उत्तराखंड के कर्णप्रयाग विवाद मामले में क्रॉस एफआईआर दर्ज
देहरादून, 23 जून - कर्णप्रयाग विवाद मामले में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इस मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। पुलिस पर कथित ज्यादती और मारपीट के आरोपों की जांच की जाएगी। डीआईजी यशवंत सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उन्हें दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिख संगठनों और अल्पसंख्यक आयोग के दबाव के बाद धामी सरकार ने मामले की जांच चमोली पुलिस से लेकर हरिद्वार के एसएसपी को सौंप दी है। मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर भी दर्ज की गई है। वहीं, निहंगों को बिना पगड़ी के पेश किए जाने के आरोपों की भी डीआईजी स्तर पर जांच होगी।
उत्तराखंड सरकार ने कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों में हुई हिंसक घटनाओं के बाद पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए जांच की दिशा बदल दी है। पीड़ित सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत के आधार पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है।
इस बीच, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष बलजीत सोनी ने कहा कि विभिन्न सिख संगठनों की मांगों को ध्यान में रखते हुए राज्य के डीजीपी ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
गौरतलब है कि पूरा विवाद 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों और कुछ निहंग सिंहों के बीच हुई हिंसक झड़प से शुरू हुआ था। इसके बाद पुलिस ने कुछ निहंग सिंहों को हिरासत में लिया, जहां उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट किए जाने के आरोप लगे।
बाद में पंजाब से पहुंचे कुछ निहंग सिंहों ने रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में डेरा डाल लिया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ निहंगों ने गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर कब्जा कर अपने गिरफ्तार साथियों की बिना शर्त रिहाई की मांग शुरू कर दी।
घायल निहंग सिंह के पिता के बयान के आधार पर अब क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है और मामले में पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

