अगर विमान में ‘ऑफ-ड्यूटी’ पायलट न होते, तो..?

ज़रा सोचिए, 30,000 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर एक विमान उड़ रहा है। विमान में केबिन क्रू के 6 सदस्यों अलावा 174 यात्री सवार हैं। इन यात्रियों को ही नहीं केबिन क्रू के लोगों को भी अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में क्या होने वाला है। सब कुछ सामान्य था, तभी विमान का कॉकपिट इंसानी चीख से घिर जाता है और कुछ ही पलों में सब कुछ बदल जाता है। फ्लाइट एफ जेड 1073  के कॉकपिट में दो पायलट थे। लेकिन संयोग से उस दिन विमान में दो और पायलट यात्रियों के रूप में मौजूद थे। ज़ाहिर है वे किसी हमले से निपटने के लिए नहीं बैठे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संभावित एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण उड़ान लंबी होने और मूल क्रू की अनुमत ड्यूटी सीमा पार होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त पायलटों की व्यवस्था की गई थी। लेकिन विमानन के इतिहास में कभी-कभी जिस व्यवस्था का उद्देश्य कुछ और होता है, वही किसी बिल्कुल अनपेक्षित संकट में जीवनरक्षक बन जाती है। फ्लाइट एफजेड 1073 के मामले में यही हुआ।
विमान के सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने कप्तान स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। विमान लगभग 30 सैकेंड में करीब 14,000 फुट नीचे आ गया। जबकि घायल कप्तान कॉकपिट में गिर चुके थे, लेकिन वह किसी तरह से उठकर कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने में कामयाब हो गये। दरवाजा खुलने बाद यात्रियों और क्रू ने मिलकर हमलावर को काबू किया और उसके बाद विमान में मौजूद दोनों अतिरिक्त पायलटों ने नियंत्रण संभाला तथा विमान को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट में उतारा। यहीं इस कहानी का सबसे खतरनाक ‘अगर’ सामने आता है। अगर फ्लाइट में वे दो पायलट नहीं होते तो क्या होता? निश्चित उत्तर आज कोई नहीं दे सकता। जांच पूरी होने से पहले यह कहना भी उचित नहीं होगा कि विमान निश्चित रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता या घायल कप्तान विमान को नियंत्रित कर पाते।
लेकिन एक बात साफ  है—विमान में संयोग से अगर वे प्रशिक्षित पायलट मौजूद न होते तो स्थिति बेहद खौफनाक होती। क्योंकि विमानन इतिहास में ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि कॉकपिट में मौजूद एक सक्षम पायलट कितनी बड़ी सुरक्षा-परत है। साल 1983 में एयर कनाडा फ्लाइट 143- जिसे बाद में ‘गिम्ली ग्लाइडर’ कहा गया, का ईंधन अचानक खत्म हो गया। दोनों इंजन बंद हो गए। कप्तान रॉबर्ट पियर्सन और फ र्स्ट ऑफि सर मौरिस क्विंटल ने बिना इंजन के एक विशाल बोइंग 767 को ग्लाइड कराकर सुरक्षित उतारा था। इसी तरह साल 2009 में यूएस एयरवेज फ्लाइट 1549 के दोनों इंजन पक्षियों के झुंड से टकराने के बाद बंद हो गए। कप्तान चेस्ली ‘सली’ सलेंबर्गर और फर्स्ट ऑफिसर जेफ स्काइल्स ने विमान को हडसन नदी में उतारा और विमान में सवार सभी 155 लोग जीवित बच गये। लेकिन इन सभी घटनाओं में संकट बाहर से आया था- इंजन में खराबी, ईंधन की समस्या, पक्षियों का झुंड। लेकिन एक समानता थी—कॉकपिट में मौजूद दोनों पायलट एक ही लक्ष्य के लिए काम कर रहे थे।
लेकिन यहां परिस्थिति बिल्कुल अलग थी और इसने भविष्य के लिए कहीं ज्यादा असहज सवाल खड़े कर दिये हैं। ऐसे में सवाल यह है कि तब क्या होगा अगर खतरा बाहर से नहीं, कॉकपिट के भीतर से आए? साल 2015 की जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 की त्रासदी ने इसी सवाल को दुनिया के सामने बेहद कठोर तरीके से रखा था। तब सह-पायलट ने कप्तान को कॉकपिट से बाहर रहने दिया और विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त कर दिया जिससे 150 लोगों की मौत हुई थी। बाद की बहस का एक बड़ा हिस्सा इसी बात पर था कि विमान के कॉकपिट सुरक्षा उपाय, जिन्हें मूलत: बाहरी हमलावरों से बचाने के लिए बनाया गया था, भीतर से पैदा होने वाले खतरे के सामने किस तरह की नई चुनौती पैदा करते हैं। एफजेड 1073 की घटना केवल ‘दो पायलट बनाम एक पायलट’ की कहानी नहीं है। यह अतिरिक्त सुरक्षा-परत की कहानी है। अच्छी विमानन सुरक्षा का मूल सिद्धांत यही है कि किसी एक व्यक्ति, एक उपकरण या एक प्रक्रिया की विफलता से पूरी व्यवस्था खत्म नहीं होनी चाहिए। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि अब हर यात्री विमान में दो अतिरिक्त ऑफ-ड्यूटी पायलट अनिवार्य कर दिए जाएं? यह विचार सुनने में बेहद आकर्षक है। आखिर एफजेड 1073 में यही अतिरिक्त पायलट संकट के बाद विमान को सुरक्षित ज़मीन तक ले गए। लेकिन हर उड़ान में दो अतिरिक्त पायलट रखने का मतलब होगा लाखों उड़ानों में अतिरिक्त प्रशिक्षित क्रू, सीटों की उपलब्धता, वेतन और परिचालन लागत का बहुत ज्यादा बढ़ जाना। 
फ्लाईट एफजेड 1073 की घटना सिखाती है, सुरक्षा में संयोग को व्यवस्था का विकल्प नहीं बनने देना चाहिए। उस दिन अतिरिक्त पायलटों की मौजूदगी का मूल कारण कोई संभावित हमला नहीं था। वे इसलिए थे क्योंकि उड़ान लंबी हो सकती थी। लेकिन जब असंभव-सी परिस्थिति सामने आयी, तो वही व्यवस्था सुरक्षा कवच बन गयी। इसलिए शायद सही सवाल यह नहीं है कि ‘क्या हर विमान में दो ऑफ-ड्यूटी पायलट अनिवार्य हों?’ सही सवाल है, क्या हर विमान में ऐसी स्थिति के लिए अनिवार्य, बहुस्तरीय और तुरंत सक्रिय होने वाली व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें कॉकपिट का एक पायलट अचानक विमान उड़ाने में असमर्थ हो जाए, चाहे वजह बीमारी हो, बेहोशी हो या कोई जानबूझकर की गई हरकत? इसका उत्तर विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों, नियामकों और जांच एजेंसियों को आंकड़ों तथा जोखिम-विश्लेषण के आधार पर देना होगा।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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