एक आंख से भी काम चल जाएगा
मोहल्ले में लोग पत्नी को चिढ़ाते की तेरी तो केवल एक ही लड़की है। दूसरा बच्चा कब होगा। एक आंख को लोग आंख नहीं मानते। बोझ उठाने के लिए हमेशा दो हाथ चाहिए होता है। इसलिए मुझे एक बच्चा और चाहिए। एक लड़की है हमारी इसको लेकर लोग रोज ताना देते हैं।
मोहल्ले और रिश्तेदारों के ताने अब नहीं सुने जाते मुझसे। कोई उपाय करो। पति चकराया बोला बच्चे करना कोई खेल थोड़े है। बाज़ार में मिलने वाला कोई समान थोड़े है। जो बाज़ार गया और चार बच्चे उठा लाया। ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
बच्चों को पालने में दिमाग सरक जाता है। आदमी लगता है थकने। दिमाग लगता है पकने।
पति से जब-जब ये बात पत्नी कहती तो पति चिढ़ जाता। फिर पत्नी को समझाता। एक आंख को लोग आंख क्यों नहीं कहते। लेकिन दो-आंख वालों को भी तो दो आंख वाला नहीं कहते हैं। जब एक आंख से साफ-साफ दिखाई देता हो तब दो आंखों की भला ज़रूरत ही क्या है। तो फिर दो-तीन बच्चे क्यों चाहिए। लेकिन हमारी तो एक ही लड़की है।
आजकल लड़का-लड़की में कोई अंतर नहीं है। जितना लड़के को पालने-पोसने में खर्च आता है। उतना ही लड़की को भी पालने-पोसने में खर्च आता है। सो तो ठीक है लेकिन वंश कैसे चलेगा। हमारा तारणहार कौन बनेगा। कौन तीर्थ करवाएगा। इसके लिए एक लड़के की ज़रूरत है।
अरे पगली क्यों नहीं समझती। लड़का आजकल मां-बाप को मार रहा है। बहू के आ जाने पर वृद्धाश्रम भगा रहा है। लड़के खोटे सिक्के होते जा रहें हैं।
लड़कियां इक्के की तरह लड़कों पर भारी हैं। आजकल सब काम लड़कियां कर रहीं हैं। मां-बाप को अपने साथ रख रहीं हैं? बनाकर खाना भी खिला रहीं हैं। स्कूटी पर घूमा भी रहीं हैं। तीर्थ भी करवा रहीं हैं। और सब छोड़ो वो अर्थी को कांधा भी दे रहीं हैं। इसीलिए लड़कियों पर करो विश्वास। लड़के नालायक निकल सकते हैं। लेकिन लड़कियां सुशील होती हैं। संस्कार की गांठ होती हैं लड़कियां। इसीलिए अपने मन से निकालो ये गलत विचार। संभव है दूसरा बच्चा करोगी।
मान लो लड़का या लड़की ही पैदा हो गई। तब क्या होगा। पालने में बच्चों को टूट जाएगी कमर। गुजरेगी रोते हुए सारी उमर। बच्चे बढ़ने से बंद हो जाएगी सभी सरकारी सुविधाएं। जाती रहेगी नौकरी। पेंशन मिलनी भी हो जाएगी बंद। मान लो जो विकलांग होता है। वो भी एक हाथ या एक पैर होने से काम चला ही लेता है। एक आंख होने से कोई विशेष परेशानी तो लोगों को नहीं होती है। फिर एक आंख ही मिला हो जिसको वो किस्से शिकायत करे। तो जो एक आंख पाकर भी संतोष कर लेता है। वो जीवन में आगे बढ़ जाता है। चिंता करने वाला आदमी पीछे छूट जाता है। लिहाजा एक में ही संतोष करना सीखो।
-मेघदूत मार्केट फुसरो, बोकारो झारखंड
पिन 829144




