जालंधर में फर्जी कॉल सेंटर पर ED का छापा, शहर के नामी लोगों का नाम आया सामने
जालंधर, (5 अगस्त)- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसा और 187.13 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। मिली जानकारी के मुताबिक ईडी की जांच में सामने आया कि जालंधर से संचालित एक अवैध कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिकी नागरिकों से तकनीकी सहायता और सरकारी एजेंसियों के नाम पर झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी।
ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की है। वहीं कुर्क की गई संपत्तियों में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित फ्लैट, विला और फार्महाउस शामिल हैं। जांच की शुरुआत अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी और सीबीआई की ओर से साल 2023 में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी।
ईडी के मुताबिक, जालंधर में 'डिजीकम्प्स - द फ्यूचर ऑफ डिजिटल' नाम से एक अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। यहां करीब 36 कर्मचारी काम कर रहे थे। इनमें जिगर अहमद, यश खुराना, इंदरजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा जैसे कर्मचारी शामिल थे, जो जानी उर्फ जानी त्यागी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा के निर्देशन में विदेशी नागरिकों को फोन कर उन्हें तकनीकी सहायता देने का झांसा देते थे।
आरोपी खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, विशेष रूप से आईआरएस (इंटरनल रेवेन्यू सर्विस) से जुड़ा बताकर लोगों को डराते थे कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है। इसके बाद पीड़ितों से बैंकिंग और वित्तीय जानकारी हासिल कर उनसे रकम ऐंठी जाती थी। ठगी से प्राप्त धनराशि पहले क्रिप्टोकरंसी वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद शेल कंपनियों के जरिए इस रकम को हरियाणा, दिल्ली और गोवा में महंगी अचल संपत्तियां खरीदकर वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।
इस मामले में ईडी ने जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 13 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज और 34 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ठगी की रकम से खरीदी गई अन्य संपत्तियों को भी जांच के दायरे में लिया जाएगा।

