विधानसभा सैशन उपरांत खैहरा विरुद्ध शिकायत पर फैसला लेने के समर्थ हो सकते हैं स्पीकर


चंडीगढ़, 14 फरवरी (सुरजीत सिंह सत्ती): पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैहरा की विधानसभा सदस्य समाप्त करने की याचिका पर पंजाब विधानसभा के 20 फरवरी को शुरू होने जा रहे सैशन उपरांत ही स्पीकर कोई फैसला लेने में समर्थ हो सकेंगे। वर्ष 1985 में संविधान के 10वें शैड्यूल में संशोधन करके राज्यों के स्पीकरों को संबंधित राज्यों के विधायकों द्वारा पार्टी के साथ बगावत करने की सूरत में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने संबंधी याचिक की सुनवाई करने के अधिकार दिए गए थे परंतु इस संशोधन उपरांत प्रत्येक राज्य के स्पीकरों को शक्तियां देने के लिए नियम बनाने थे। देश में 6 प्रमुखों को छोड़ कर सभी प्रमुखों में नियम है व पंजाब इन 6 प्रमुखों में एक है, जिसने संशोधन होने के 35 वर्ष उपरांत भी अभी तक नियम नहीं बनाए। यह मुख्य कारण रहा है कि सुखपाल सिंह खैहरा व और विधायकों द्वारा पार्टी के साथ बगावत करने पर उनके विरुद्ध आई शिकायतों पर स्पीकर कोई फैसला नहीं ले सके हैं व अब पंजाब सरकार द्वारा इन नियमों का प्रारूप तैयार कर लिया गया है, जोकि स्वीकृति हेतु 20 फरवरी को शुरू होने जा रहे विधानसभा के सैशन में लाया जा रहा है। नियमों को स्वीकृति के लिए विधानसभा के फ्लोर पर लाए जाने की जानकारी एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने शुक्रवार को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस बी.एस. वालिया की बैंच को उस याचिका की सुनवाई दौरान दी, जिस याचिका में खैहरा के विरुद्ध स्पीकर के पास दाखिल किए मांग पत्र पर फैसला लेने के लिए स्पीकर को हिदायत किए जाने की मांग की गई है। ए.जी. ने जहां नियमों की अनभिज्ञता की जानकारी दी, जहां इस मामले की सुनवाई विधानसभा सैशन के बाद तक मुलतवी करने की बेनती की। ए.जी. द्वारा स्थिति बारे जागरूक करवाए जाने पर हाईकोर्ट ने मामले में नोटिस जारी न करते सुनवाई 2 मार्च पर डाल दी है।