Railway:यात्रियों के लिए अच्छी खबर; न डीजल, न बिजली अब हाइड्रोजन तकनीक से चलेगी ट्रेन
ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जल्द बड़ी खुशखबरी आने वाली है। देश में पहली बार ऐसी ट्रेन चलने की तैयारी है जो न डीजल से चलेगी और न बिजली से, बल्कि हाइड्रोजन तकनीक यानी पानी से बनने वाली ऊर्जा से दौड़ेगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अप्रैल में ट्रैक पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
अप्रैल में ट्रैक पर दौड़ सकती है
रेल मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है,पहली हाइड्रोजन ट्रेन अगले महीने अप्रैल में ट्रैक पर दौड़ सकती है। हालांकि इसकी सटीक तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन इसे शुरू करने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। संभावना है कि स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाए। यह ट्रेन सबसे पहले हरियाणा में चलाई जाएगी। इस ट्रेन का रूट हरियाणा में जींद से पानीपत के बीच होगा। यह ट्रेन करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। एक चक्कर पूरा करने के लिए इंजन में लगभग 360 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जाएगी। चेन्नई स्थित आईसीएफ में जुलाई 2025 में इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जा रहा है। इसका ट्रायल सफल रहा है और फ्यूल सेल के डिजाइन के साथ हाइड्रोजन प्लांट को भी मंजूरी मिल चुकी है। सुरक्षा के लिहाज से भी हाइड्रोजन सिस्टम को वैश्विक एजेंसियों से मंजूरी प्राप्त हो चुकी है।
इस तरह से बनाई गई है ट्रेन
एक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट को कन्वर्ट करके इस हाइड्रोजन ट्रेन को तैयार किया गया है। इसकी पावर करीब 1200 हॉर्सपावर बताई जा रही है। भारत अब स्थानीय स्तर पर हाइड्रोजन उत्पादन पर भी फोकस करेगा, जिससे यह तकनीक सस्ती और आत्मनिर्भर बन सके। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया है। भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है और इसी के तहत ट्रेनों में फ्यूल के रूप में हाइड्रोजन के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है।
भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज पहल के तहत शुरुआत में 35 हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। इसमें प्रति ट्रेन की अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपये होगी, जबकि जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन ट्रेनों को खासतौर पर हेरिटेज और हिल रूट पर चलाने की तैयारी की जा रही है।

