उपचुनाव : सरकार का रिपोर्ट कार्ड बताएंगे परिणाम


प्रदेश की धर्मशाला और पच्छाद विधानसभा क्षेत्रों में आज हो रहे उपचुनाव को सरकार की अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी जंग जीतने के लिए भाजपा-कांग्रेस सहित निर्दलीय प्रत्याशियों ने पूरी ताकत लगाई। मतदान के बाद परिणाम आने हैं। सियासत में ऐसा माना जाता है कि उपचुनाव सत्ताधारी पार्टी के प्रत्याशी ही जीतते हैं, लेकिन इस बार ऐसा पूरी तरह नजर नहीं आ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों विधानसभा क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस-भाजपा के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के बागी प्रत्याशी भी मुकाबले में खड़े नज़र आ रहे हैं। कुछ माह पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने चारों लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के लिए बड़ी बात यह थी कि प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा भारी मतों से जीती थी। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर को 18655 वोटों की बढ़त मिली थी, तो पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप को 16 हज़ार से अधिक वोट से बढ़त मिली थी।  अब यह चर्चा है कि भाजपा संगठन और सरकार लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त को बनाए रखने में कामयाब होंगे या नहीं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ प्रदेश के मुद्दों पर होते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव प्रदेश स्तर के मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर होते हैं जिससे विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार की नीतियों और उपलब्धियों के आधार पर जनता वोट देती है। सीधा सा आशय है कि प्रदेश में होने वाले दोनों उपचुनाव प्रदेश
सरकार के विकासात्मक कार्यों के आधार पर होंगे। सरकार के कार्यों और नीतियों से जनता खुश होगी, तो भाजपा को वोट देगी और नहीं होगी तो सरकार के खिलाफ  मत देगी। उपचुनाव में मतदान के लिए जनता का यही पैमाना रहा, तो यह तय है कि चुनाव परिणाम सरकार का रिपोर्ट कार्ड बताएंगे।  चुनाव परिणामों से यह अनुमान लगाया जाएगा कि सरकार की लगभग दो वर्ष की कार्यप्रणाली से प्रदेश की जनता खुश है कि नहीं। अगर सरकार के पक्ष में परिणाम आते हैं, तो फि र ठीक है, लेकिन विपरीत परिणाम आने पर सरकार को मंथन करना होगा और अपने विकास की दिशा और दशा को बदलने के प्रयास करने होंगे। अब परिणाम आने पर ही पता चलेगा कि जनता के बीच सरकार का रिपोर्ट कॉर्ड क्या है। लिट फेस्ट : छिड़ गई सियासी बहस भाजपा नीत केंद्र सरकार और साहित्यकारों के बीच विवाद समय-समय पर सुर्खियों में रहता है। कभी असहिष्णुता को लेकर, तो कभी बोलने की आज़ादी को लेकर, तो कहीं शहरी नकसलवाद को लेकर विवाद चलता रहा। सरकार और साहित्यकारों के बीच नई बहस का जन्म हिमाचल प्रदेश की शांत वादी कसौली में साहित्यकार
खुशवंत सिंह की याद में आयोजित लिट फेस्ट में उस समय हुआ, जब  साहित्यकारों ने केंद्र सरकार के द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर मंथन किया और इसे कश्मीर की जनता के खिलाफ  बताया।  साहित्यकारों ने सीधे तौर पर जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने को गलत ठहराया। धारा 370 पर साहित्यकारों का यह रुख भाजपा से जुड़े संगठनों को रास नहीं आया और विरोध शुरू हो गया। हिमाचल के सोलन ज़िले स्थित कसौली में हुए लिटफेस्ट के दूसरे ही दिन बुद्धिजीवियों ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के निर्णय को गलत करार दिया, तो वहीं बुद्धिजीवियों की इस बात पर लिटफेस्ट के आयोजन स्थल के बाहर कुछ हिंदू संगठनों से विरोध
प्रदर्शन शुरू कर दिया।  ढाई लाख नगद : जांच सार्वजनिक होनी चाहिए भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार कैश लेस एकॉनामी को लेकर हल्ला बोल रही है। इसी बीच हिमाचल प्रदेश की मंत्री की पत्नी की गाड़ी से चंडीगढ़ में ढाई लाख चोरी हो गए। मंत्री की पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज की, लेकिन यह सियासी बहस का मुद्दा बन गया। सवाल यह उठता है कि जब सरकार आम जनता को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए तरह-तरह की सुविधाएं जुटा रही है और नियम कानून बना रही है, तो फि र मंत्री जी की पत्नी के पास ढाई लाख नगद कैसे
चोरी हो गए। सवाल यह भी उठा कि मंत्री जी की पत्नी के लिए परिवहन विभाग के अधिकारी की गाड़ी चंडीगढ़ कैसे पहुंची। क्यों परिवहन विभाग के अधिकारी की गाड़ी से ही मंत्री जी की पत्नी के पैसे चोरी हुए थे।  विपक्षी दल कांग्रेसी नेताओं के विरोध के साथ मीडिया में मामले के तूल पकड़ने पर मंत्री और मंत्री की पत्नी विवादों में घिर गये। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, तो उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में पूरा मामला है। परिवहन विभाग के अधिकारी की गाड़ी मंत्री जी की पत्नी के लिए कैसे गई, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसकी जांच सरकार करवाएगी। जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार इस मामले की पूरी जांच कराएगी और जनता के समक्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी, जिससे जनता को पता चले सके कि इसमें दोषियों के खिलाफ  सरकार ने क्या कार्रवाई की।