जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं पीवी संधु

सात साल पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप्स जीतने के बाद पीवी सिंधु ने अपने प्रभावी करियर में एक और मील का पत्थर शामिल किया कि वह जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। सिंधु पिछले दो वर्ष के दौरान कोई भी खिताब न जीत सकीं थीं। लोगों की ज़बाने खुलने लगी थीं कि उनका करियर खत्म हो गया है और अब शादी करने के बाद उन्हें खेल से रिटायरमेंट ले लेना चाहिए। लेकिन 19 जुलाई 2026 को टोक्यो में खिताबी जीत हासिल करके उन्होंने बैडमिंटन संसार को बता दिया कि वह क्यों भारत की महानतम चैम्पियनों में से एक हैं। दो बार ओलंपिक पदक (रजत व कांस्य) जीतने वाली सिंधु ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जापान की ही अकाने यामागुची को महिला एकल के फाइनल में 21-17, 21-17 से पराजित करके जापान ओपन का सुपर-750 खिताब अपने नाम किया। 
यह जीत उस समय आयी जब सिंधु अपने 31वें जन्मदिवस के बाद दो सप्ताह ऊपर गुज़ार चुकी थीं। इसी के साथ उनका 595-दिन का खिताबी सूखा भी समाप्त हो गया। सिंधु का यह पहला सुपर-750 खिताब है। यामागुची के खिलाफ सिंधु ने अभी तक 30 मैच खेले हैं, जिनमें यह उनकी 16वीं जीत है। मैच के बाद भावुक हुईं सिंधु ने बताया, ‘मैं बहुत खुश हूं। इस समय मेरे पास शब्द नहीं हैं क्योंकि 19 महीने बाद मुझे खिताबी जीत हासिल हुई है।’ गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत की इस सबसे सफल शटलर के लिए खिताब आना कठिन हो गया था। इससे पहले उनकी अंतिम खिताबी जीत सय्यैद मोदी सुपर-300 में 1 दिसम्बर 2024 को आयी थी, जब उन्होंने अपने करियर का 20वां खिताब जीता था। पांच बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप्स के पदक जीतने वाली सिंधु के पास अब अपने डेढ़ दशक से अधिक के करियर में खिताबों का प्रभावी संग्रह हो गया है, जिनमें एक वर्ल्ड चैम्पियनशिप, 6 बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर टाइटल्स, 3 सुपर सीरीज़ खिताब, 6 ग्रौं प्री क्राउन, 4 इंटरनेशनल चैलेंज/सीरीज टाइटल्स और एक राष्ट्रकुल खेल स्वर्ण पदक शामिल है। 
इसके बावजूद सिंधु के लिए कम ही जीत इतनी ख़ुशी लायी होंगी जितनी उन्हें टोक्यो में मिली। खिताब तक पहुंचने के लिए सिंधु की राह आसान न थी। उन्होंने फाइनल में वर्तमान विश्व चैंपियन यामागुची को पराजित किया। सिंधु के अनुसार, ‘वास्तव में मेरी आंखों में आंसू थे क्योंकि यह जीत हासिल करना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। मैं बहुत अधिक फोकस कर रही थी और अपने ऊपर मेहनत भी बहुत कर रही थी। मैं विश्वास करती रही कि मैं यह कर सकती हूं। हालांकि बहुत से लोग सवाल कर रहे थे कि ‘क्या हो रहा है? क्या वह खत्म को गई है?’ लेकिन फिर भी मैं अपने ऊपर विश्वास करती रही।’ वैसे इस प्रतियोगिता में किस्मत ने भी सिंधु का आखिरकार साथ दिया। विश्व की नंबर एक खिलाड़ी अन से-यंग, जिन्हें सिंधु 10 मुकाबलों में एक बार भी पराजित नहीं कर सकी हैं, ने प्रतियोगिता से अपना नाम वापस ले लिया क्योंकि उनके लेफ्ट फुट की चोट फिर से उभर आयी थी, ठीक सिंधु के विरुद्ध क्वार्टरफाइनल मुकाबले से पहले। सेमीफाइनल के दूसरे गेम में चेन रिटायर्ड हर्ट हो गईं और सिंधु फाइनल में पहुंच गईं। 
लेकिन इन स्थितियों से सिंधु की उपलब्धि कमतर नहीं हो जाती है। वह पूरी प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ आक्रमक खेल खेल रही थीं। उन्होंने अपने उस आक्रमक खेल को पुन: खोज लिया था, जिसने उन्हें बैडमिंटन का सबसे बड़ा सितारा बनाया था। चेन ने भी सिंधु के प्रभावी प्रदर्शन को स्वीकार किया था। सेमीफाइनल में रिटायर्ड हर्ट होने के बाद चेन ने कहा था, ‘उनका (सिंधु) का आक्रमण विस्फोटक था और मैं तो हमेशा डिफेंड करने में ही लगी हुई थी।’ फाइनल में भी सिंधु ने यही निडरता दिखायी। पहला गेम 17-17 तक बराबर चला और दूसरे गेम में भी 18-17 तक उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन दोनों बार सिंधु ने शक्तिशाली आक्तमक स्ट्रोक्स लगाये और मैच को सीधे गेम्स में जीत लिया। इस प्रतियोगिता में सिंधु का एक नया ही रूप देखने को मिला; वह न सिर्फ जम्प स्मैश मार रही थीं बल्कि अपने पुश में भी काफी सटीक थीं। सवाल यह है कि सिंधु के खेल में यह परिवर्तन कैसे आया? इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी है, अपने शरीर को बड़ी प्रतियोगिता के लिए शेप में लाने के लिए अपने शरीर पर ज़बरदस्त दबाव डाला। गोपीचंद अकादमी में वर्कआउट करने के बाद वह हैदराबाद के घने ट्रैफिक में लगभग 60 किमी (आना जाना) ट्रेवल करतीं ताकि दो घंटे के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनर श्रीकांत वर्मा मदापल्ली के अंडर ट्रेन कर सकें। यह ज़रूरी भी था; क्योंकि पूर्व में लम्बे मैचों के दौरान सिंधु की हार का कारण थकान ही रही है। 
श्रीकांत का कहना है कि सिंधु के शरीर में ़गज़ब के गुण हैं- जैसे वह बहुत जल्दी रिकवर करती है। कड़ी एक्सरसाइज के बाद मात्र 30 सेकंड के बाद उनकी हार्ट रेट सामान्य हो जाती है। दरअसल, सिंधु के शरीर की कुछ मांसपेशियां उनकी फ्रंट कोर्ट मूवमेंट को प्रभावित कर रही थीं। श्रीकांत ने इसी क्षेत्र में कार्य किया और प्रतियोगिता के दौरान सुधार सबको दिखाई दिया। श्रीकांत के अनुसार, ‘हम सिंधु से जो कुछ कहते वह बिना किसी प्रश्न के वह करतीं। वह एकदम ज़मीन से जुड़ी हुई हैं। जब हमने उनसे ग्राउंड के अभाव में लाल मिट्टी पर ट्रेन करने के लिए कहा, तब भी उन्होंने कोई शिकायत नहीं की।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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