हस्ताक्षर का महत्व

स्कूल से आते ही नानू चूहे ने अपना बस्ता पटका और मम्मी से लिपट गया।
‘मम्मी, आज स्कूल में सर ने मुझे बहुत डांटा है कि तुम बहुत लापरवाह हो। किताब कापियां कितने गंदे तरीके से रखते हो। जगह-जगह कटी फटी, तो कहीं स्याही के धब्बे।’
‘ठीक ही तो कहा उन्होंने। मैंने भी तो कई बार समझाया है कि अपनी किताबें अच्छी तरह रखा करो’ मम्मी ने समझाते हुए कहा।
‘मेरी अंग्रेजी की कापी तो बिल्कुल फट गई है’, नानू रोआंसा था।
‘कोई बात नहीं, आज मैं तुझे नई कापी दे दूंगी। उस पर अच्छा कवर भी चढ़ा दूंगी। फिर नोट्स तैयार कर लेना,’ कहती हुई मम्मी नानू को खाना परोसने लगी।
शाम को उन्होंने नानू की कापी पर सुंदर सी जिल्द चढ़ा कर दे दी। नानू बहुत खुश था। 2-3 घंटे बैठ कर उस ने अपना पुराना सारा गृहकार्य भी उस नई कापी में उतार लिया।
‘अब तो सर भी खुश हो जाएंगे’, वह सोच रहा था।
‘शाबाश, अब इस कापी को संभाल कर रखना’, सर गेंदू भालू ने पुराना सारा काम भी जांच दिया था।
नानू ने मन ही मन प्रण कर लिया कि भविष्य में वह अपनी किताबें कापियां इसी तरह संभाल कर रखेगा। खूब अच्छी तरह साफ-सुथरी।
दोपहर को अपना गृहकार्य करने के लिए उसने कापी निकाली ही थी कि दूसरे कमरे से टीवी पर चल रहे गाने ‘मैं निकला गड्डी ले के.... की आवाज आई।
‘आह, मेरी पसंद का गाना,’ वह खुशी से नाच उठा। खुशी से किलकता हुआ नानू टीवी वाले कमरे की ओर भाग गया। कापी फर्श पर गिर पड़ी थी। इतना भी उसे ध्यान नहीं रहा।
थोड़ी देर बाद अपनी दुम हिलाता हुआ छोटा भाई चिंपू चूहा आया। कापी के कवर पर रंगबिरंगा चित्र देख कर उसे खिलौना समझ कर मुंह में दबा कर नोचने-खसोटने लगा था।
थोड़ी सी नोच खसोट में ही कापी के पनेने अलग-अलग हो कर गिर पड़े थे।
नानू ने अंदर कमरे में आकर अपनी कापी की यह हालत देखी तो उसकी आंखों में आंसू आ गए।
‘कल ही तो इतनी मेहनत से कापी तैयार की थी और आज ही फट कर चिंदे चिंदे हो गई। अब मम्मी को मालूम पड़ेगा तो वह भी नाराज़ होंगी,’ सोचते हुई नानू ने एक दूसरी कापी निकाल ली। कुछ भी हो, अब सारा काम दूसरी कापी में तो करना ही होगा।
शाम तक बैठा वह गृहकार्य करता रहा।
‘नानू, खेलने नहीं चलेगा,’ पड़ोस के पंचू खरगोश ने आवाज दी तो नानू का ध्यान टूटा।
‘नहीं पंचू भाई, नई कापी में पुराना सारा काम उतारना है। चिंपू ने कापी ही फाड़ दी। अब चुपचाप नई कापी में उतार रहा हूं ताकि सर को पता नहीं चले, नहीं तो डांटेंगे।’
‘क्यों, पता तो उन्हें चल ही जाएगा। नई कापी में उन के हस्ताक्षर जो नहीं होंगे।’
‘हस्ताक्षर’, नानू चौंका।
‘हां, ये देख,’ कहते हुए पंचू ने पुरानी कापी में हुए हस्ताक्षरों को दिखाया।’
‘नानू ने देखा, मुड़े हुए से अक्षर में लिखा था गै.वर्मा....। तब तक पंचू जा चुका था।
नानू ने अब गौर से हस्ताक्षर को देखा। ये कौन सी कठिन बात है। गृहकार्य के साथ ही वह हस्ताक्षर भी स्वयं कर लेगा। सर को क्या मालूम पड़ेगा।
फिर बड़ी सफाई से लाल स्याही से उस ने अपनी कापी में जगह-जगह सही का चिंह लगा कर ‘गैं-वर्मा’ भी लिख दिया।
पूरा काम निबटा कर वह निश्चित हो चुका था। 
दूसरे दिन जब सर ने उस की कापी देखी तो वह चौंक पड़ा। टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में उन का नाम लिखा हुआ था।
‘नानू, ये कापी तुम ने मुझ से जंचवा ली थी।
‘जी,’ नानू घबरा गया।
साफ झूठ बोलते भी उससे नहीं बन रहा था।
‘ये हस्ताक्षर मेरे ही हैं?’ सर गैंदू भालू ने जोर देकर पूछा तो डरते-डरते नानू सब कुछ बता गया।
‘हूं’, सर को अब गुस्से के साथ ही साथ हंसी भी आने लगी थी।
‘तो आप खुद ही गैंदू वर्मा बन बैठे। सच सच बता देता तो मैं दोबारा कापी जांच देता। कल भी तो जांची थी और फिर इस तरह जाली हस्ताक्षर करना, जानते हो कितना बड़ा जुर्म होता है?
‘क्यों सर?’ अब पूरी कक्षा विस्मित थी।
‘इसलिए कि इस तरह बनावटी हस्ताक्षर कर के लोग आसानी से दूसरों को बेवकूफ बना सकते हैं। यदि बैंक में किसी के जाली हस्ताक्षर किए तो कई साल के लिये जेल जाना पड़ सकता है। इसीलिए हस्ताक्षर का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। बिना देखे भाले, सोचे-समझे किसी को कहीं हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए।
नानू को आज पहली बार हस्ताक्षर का महत्त्व समझ में आया था और उसे अपनी गलती पर पश्चाताप भी हुआ। (उर्वशी)

#हस्ताक्षर का महत्व