ब्रिक्स : ग्रुप फोटो में मोदी के साथ दिखे जिनपिंग और पुतिन, पीएम बोले- वैश्विक तनाव से सप्लाई चेन पर असर
नई दिल्ली, 13 सितंबर - दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई, जहां सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के विस्तृत परिवार में हार्दिक स्वागत है, आज यह सभागार अलग-अलग दीपों और सांस्कृतिक को एकसाथ जोड़ रहा है। यह ब्रिकस की बढ़ती ताकत आकर्षण और अभूतपूर्ण विश्वास का परिणाम है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के काम को चार बातों पर खास तौर पर आगे बढ़ाया गया। इनमें रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी शामिल हैं। ब्रिक्स देशों के सहयोग से भारत ने अपनी साझा सोच को ऐसे काम में बदलने की कोशिश की है, जिसका फायदा सभी देशों को हो।
विश्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि आज दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी एक जगह आने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।
पीएम ने आगे कहा कि इसी वजह से भारत ने ब्रिक्स देशों को ऐसे संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार रखने पर खास जोर दिया है। इसके तहत संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा आपदाओं से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं।
छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है। वहीं हमारे शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना की गई है। भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है। यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है और यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है।

