भाजपा की बढ़ती सक्रियता
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष का पंजाब के दो दिवसीय दौरे ने एक तो प्रदेश के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है, दूसरी उनकी ओर से यहां आकर दिए गए बयानों ने भाजपा-अकाली गठबंधन संबंधी लगाए जा रहे अनुमानों को भी बहुत सीमा तक स्पष्ट कर दिया है। यह सभी जानते हैं कि अलग-अलग गुटों में बंट गए टकसाली अकालियों ने भाजपा की बढ़ती ताकत को देखते हुए उनके साथ पिछले लम्बे समय से राज्य में चुनाव के लिए जोड़-तोड़ करने के यत्न जारी रखे हुए हैं, दूसरी तरफ भाजपा नेताओं ने लगातार यह बयान दिए हैं कि पार्टी अपने दम पर प्रदेश के चुनाव लड़ेगी और सभी 117 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, जिस तरह कि पिछले कुछ माह से उसकी ओर से ऐसी तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित पार्टी के अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने प्रदेश की यात्राएं शुरू की हुई हैं, उनसे भी इस पार्टी द्वारा पूरे योजनाबद्ध ढंग से की जा रही चुनाव तैयारियों का अहसास होता रहा है।
पार्टी द्वारा निर्धारित योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अपना आधार मज़बूत करने के यत्न जारी हैं। पड़ोसी प्रदेश हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विगत लम्बी अवधि से पंजाब के दौरे ने भी इसके प्रभाव को और बढ़ाया है। नि:संदेह आज नायब सिंह सैनी की चर्चा लगातार होती रहती है। उन्होंने भी विभिन्न समुदायों और संगठनों के कार्यक्रमों में भाग लेकर इस बात को सिद्ध किया है कि इस बार भाजपा अपने दम पर पंजाब की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। विगत अवधि में पार्टी की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री को एक तरह से पंजाब में अपनी गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। दूसरी तरफ टकसाली अकाली गुट अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद भाजपा के साथ उनका गठबंधन हो जाए, क्योंकि अकाली नेताओं द्वारा भाजपा की ओर से सभी सीटों पर लड़ने संबंधी किए जा रहे लगातार दावों का कोई दमदार उत्तर नहीं दिया गया, अपितु उनके द्वारा यही संभावना प्रकट की जा रही है, कि यह गठबंधन शीघ्र ही सफल होगा। अकाली दल (ब) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का प्रधानमंत्री को मिलना, उनके हमले में घायल होने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उनका कुशलक्षेम पूछने ने भी उम्मीद की इस डोरी को लम्बा करके रखा था। इसी 20 अगस्त को लौंगोवाल में हरसिमरत कौर ने भी आयोजित कांफ्रैंस में भाजपा के साथ समझौते की संभावना संबंधी कहा था कि ‘गुरु साहिब मेहर करें यह मेरा बोलने का अधिकार नहीं है इसलिए मैं अपनी आवाज़ रोक रही हूं, आपको स्वयं ही पता चल जाएगा। ऐसे समझौते जिनके ज़रिये दिल्ली से पंजाब के विकास और तरक्की के काम होते रहें’ परन्तु प्रतीत होता है कि अब भाजपा के प्रमुख नेता बी.एल. संतोष की ओर से स्पष्ट रूप में शिरोमणि अकाली दल बादल के साथ किसी भी किस्म के गठबंधन को फिलहाल शुरू से ही रद्द कर दिया गया है। ऐसे हालात में एक बार तो अकाली सफहों में निराशा दिखाई देने लगी है। उन्हें हालात को समझते हुए पुन: अपनी चुनाव नीति को नया रूप देने संबंधी योजनाबंदी करनी पड़ेगी।
जहां तक अन्य पार्टियों का संबंध है। आम आदमी पार्टी भी पूरी तरह सक्रिय हुई दिखाई दे रही है, इसी क्रम में उसकी ओर से विगत दिवस कुछ नई, आर्थिक योजनाओं की घोषणा भी की गई है। पार्टी इस पक्ष से भी सचेत दिखाई देती है कि उसने प्रदेश में स्थापित होने संबंधी रूझान को किस तरह मोड़ देना है। मौजूदा समय में प्रदेश के कांग्रेस नेतृत्व में जारी टकराव भी खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा। लगातार बन रही ऐसी स्थिति ने यहां पार्टी के भीतर बड़े बिखराव को जन्म दिया है, वहीं इसकी चुनाव तैयारियों को भी कमज़ोर किया है। जेल में नज़रबंद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे को कई तरफ से मिल रहे समर्थन को भी पंजाबियों द्वारा ध्यानपूर्वक देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आगामी महीनों में प्रदेश में राजनीतिक हलचल, किन दिशाओं की ओर रुख करती है। पंजाब को नि:संदेह आगामी चुनाव में बेहतर प्रशासन की ज़रूरत है, जो प्रदेश के लिए अच्छी संभावनाएं पैदा कर सके।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

