‘ब्रिक्स’ की सार्थकता

नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के हो रहे शिखर सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चल रहे प्रत्येक तरह के महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम के संबंध में सदस्य देशों ने विचार-विमर्श किया। दो दिवसीय सम्मेलन के शनिवार को पहले दिन ही इस संगठन के देशों की सार्थक सोच और पहुंच का अहसास हुआ है। इस वर्ष इस संगठन की 20वीं वर्षगांठ है। पहले चाहे इसमें 5 देश ही शामिल थे परन्तु धीरे-धीरे यह क़ािफला बढ़ता गया और इस समय इसके सदस्यों की संख्या11 है और 10 इसके सहयोगी (पार्टनर) सदस्य हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन में यह कहा है कि ब्रिक्स ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक विशेष पहचान बनाई है परन्तु यह किसी और संगठन के विरुद्ध नहीं है। इस बार जब भारत इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है तो विश्व के सामने बड़ी चुनौतियां दरपेश हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध पश्चिम एशिया का गम्भीर संकट और इसके साथ ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापारिक टैरिफ संबंधी नीतियों के कारण ज्यादातर देश एक विशेष संकटमय दौर से गुज़र रहे हैं। श्री मोदी ने यह भी कहा कि हम एक दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से ही आगे बढ़ने का यत्न करते हैं। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है कि अनेक विरोधों के होते हुए इस सम्मेलन ने साझे घोषणा-पत्र पर सहमति प्रकट की है। इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अलग भेंटवार्ता को भी इसलिए अहम कहा जा सकता है कि दूसरी बार यह भेंटवार्ता कुछ समय के अंतराल में ही हुई है। रूस भारत का हमेशा बड़ा समर्थक और मददगार रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति की धमकियों के बावजूद ये दोनों देश एकजुट होकर अपनी निरंतर गति से चलते रहे हैं। इस भेंटवार्ता में भी दोनों देशों ने प्रत्येक क्षेत्र में अधिक से अधिक सहयोग बढ़ाने की बात की है।
चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की भागीदारी ने भी ब्रिक्स की भावना को मज़बूत किया है। अमरीका के साथ उलझते हुए ईरान ज़रूर बड़े संकट में से गुज़र रहा है परन्तु वहां के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भागीदारी ने भी इसके प्रभाव को बढ़ाया है। इस सम्मेलन में स्वीकार किए गए घोषणा-पत्र में अप्रैल, 2025 में जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के दु:खद घटनाक्रम की कड़ी आलोचना की गई है। इसमें पाकिस्तान की ओर से प्रशिक्षित हथियारबंद आतंकवादियों ने 26 व्यक्तियों की गोलियां मार कर हत्या कर दी थी। संगठन की ओर से इसकी आलोचना करते हुए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के साथ-साथ आतंकवादी संगठनों की आर्थिक सहायता करने वालों की भी कड़ी आलोचना की गई है और यह भी कि ऐसे ़खतरनाक संगठनों के साथ सख्ती से निपटा जाना बेहद ज़रूरी करार दिया गया है। घोषणा-पत्र में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा फंड और विश्व बैंक को भी यह अपील की गई है कि वह मज़बूत होती व्यवस्थाओं वाले देशों के लिए सहायक हों। इसके साथ ही स्पष्ट शब्दों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अपनाए टैरिफ लगाने के तरीकों की भी आलोचना की गई है। संयुक्त रूप में अंतर्राष्ट्रीय प्रबंध के सुधार के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार करके आगामी शिखर सम्मेलन तक उसके आधार पर एक ब्रिक्स सुधार रोड मैप बनाने संबंधी सहमति प्रकट की गई है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ये टिप्पणियों रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरल रामाफोसा के सामने की गईं, यह देश ब्रिक्स के पहले सदस्यों में से हैं। इसके अतिरिक्त मलेशिया, इंडोनेशिया, आबूधाबी, इथोपिया, मिस्र और वियतनाम के प्रमुखों का इस सम्मेलन में भाग लेना भी अहम महत्त्व रखता है। भारत ने संयुक्त सुरक्षा परिषद् में सुधारों की ज़रूरत पर भी बल दिया। ज्यादातर देशों ने निवेश, रक्षा, सैमीकंडक्टर, मूलभूत ढांचा, ऊर्जा और डिजीटल अर्थ-व्यवस्था आदि महत्त्वपूर्ण विषयों पर भी गहन-गम्भीर वार्ता की है। पहले दिन के सार्थक परिणामों से दूसरे दिन की स्थूल उपलब्धियों का अनुमान लगाना कठिन नहीं है। इस सम्मेलन ने निश्चय ही भारत के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव में बड़ी वृद्धि करते हुए इसकी ज़िम्मेदारियों को और बढ़ाया है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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