बच्चो, बुरी आदतों का त्याग करें


प्यारे बच्चो। आप जिंदगी में आगे बढ़ना तो चाहते हो पर मंज़िल प्राप्त करने के लिए आपकी राह में आने वाली रुकावटों के कारण आपके पैर रुक जाते हैं। क्यों होता है ऐसा? तनिक सोचिए तो सही। क्या आत्म-विश्वास की कमी के कारण आप डावांडोल हो जाते हो? बच्चो ! आपको मंज़िल अवश्य मिलेगी। पर इसके लिए रोज़ाना के काम की ओर ध्यान देना अत्यावश्यक है। आजकल आप तीन-चार वर्ष की आयु में ही मोबाइल फोन बाखूबी से चला रहो हो। आपको मोबाइल के सभी फंक्शनों के बारे में पता है। इस छोटी-सी आयु में ही आपको मोबाइल का चस्का लग चुका है। यह अच्छी आदत नहीं है। टी.वी पर कार्टून देखने की लालसा आपके शारीरिक व मानसिक विकास में रुकावट का मुख्य कारण बनती जा रही है। बहुत ही चिंतन की बात है कि वर्तमान समय में स्कूल पढ़ते बच्चे फेसबुक व व्हट्सएप जैसी सोशल वैब साइटों पर दिनभर व्यस्त रहकर अपना कीमती समय गंवा रहे हैं। जिंदगी अनमोल है और समय अपनी तेज़ गति से आगे ही आगे बढ़ता जा रहा है, पर आपका मन पढ़ाई से भटक रहा है। प्यारे बच्चो ! इन बुरी आदतों को छोड़ते हुए अपनी जिंदगी के स्वप्नों की मंज़िल की ओर बढ़ते चलो। हाँ, मंज़िल की ओर जाते हुए आपके रास्ते में अनेक ललचाने वाली वस्तुएं भी आएंगी। आपने इन सुन्दर वस्तुओं एवं सुन्दर दृश्यों की ओर आकर्षित नहीं होना है। जब तक आप अपनी मंज़िल तक पहुंच नहीं जाते तब तक आपने रास्ते में रुकना नहीं, बैठना नहीं और आराम भी नहीं करना है। जिंदगी का सफर लम्बा है। फिर भी मंज़िल कोई दूर नहीं है। बच्चो ! यदि सचमुच आप जीवन के क्षेत्र में अपनी मंज़िल की तलाश में हो तो अंहकारी खरगोश की नकल न करो बल्कि कछुए की तरह बिना रुके लगातार अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते जाओ तो सफलता यकीनी है। घर में माँ-बाप, बहन-भाई के साथ बात सांझी करने में भलाई है। पढ़ाई संबंधी आ रही समस्या का हल अध्यापकगण से बात करने में है। उनसे बेझिझक बात करनी उपयोगी है। कभी झूठ न बोलो, बहाने न बनाओ। अनुशासित व सादा जीवन व्यतीत करो। बालिग होने से पहले वाहन, गाड़ी चलाना अपराध है। ऐसे न करो। गरीब, जरुरतमंद साथियों की सहायता करते रहने से आपको अपनी मंज़िल आसानी से ही मिल जाएगी। मंज़िल की तलाश के लिए हमेशा सचेत रहो। 

-वरिन्द्र शर्मा
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