भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अर्थव्यवस्था, संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा : सीपीआई (एम)
नई दिल्ली, 8 फरवरी (भाषा) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने रविवार को दावा किया कि भारत ने दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते में अमेरिका को "भारी रियायतें" दी हैं, जो "हमारी अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा" है। वाम दल ने एक बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को इस समझौते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए और इसे संसद में पेश किया जाना चाहिए।
भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर पहुंच गए हैं, जिसके तहत दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे।
सीपीआई (एम) ने अपने पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में कहा, "जैसे-जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विवरण धीरे-धीरे सामने आ रहा है, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस तथाकथित 'अंतरिम सौदे' में अमेरिका को बड़ी रियायतें दी हैं। ये रियायतें भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।"
"इसके अलावा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध आंशिक जानकारी के अनुसार, भारत सरकार फलों, कपास, ट्री नट्स, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य और कृषि उत्पादों के अमेरिकी निर्यात पर कोई टैरिफ (शून्य टैरिफ) लगाने पर सहमत नहीं हुई है।" पार्टी ने कहा कि इस फैसले से देशभर के लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका को गंभीर नुकसान होगा।

