जोक्स व टिप्पणियों से भरी हुई थी जिसे कुछ लोग फूहड़ कह सकते हैं; क्योंकि उसमें गंभीरता का अभाव था। मसलन, जब भारत के साथ रक्षा सहयोग के बारे में मालूम किया गया तो ट्रम्प ने कहा, ‘अगर कोई इस व्यक्ति (मोदी की तरफ इशारा करते हुए) पर हमला करता है, तो हम वहां (रक्षा के लिए) मौजूद होंगे। अब, अगर कोई नया नेता (भारत में) होगा, तो मैं यकीन से कुछ नहीं कह सकता। नया नेता होगा तो मुझे उसके बारे में मालूम नहीं, लेकिन अगर हमला होता है और यह (मोदी) नेता हैं, तो हम वहां मदद करने के लिए होंगे।’ इस फूहड़ मज़ाक से इस तथ्य को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि ट्रम्प प्रशासन ने आठ साल पहले चीन को ‘नियंत्रित’ करने व नई दिल्ली के बढ़ते स्ट्रेटेजिक महत्व का संकेत देते हुए ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ का नाम ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ कर दिया था। लेकिन फ्रांस में ट्रम्प व मोदी की मुलाकात से पहले पेंटागन ने खामोशी से इस निर्णय को पलट दिया। 
अमरीका के युद्ध विभाग ने 16 जून 2026 को घोषणा की है कि इंडो-पैसिफिक कमांड को एक बार फिर से पैसिफिक कमांड कर दिया गया है, जैसा कि वह 1947 से 2018 तक थी। इस परिवर्तन के प्रतीक व टाइमिंग को अनदेखा नहीं किया जा सकता। वाशिंगटन इस बात पर बल दे रहा है कि आधिकारिक कुछ नहीं बदला है और कमांड की ज़िम्मेदारी का क्षेत्र ‘भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है’। 
भले ही ट्रम्प कह रहे हों कि दोनों नेताओं के बीच संबंध इतने अच्छे हैं कि इससे बेहतर नहीं हो सकते। गौरतलब है कि क्वॉड (अमरीका, भारत, जापान व ऑस्ट्रेलिया) को संगठित करने का सिद्धांत 2018 में इंडो-पैसिफिक का विचार ही था कि चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत केंद्रीय स्तंभ होगा, लेकिन नाम बदलने से स्पष्ट है कि भारत व अमरीका के संबंध पहले जैसे नहीं रहे हैं। भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने एक्स पर लिखा है, ‘तथ्य यह है कि संबंध खराब होने के सभी कारणों के लिए ज़िम्मेदार ट्रम्प व उनकी टीम है और वह अब भी बाज़ नहीं आ रहे हैं कि मोदी-ट्रम्प की मुलाकात से पहले यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर पैसिफिक कमांड कर दिया है।’ इसके बावजूद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मोदी व ट्रम्प की द्विपक्षीय मुलाकात से नई दिल्ली व वाशिंगटन के बीच व्यापार व टैरिफ समझौते, रक्षा व टेक्नोलॉजी संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा व ऊर्जा पर तालमेल की संभावना में इज़ाफा हुआ है। यह दोनों देशों के लिए लाभ का सौदा हो सकता है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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