आश्चर्यजनक है स्टार्मर का त्याग-पत्र
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा त्याग-पत्र देने से विश्व भर में बड़ा आश्चर्य पैदा किया है। चाहे पिछले कुछ माह से उनकी अपनी लेबर पार्टी के भीतर उनके कामकाज और देश की धीमी विकास दर को लेकर स्वर ज़रूर उठ रहे थे। इसके साथ ही आश्चर्य यह भी होता है कि जिस व्यक्ति के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने 14 वर्ष के बाद बड़ी जीत प्राप्त की हो, उन्हीं से ही उनकी पार्टी का इतना जल्द मोह भंग हो गया हो। 2 वर्ष पहले कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने 650 में से 403 सीटें जीती थीं। ब्रिटेन में दो ही पार्टियां कंज़र्वेटिव और लेबर पार्टी का बड़ा प्रभाव रहा है, चाहे विगत अवधि से कट्टरपंथी रिफार्म पार्टी भी राजनीति के मैदान में उतरी हुई है। ब्रिटेन की विगत लम्बी अवधि से जिस तरह आर्थिकता डावांडोल रही है, उसे शीघ्र पटरी पर लाना बेहद कठिन है।
10 वर्ष पहले ब्रिटेन ने यूरोपियन यूनियन से स्वयं को अलग कर लिया था। हम इसे वहां की राजनीति की बड़ी भूल मानते रहे हैं। इसके साथ ही इस मामले पर पूरा देश भी बंटा हुआ दिखाई देता रहा है। वर्ष 2016 में कंज़र्वेटिव पार्टी के अध्यक्ष डेविड कैमरॉन ने यूरोपियन यूनियन से अलग होने के लिए करवाए गए रिफरैंडम में हुए हार के बाद त्याग-पत्र दे दिया था। कैमरॉन यूरोपियन यूनियन से अलग होने के विरुद्ध थे। उसके बाद कंज़र्वेटिव पार्टी के 4 अन्य प्रधानमंत्री बने, जिनमें बोर्स जॉनसन, लिज़ ट्रस और भारतीय मूल के ऋषि सुनक भी शामिल थे परन्तु प्रत्येक पक्ष से देश के गिरते हालात को संभाल न पाने के कारण उन्हें भी त्याग-पत्र देना पड़ा था। डावांडोल आर्थिकता के इसी दौर में 2 वर्ष पहले लेबर पार्टी को बड़ी जीत प्राप्त हुई थी। स्टार्मर ने अपनी पार्टी में उनकी कार्यशैली संबंधी पैदा हुई असंतुष्टि के दृष्टिगत और उनके अपने ही साथियों द्वारा त्याग-पत्र की मांग से निराश होकर अपने पद छोड़ने की घोषणा की है। इस समय उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि 6 वर्ष पहले जब मुझे लेबर पार्टी की ज़िम्मेदारी दी गई थी तो यह पूरी तरह कमज़ोर हुई दिखाई देती थी, परन्तु लोगों द्वारा मिले समर्थन ने इस पार्टी के कमज़ोर होने के भ्रम को तोड़ दिया था। उनके नेतृत्व में देश की आर्थिकता को बल मिला। राष्ट्रीय सुरक्षा में लोगों का विश्वास बढ़ा। आज पहले से हमारी आर्थिकता अधिक मज़बूत है परन्तु मुझे यह महसूस होता है, कि लेबर पार्टी को यह प्रतीत होता है कि 2029 में होने वाले चुनावों में वह मेरे नेतृत्व में जीत हासिल नहीं कर सकते। इसलिए मैं त्याग-पत्र दे रहा हूं।
10 वर्ष में निर्धारित समय से पहले 6 प्रधानमंत्रियों के पद छोड़ने से देश में पैदा हुई अस्थिरता वाली स्थिति का अहसास ज़रूर है। आना वाले सातवें प्रधानमंत्री इस हालात में कितना सफल हो सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी। ब्रिटेन में लगभग 20 लाख भारतीय बसे हुए हैं। कुछ समय से वहां जाने वाले भारतीयों को वीज़ा संबंधी सख्ती का सामना करना पड़ रहा था परन्तु स्टार्मर ने अपने 2 वर्ष के कार्यकाल में भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की नीति अपनाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री होते भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हमेशा सुखद संबंध बनाने का यत्न किया। उन्होंने ही भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। गत वर्ष अक्तूबर में भारत के दौरे पर आने पर उन्होंने कहा था कि यह समझौता सिर्फ कागज़ का एक टुकड़ा नहीं है, अपितु यह दोनों देशों में विकास के मार्ग खोलता है। दोनों देशों में व्यापार के बढ़ने और आपसी आदान-प्रदान से बड़ा लाभ होगा, क्योंकि इस समझौते में सुरक्षा, शिक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन संबंधी क्षेत्रों में आपसी सहयोग से दोनों देश विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए वचनबद्ध होंगे। कीर स्टार्मर ने हमेशा भारत के साथ संबंध सुधारने और आपसी मेल-मिलाप को प्राथमिकता दी थी।
ब्रिटेन पहले सैकड़ों वर्ष विस्तारवाद को प्राथमिकता देता रहा। अलग-अलग देशों पर कब्ज़ा करने और वहां शासन करने के समय यह अक्सर कहा जाता था कि अंग्रेज़ों के शासन में सूर्य नहीं छिपता, परन्तु लगातार बदलते हालात के कारण आज यह छोटा-सा देश रह गया दिखाई देता है, परन्तु इसकी नींव मज़बूत होने के कारण इसकी आर्थिकता लगभग मज़बूत ही रही है। इस की करंसी अभिप्राय पौंड की कीमत आज भी कहीं बड़ी दिखाई देती है, परन्तु अब यह देश राजनीतिक अस्थिरता के कारण कितना मज़बूत रह सकेगा, यह देखने वाली बात होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

