मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन संबंधी ज़िम्मेदारी
पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के संबंध में अभियान शुरू हो गया है। हम इसे भारतीय चुनाव आयोग द्वारा उठाया गया एक बहुत अच्छा और उत्तम कदम मानते हैं। बहुत समय पहले से भारतीय चुनाव आयोग की ओर से इस कार्यवाही की शुरुआत की गई थी। कुछ राज्यों में इस सर्वेक्षण के दौरान बहुत विवाद भी उपजे रहे। इसकी बड़ी आलोचना भी की जाती रही। इसे केन्द्र सरकार के इशारे पर उठाया गया कदम भी करार दिया गया और यह भी कि कुछ राज्यों में होने जा रहे चुनावों के समय शुरू की गई यह प्रक्रिया किसी विशेष उद्देश्य के तहत की गई है, परन्तु भारतीय चुनाव आयोग अपनी इस कार्रवाई के लिए दृढ़ रहा। यहां तक कि इस कार्रवाई के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में भी शिकायतें पहुंचीं, विपक्षी दलों ने उस पर एकतरफा होने के आरोप भी लगाये, उसकी आलोचना की और उस पर केन्द्र सरकार के साथ मिलीभुगत होने के आरोप भी लगाए। अंतत: सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को उचित और दुरुस्त बताया और उसे अपना काम जारी रखने के निर्देश दिए।
जिन राज्यों में चुनाव निकट थे, उनमें इस कार्य में देरी होने के कारण लाखों की संख्या में मतदाता अपने इस मूलभूत अधिकार का उपयोग न कर सके, जिस कारण शुरू की गई इस प्रक्रिया को कई पक्षों से त्रुटिपूर्ण करार दिया गया, परन्तु इसके साथ ही शेष रह गईं गलतियों और कमियों को साथ ही साथ सुधार कर आयोग ने अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया जारी रखी। अब पंजाब की बारी से पहले पंजाब चुनाव आयोग ने लगातार प्रत्येक पक्ष से इस प्रक्रिया की जांच-पड़ताल की है और साथ ही मतदाताओं को सचेत करने के लिए मीडिया के साथ-साथ इस संबंध में समूची जानकारी प्रदान करने के लिए और कई ढंग-तरीके भी अपनाए हैं। निचले स्तर तक मतदाताओं की पहचान के लिए राजनीतिक पार्टियों को लगातार इस प्रक्रिया से अवगत ही नहीं करवाया गया, अपितु उन्हें प्रत्येक स्तर पर भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया है। कई पार्टियों ने इसके प्रति पूर्ण समर्थन दिया है और प्रत्येक स्तर पर आयोग के अधिकारियों के साथ अपने प्रतिनिधियों को बैठकों में शामिल भी किया। चुनाव आयोग की ओर से यह बात सुनिश्चित बनाने का यत्न किया गया है कि विदेशों में रहते पंजाबियों के प्रदेश में बने वोटों की पहचान करने का भी पूरा-पूरा यत्न किया जाए। पिछले दशकों में लाखों ही प्रवासी किसी न किसी कारण पंजाब में आ बसे हैं या रोटी-रोज़ी कमाने के लिए यहां रहते हैं। चुनाव आयोग ने इनके प्रति भी सचेत रूप में कार्रवाई शुरू की है, कि किसी भी ऐसे व्यक्ति की किसी अन्य प्रदेश में वोट न बना हो। यह भी कि यदि वहां किसी प्रवासी का वोट बना हो तो वह वहां वोट का अधिकार न ले सके। इसलिए बूथ स्तर पर हज़ारों ही सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं और उन्हें बार-बार प्रत्येक ढंग-तरीके से मतदाताओं तक सम्पर्क करने के लिए प्रेरित किया गया है।
इसके साथ ही समूची प्रक्रिया का डिजिटल डाटा भी तैयार किया जा रहा है। इससे पहले 2003 की मतदाता सूचियों के साथ लगभग 85 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग (मिलान) किया जा चुका है। पहले चरण में सभी मतदाता सूचियों के प्रत्येक तरह के संशोधन के लिए एक माह का समय दिया गया है। उसके बाद ही मतदाता सूचियों का प्रारूप तैयार किया जाएगा। फिर ऐतराज़ और शिकायतों का निपटारा करने के बाद अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित की जाएंगी। हम उम्मीद करते हैं कि इस तरह की बड़ी तैयारियां किए जाने के बाद संशोधन का यह काम सन्तोषजनक ढंग से सफल बनाया जा सकेगा। नि:संदेह ऐसी प्रक्रिया लोकतंत्र की भावना को और मज़बूत करने में सहायक होगी। हम समूचे पंजाब वासियों को अपील करते हैं कि वे अपना लोकतांत्रिक फज़र् समझते हुए इस प्रक्रिया को पूरा करने में अपना समूचा योगदान डालने में सहायक हों।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

