ट्रैफिक चालान : सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया जुर्माना वसूली का नया तरीका
चौपहिया और दो पहिया वाहन चालकों द्वारा नियमों की अवहलेना पर किये जाने वाले चालानों के प्रति गंभीर नहीं होना इसलिए चिंता का विषय हो जाता है कि एक मोटे अनुमान के अनुसार वाहनों के चालान के करीब 45 हज़ार करोड़ रुपये वाहन चालकों के विरुद्ध बकाया चले आ रहे हैं। इनमें से करीब 25 हज़ार करोड़ की वसूली हुई है तो 20 हज़ार करोड़ बकाया चल रहे हैं। जानकारों की माने तो वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालना नहीं करने पर सालाना 8 हज़ार 900 करोड़ रुपये से 12 हजार करोड़ रुपये तक के 5 से 8 करोड ट्रैफिक चालान होते हैं और इनमें से 64 से 70 फीसदी चालानों की राशि राजकोष में जमा ही नहीं होती है। इसका सीधा सीधा अर्थ यह है कि यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकांश लोग चालान और जुर्माने के प्रति गंभीर नही हैं। यह इसलिए भी गंभीर हो जाता है कि ़यातायात नियमों की अवहेलना के चलते सड़क दुर्घटनाओं और रोडरेज की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसकी गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए वसूली का रोड़मैप तक सुझा दिया है। जजों ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की है कि चालान की राशि जमा नहीं कराने वाले वाहन मालिकों के विरुद्ध वसूली की कार्रवाई सुनिश्विचत करने के लिए उनके बिजली के बिल में जुर्माना राशि को जोड़ा जा सकता है तो वाहनों को टांसपोर्ट के पोर्टल पर ब्लेकलिस्ट करने, रेण्डम जांच कर पकड़ने, वाहनों के मालिकाना हक या रजिस्ट्रेशन का हस्तांतरण नहीं करने या वाहन ज़ब्ती जैसे सख्त और अप्रिय कदम उठाने में संकोच नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि देश भर में यातायात नियमों की अनदेखी के केवल ई-चालान के ही करीब 20 करोड़ रुपये बकाया चल रहे हैं। अपनी तलख टिप्पणी में उन्होंने ने कहा है कि ई-चालान जारी करते रहना ही पर्याप्त नहीं है अपितु जुर्माने की राशि वसूल करने के भी ठोस प्रयास होने चाहिए।
प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 2024 में12 हज़ार करोड़ रुपये जुर्माना राशि के 8 करोड़ वाहनों के चालान हुए। हालांकि 2025 में यह संख्या कम होकर 8920 करोड़ रुपये के 5.16 करोड़ ट्रैफिक चालान तक रही। मोटे रूप से इनमें 55 प्रतिशत चालान चौपहिया वाहनों के हैं तो 45 फीसदी चालान दोपहिया वाहनों के हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार चालान शुदा राशि में से 64 से लेकर 70 प्रतिशत राशि जमा ही नहीं होती है और साल दर साल बकाया चलती रहती है। वैसे भी इतनी अधिक संख्या में चालान बकाया रहने से न्यायिक प्रक्रिया पर भी बोझ पड़ता है तो सरकार को भी हज़ारों करोड़ की जुर्माना राशि जमा नहीं होने से राजकोष को एक तरह से हानि होती है। वैसे भी भले ही बकाया राषि 8 हजार करोड़ रुपये सालाना हो या 12 हजार करोड़ रुपये की राशि हो, राजकोष में यह राशि होने से विकास कार्य में ही इसका उपयोग हो सकता है। अन्यथा कागज़ों मे ंतो हज़ारों करोड़ का जुर्माना बकाया बोलता रहता है पर राजकोष में जमा के नाम पर कुछ नहीं होता।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को दिशा बता दी है। वैसे भी एक बात साफ हो जानी चाहिए कि यातायात नियमों की सख्ती से पालना पर ही दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है। अन्यथा स्थिति में चालान हो जाने पर भी लोगों में भय नहीं रहता है। वैसे भी जिस तरह से वाहन चलाने में लापरवाही, चाहे जहां वाहन को खड़ी कर यातायात को बाधित करने, यातायात नियमों की पालना के प्रति गंभीर ना होने के कारण ही दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। बात थोड़ी कड़वीं हो सकती है पर खासतौर से युवा और प्रबुद्ध लोग यातायात नियमों की पालना के प्रति गंभीर न थे और न ही हैं। होता भी यह है कि यातायात विभाग द्वारा समय समय पर अभियान तो चलाया जाता है, परन्तु ऐसे हालात अभी नहीं बने कि कोई भी यातायात नियमों की अवहेलना करने से पहले दस बार सोचें। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के अनुसार जुर्माना राशि की वसूली के प्रति गंभीरता दिखाई जाएं तो बहुत कुछ हालात में सुधार हो सकता है। जब जुर्माना राशि पानी-बिजली के बिल में जुड़ कर आयेगी और राशि जमा नहीं कराने पर कनेक्शन कटने के हालात होंगे तो अपने आप ही जुर्माना राशि जमा होने लगेगी।
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