124 बीमारियों को सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों तक सीमित कर 46 लाख परिवारों को ठगा : डा. चीमा


चंडीगढ़, 21 अगस्त (अ.स.): पंजाब सरकार द्वारा नई शुरू की गई सरबत स्वास्थ्य बीमा योजना में विभिन्न 124 बीमारियों के इलाज के लिए पैकेज को सिर्फ व सिर्फ सरकारी अस्पताल तक सीमित करके पंजाब के लोगों से बड़ी ठगी मारी है। इस बात का प्रगटावा शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपप्रधान व प्रवक्ता और पूर्व शिक्षा मंत्री डा. दलजीत सिंह चीमा ने प्रैस को जारी एक लिखित बयान में किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को व पंजाब की जनता को बड़ी अच्छी तरह से जानकारी है कि पंजाब के मैडीकल कालेजों व बड़े शहरों के कुछ अस्पतालों को छोड़ कर शेष सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों की हालत बहुत दयनीय है। इन में बड़े स्तर पर डाक्टरों व पैरा मैडीकल स्टाफ की कमी, बुनियादी ढांचे की कमी के साथ-साथ मैडीकल सुविधाओं की बहुत बड़ी कमी है। परन्तु यह सारा कुछ जानते हुए सरकार ने बड़ी चालाकी के साथ 124 अति महत्वपूर्ण बीमारियों के इलाज को इन सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों तक सीमित करके लोगों को एक बारी फिर गंभीर इलाज के लिए सरकारी रहमो-करम पर छोड़ दिया है। जिसका कि पंजाब के गरीब लोगों को किसी तरह का भी कोई फायदा होने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केन्द्र यह सभी सुविधाएं देने के समर्थ होते व लोगों का इन संस्थाओं में विश्वास होता तो लोग लाखों रुपए खर्च कर व कज़र्े उठा कर प्राईवेट अस्पतालों में क्यों जाते? अपना बयान जारी रखते हुए डा. चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जारी की इन 124 बीमारियों की लिस्ट में यह निर्देश दिये गए हैं कि एमरजैंसी हालात में पहले मरीज़ को सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र ही जाना पड़ेगा। परन्तु क्या सरकारी अस्पतालों में सरकारी डाक्टर रात को उपलब्ध हैं। उन्हाेंने हैरानी व्यक्त की कि सारी जनरल सर्जरी को सरकारी अस्पताल तक सीमित किया गया हे जबकि बहुसंख्या लोग बड़ा आप्रेशन तो क्या छोटी सर्जरी भी सरकारी अस्पताल से कराने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि इस लिस्ट में गंभीर हादसों में घायल होने वाले मरीज़ों को बहुत बड़ी परेशानी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि सरकार की लिस्ट के अनुसार हड्डियों के सभी छोटे-बड़े आप्रेशन का इलाज सरकारी अस्पताल में ही किया जाएगा। उन्हाेंने कहा कि इस तरह हाई रिसक डिलीवरी, साईजैरीएन सैक्शन व बच्चेदानी निकालने आदि के आप्रेशन भी स्वास्थ्य केन्द्रों तक ही सीमित कर दिये गए हैं।