महाराष्ट्र में नई एग्रीगेटर पॉलिसी लागू: लाइसेंस से किराये तक
मुंबई, 16 जुलाई - महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2026 लागू कर दिए हैं। इन नियमों के तहत ओला, उबर और रैपिडो जैसी एप आधारित यात्री परिवहन सेवाओं को एक समान नियामक व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
- बुधवार को जारी किए गए इन नियमों के तहत सभी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
- नियमों में यात्रियों की सुरक्षा, किराया तय करने और चालकों के हितों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
- महाराष्ट्र में काम करने वाली हर एग्रीगेटर कंपनी को संबंधित प्राधिकरण से लाइसेंस और एक विशिष्ट लाइसेंस पहचान संख्या (यूएलआईएन) लेनी होगी।
- नियमों में कहा गया है कि पुराने नियमों के तहत जारी लाइसेंस नए नियम लागू होने के बाद 60 दिन तक या नए आवेदन पर फैसला होने तक (जो पहले हो) वैध रहेंगे।
- क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की ओर से तय किराया ही आधार किराया माना जाएगा। एग्रीगेटर कंपनियां आधार किराये से 25 फीसदी कम या अधिकतम डेढ़ गुना तक बढ़ाकर किराया ले सकेंगी।
- चालकों को कम से कम 80 फीसदी किराया देना अनिवार्य होगा। सुविधा शुल्क व्यवस्था के तहत आधार किराये का कम से कम 95 फीसदी हिस्सा चालकों को देना होगा।
- सरकार ने बार-बार नियम तोड़ने, यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही, किराये में गड़बड़ी और अन्य उल्लंघनों पर एग्रीगेटर कंपनियों का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने का अधिकार अधिकारियों को दिया है। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- एग्रीगेटर कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर चलने वाले वाहनों के पास वैध पंजीकरण, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, सभी ई-चालान का भुगतान, वाहन ट्रैकिंग प्रणाली, पैनिक बटन और प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध हो।
- नौ साल से पुराने टैक्सी और ऑटो रिक्शा तथा 12 साल से पुरानी बसों को प्लेटफॉर्म से नहीं जोड़ा जा सकेगा।
- नियमों के तहत चौबीसों घंटे ग्राहक सहायता, शिकायत निवारण व्यवस्था, वास्तविक समय की जीपीएस ट्रैकिंग, एप की साइबर सुरक्षा प्रमाणन, यात्रा की सीधी जानकारी साझा करने की सुविधा, दिव्यांग लोगों के लिए विशेष सुविधाएं और नशे की हालत में वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ बर्दाश्त न करने की नीति (जीरो टॉलरेंस) लागू करना अनिवार्य होगा।
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