प्रकृति के साथ संबंधों में लालसा को बाधा न बनाएं

पूरे ब्रह्मंड में सिर्फ धरती पर ही जीवन सम्भव है। प्रकृति अनंत है। इसने इंसानी जीवन को आसान बनाने के लिए शुद्ध जलवायु जैसे अमूल्य तोहफे दिए हैं। प्रकृति इंसानी जीवन के लिए वे सभी साधन उत्पन्न करती है, जिनकी बदौलत इंसान इस धरती पर शासन करता है, लेकिन तथाकथित विकास की दौड़ में अंधा होकर मनुष्य ने प्राकृतिक स्रोतों को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज मनुष्य द्वारा किया जा रहा यह विकास प्रकृति के विनाश का कारण बन रहा है। आज पूरी दुनिया में वैश्विक तपिश (ग्लोबल वार्मिंग) सबसे अधिक चिंता की विषय बन गई है, जिसकी वजह से वनस्पति, जलवायु और मौसम तक बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हमने इस वर्ष यूरोप की दयनीय हालत देख रहे हैं, जहां कई देश भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं और अब तक हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है। सड़कें पिघल रही हैं, गाड़ियों का ढांचा विगड़ रहा है, प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला पानी सामान्य से कहीं ज़्यादा गर्म हो रहा है। बारिश न होने से बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। 
हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस मौजूदा संकट का सृजक खुद इंसान ही है। उसके द्वारा जंगलों और पेड़ों की अंधाधुंध की गई कटाई और प्राकृतिक स्रोतों की लूट का असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। प्रत्येक वर्ष गर्मियों में बढ़ रहे तापमान के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। इंसान ने हवा को इतना प्रदूषित कर दिया है कि शहरी क्षेत्रों में सांस लेना कठिन हो गया है। फैक्ट्रियों के अवशेष, चिमनियों से निकलने वाले ज़हरीले धुएं और कार्बन गैसों के कारण लोग में अस्थमा, खांसी, सांस और आंखों के रोग लगातार बढ़ रहे हैं। आज छोटे-छोटे बच्चे भी खतरनाक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। भारत में तेज़ी से बढ़ रही आबादी, शहरीकरण और एयर कंडीशनरों से निकलने वाली क्लोरो-फ्लोरोकार्बन गैसें पर्यवरण को दूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। इस तथाकथित विकास की वजह से धरती का तापमान बढ़ रहा है। इस वर्ष पंजाब को अभी तक गर्मी और उमस से कोई राहत नहीं मिली है, अक्सर जुलाई महीने में मौसम में बहुत बदलाव आ जाता था, लेकिन इस बार अगस्त के तीसरे सप्ताह तक भी पंजाब में मॉनसून की पर्याप्त बारिश नहीं हुई, हालांकि अलग-अलग ज़िलों में कहीं-कहीं बारिश अवश्य हो जाती है। 
संयुक्त राष्ट्र ने प्रशांत महासागर में बन रहे ‘सुपर अल नीनो’ के बारे में दुनिया को चेतावनी दी है कि यह विश्व भर के मौसम को प्रभावित करता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार अल नीनो मौसमी पैट्रन का एक नया पड़ाव शुरू होने से जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विश्व का तापमान बढ़ रहा है। कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रत्येक वर्ष 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाता है और संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम की तरफ  से हर साल एक विशेष नारा भी दिया जाता है। साल 2026 के लिए पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए पर्यावरण प्रेमियों द्वारा अधिक से अधिक पेड़ लगाने के अभियान शुरू किए गए हैं। जब भी इंसान प्रकृति की विलक्षण भौगोलिक स्थिति के साथ बेवजह छेड़छाड़ करता है तो उसे हमेशा प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। चाहे इंसान इनसे खुद को बचाने के लिए लगातार प्रयास करता है, लेकिन प्रकृति का कहर इंसान के लिए चुनौती बना रहता है। पंजाब में तो अब कई स्थानों पर पानी भी पीने योग्य नहीं रहा और भू-जल स्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। हाल ही में ब्यास नदी सुर्खियों में बनी रही है, जिसमें फैक्ट्रियों से निकलने वाला ज़हरीले पानी सीवरेज की गंदगी नदी में डालने से जल-जीवों का बहुत नुकसान हुआ है। 
दरअसल बरसात में फैक्ट्रियां इसका फायदा उठाती हैं और बारिश के पानी की आड़ में फैक्ट्रियों का पानी भी छोड़ देती हैं। आज मालवा क्षेत्र के कई ज़िलों के लोग कैंसर के अलावा काला पीलिया व गुर्दे के रोगों का शिकार हो रहे हैं। 
दुधारू पशुओं में भी कैंसर के लक्षण पाए जा रहे हैं। इंसान अपनी मनमानी गतिविथियों से दूसरे जीवों के वजूद को भी खतरे में डाल रहा है। इंसान ने धरती की प्राकृतिक संरचना के साथ बहुत खिलवाड़ किया है जबकि हमें प्राकृतिक स्रोतों को सम्भालने और उनका संरक्षण करने काहर सम्भव प्रयास करना चाहिए था। हमें पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने के साथ ही उन्हें खुले में घूमते पशुओं से बचाने के भी यत्न करने चाहिएं। अपने पर्यावरण और भावी पीड़ियों के भविष्य को स्वस्थ बनाने के लिए प्रकृति के साथ तालमेल बनाना ही हमारे हित में होगा।
-मो. 78889-66168

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