हिमाचल में नए जिले बनाने की कवायद तेज, सरकार ने गठित किया 4 सदस्यीय आयोग

शिमला, 14 अक्टूबर (मनीष शारदा)- हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की संभावनाओं और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है। राज्यपाल की ओर से 14 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। आयोग को गठन की तारीख से छह महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में चार नए जिले बनाए जाने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से नए जिलों के गठन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आयोग की सिफारिशों के बाद ही प्रशासनिक ढांचे में संभावित बदलावों की तस्वीर स्पष्ट होगी।

जिलों से लेकर तहसीलों तक की व्यवस्था की होगी समीक्षा

गठित आयोग प्रदेश में मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगा। इसके तहत जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों और विभिन्न विभागों के अन्य प्रशासनिक प्रभागों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। आयोग यह तय करने के लिए सुझाव देगा कि किन क्षेत्रों में नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों का विलय करने, विभाजन करने या उनका पुनर्गठन करने की आवश्यकता है।

इस प्रक्रिया में जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, लोगों की प्रशासनिक केंद्रों तक पहुंच, प्रशासनिक दक्षता और जनसुविधाओं को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और आम लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध करवाना है।

जनप्रतिनिधियों और विभागों से भी होगा परामर्श

आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले संबंधित हितधारकों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से परामर्श करेगा। इसके अलावा, नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, कार्यालयों और कर्मचारियों पर होने वाले संभावित खर्च का भी आकलन किया जाएगा।

आयोग को यह सुझाव भी देने होंगे कि मौजूदा सरकारी कार्यालयों और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। साथ ही, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करते समय राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम रखने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।

पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश करेंगे आयोग की अध्यक्षता

चार सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे। अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं, भूमि अभिलेख विभाग के निदेशक आयोग के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।

आयोग का मुख्यालय शिमला में स्थापित किया जाएगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को आवश्यक प्रशासनिक सहायता देने के साथ-साथ सरकारी रिकॉर्ड और जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध करवाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आयोग के कामकाज के लिए कार्यालय, कर्मचारी, वाहन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।

छह महीने में आएगी रिपोर्ट, फिर होगा आगे का फैसला

आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट छह महीने के भीतर सरकार को सौंपनी है। इस रिपोर्ट में प्रदेश की प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा स्थिति, आवश्यक बदलावों और पुनर्गठन से जुड़े सुझाव शामिल होंगे। इसके बाद सरकार आयोग की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।

फिलहाल, अधिसूचना में नए जिले बनाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में चार नए जिले बनने की संभावनाओं पर स्थिति आयोग की रिपोर्ट और सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

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