हरियाणा मंत्रिमंडल के विस्तार पर लगी हैं सभी की नजरें


हरियाणा मंत्रिमंडल का विस्तार पिछले 16 दिनों से अटका हुआ है। दिवाली के दिन 27 अक्तूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने शपथ ली थी। उम्मीद की जा रही थी कि अगले 2-3 दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा और नए मंत्रियों के शपथ लेने के साथ ही मंत्रियों के विभाग भी बांट दिए जाएंगे। अभी तक पिछले 16 दिनों से न तो मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और न ही दुष्यंत को अभी तक कोई विभाग मिला है। फिल्हाल सारे विभाग मुख्यमंत्री के पास ही हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर सरकार बनाने के लिए भाजपा ने जजपा व निर्दलीय विधायकों से समर्थन लिया है। भाजपा के हिस्से मुख्यमंत्री का पद और जजपा के हिस्से उप मुख्यमंत्री का पद आया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक कर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विधानसभा के विशेष सत्र में नए विधायकों को शपथ दिलाने के साथ-साथ स्पीकर का भी चुनाव कर लिया गया। 
मेयर से स्पीकर तक 
चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर रहे ज्ञानचंद गुप्ता सर्व-सम्मति से हरियाणा विधानसभा के नए स्पीकर चुने गए हैं। ज्ञानचंद गुप्ता पंचकूला से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और इस बार गुप्ता ने पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन को हराया है। चंद्रमोहन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बड़े बेटे हैं और पंचकूला व कालका से चार बार विधायक रह चुके हैं। ज्ञानचंद गुप्ता 2009 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। जब नरेंद्र मोदी हरियाणा व चंडीगढ़ भाजपा के प्रभारी थे, उस समय से ज्ञानचंद गुप्ता के नरेंद्र मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। 2009 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ज्ञानचंद गुप्ता को भाजपा का चीफ व्हिप बनाकर उन्हें मंत्री वाला दर्जा दिया गया था। इसके अलावा उन्हें विधानसभा की कार्यवाही के संचालन की जिम्मेदारी भी दी जाती थी। इस बार पूर्व स्पीकर कंवरपाल फिर से स्पीकर बनने की बजाय मंत्री बनने को इच्छुक थे, जिसके चलते ज्ञानचंद गुप्ता को मंत्री की बजाय स्पीकर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। ज्ञानचंद गुप्ता की पृष्ठभूमि आरएसएस से है और कि वह भाजपा के भरोसेमंद साथियों में गिने जाते हैं। 
मंत्रिमंडल में होंगे नए चेहर
इस बार हरियाणा मंत्रिमंडल में ज्यादातर नए चेहरे नजर आएंगे। भाजपा ने पिछली सरकार के दो मंत्रियों विपुल गोयल और राव नरबीर सिंह के साथ-साथ डिप्टी स्पीकर संतोष यादव की टिकट काट दी थी। भाजपा के 8 मंत्री चुनाव हार गए। चुनाव हारने वाले दिग्गज मंत्रियों में शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा, कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार, स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन, सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर, एससी-बीसी कल्याण मंत्री कृष्ण बेदी, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री करण देव कंबोज के अलावा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला भी बुरी तरह से चुनाव हार गए। पिछले मंत्रिमंडल के मंत्रियों में केवलमात्र अनिल विज और डॉ. बनवारी लाल ही चुनाव जीते हैं। इस बार फिर अनिल विज और बनवारी लाल को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। भाजपा के कोटे से पूर्व स्पीकर कंवरपाल, पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अभय सिंह यादव, सीमा त्रिखा भी मंत्री बन सकते हैं। मंत्री पद पाने वालों की दौड़ में पूर्व सीपीएस व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के भतीजे दूड़ा राम, दीपक मंगला, घनश्याम दास सर्राफ व कमल गुप्ता भी लाइन में लगे हैं। जजपा कोटे से दुष्यंत चौटाला के अलावा नारनौंद के विधायक राम कुमार गौतम, उकलाना के विधायक अनूप धानक या गुहला के विधायक ईश्वर सिंह भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। अब प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किसी भी समय हो सकता है। फिल्हाल सभी की नजरें मंत्रिमंडल के विस्तार और विभागों के बंटवारे को लेकर लगी हुई हैं। 
निर्दलीयों को लेकर दुविधा 
हरियाणा मंत्रिमंडल में निर्दलीयों को शामिल किया जाए या नहीं, इसको लेकर सरकार में अभी तक दुविधा बनी हुई है। भाजपा का एक धड़ा यह चाहता है कि सरकार को समर्थन दे रहे 7 निर्दलीय विधायकों में से किन्हीं दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया जाए। इनमें रानियां के विधायक रणजीत सिंह का नाम सबसे आगे है। दूसरे धड़े की यह दलील है कि अगर 7 में से किन्हीं 2 निर्दलीय विधायकों को मंत्री बनाया गया तो स्वभाविक तौर पर बाकी 5 निर्दलीय विधायकों में सरकार के प्रति नाराजगी का भाव पैदा हो सकता है। उनका यह कहना है कि किसी भी निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाने की बजाय उन्हें अच्छे-अच्छे बोर्ड-निगमों की चेयरमैनी दी जा सकती है। अब मंत्रिमंडल विस्तार के समय ही यह बात साफ हो पाएगी कि निर्दलीय विधायकों में से किसको मंत्री बनाया जाता है और किसको चेयरमैनी मिलेगी। इसके अलावा किसी जजपा या निर्दलीय विधायक को डिप्टी स्पीकर का पद भी दिया जा सकता है। 
जजपा का दमदार प्रदर्शन
दस महीने पहले स्थापित हुई जननायक जनता पार्टी के दमदार प्रदर्शन ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया हौ। दस महीने पहले बनी यह पार्टी दस सीटें हासिल करके सत्ता में भागीदार बनने में सफल हुई। इस पार्टी के प्रमुख नेता दुष्यंत चौटाला न सिर्फ उचाना में भाजपा की दिग्गज नेत्री प्रेमलता को 47 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराने में सफल हुए बल्कि दुष्यंत की माता नैना चौटाला भी बाढड़ा से पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के बेटे रणबीर महिंद्रा को हराकर विधानसभा में दूसरी बार दाखिल हुईं। भाजपा की पूर्व विधायक प्रेमलता के पति चौधरी बीरेंद्र सिंह भाजपा के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और उनके बेटे व पूर्व आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह हिसार से भाजपा के लोकसभा सांसद हैं। बृजेंद्र सिंह ने करीब 5 महीने पहले दुष्यंत चौटाला को हिसार लोकसभा सीट से हराया था और 5 महीने बाद दुष्यंत चौटाला उन्हीं के गृह क्षेत्र उचाना में जाकर अपनी हार का बदला चुकाने में सफल रहे। उल्लेखनीय है कि दुष्यंत चौटाला साढ़े 25 साल की उम्र में देश के सबसे युवा सांसद चुने गए थे और वह 2014 से 2019 तक हिसार के सांसद रहे। अब वह 31 साल की उम्र में हरियाणा के डिप्टी चीफ मिनिस्टर चुने गए हैं। 
पड़दादा-पड़पोते की जोड़ी
 पिछले हफ्ते पंजाब विधानसभा में पंजाब व हरियाणा के विधायकों का एक संयुक्त अधिवेशन श्री गुरु  नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर बुलाया गया था। सत्र में भाग लेने गए हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ वाली सीट पर बैठने का मौका मिला। प्रकाश सिंह बादल पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के पगड़ी बदल भाई हैं और बादल व चौटाला परिवारों में दशकों पुराना पारिवारिक रिश्ता है। इस नाते प्रकाश सिंह बादल रिश्ते में दुष्यंत चौटाला के पड़दादा लगते हैं। संयुक्त पंजाब में चौधरी देवीलाल और प्रकाश सिंह बादल पंजाब विधानसभा में साथ बैठा करते थे। अब संयोग से देवीलाल के पड़पोते को अपने पड़दादा के पगड़ी बदल भाई प्रकाश सिंह बादल के साथ पंजाब विधानसभा में बैठने का मौका मिला। इस मौके पर लिए गए चित्र सोशल मीडिया में खूब वायरल हुए और बेहद चर्चित भी रहे। 
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