खालसा की जन्म भूमि आनंदपुर साहिब- खस्ता हाल सड़क पर उड़ती धूल से सरकार का स्वागत




मेजर सिंह
जालन्धर, 13 फरवरी : स्थान है खालसा की जन्म भूमि श्री आनंदपुर साहिब। यहां सिख जगत का तख्त श्री केसगढ़ साहिब स्थित है। कई अहम व यादगारी विरासती गुरुद्वारा साहिब भी यहां मौजूद हैं। विश्व प्रसिद्ध दुनिया में आठवें अजूबे के रूप में जाना जाने लगा ‘विरासत-ए-खालसा’ भी इस पवित्र धरती पर स्थापित है। सिख धर्म में पवित्र ऐतिहासिक स्थान के रूप में माना जाता कीरतपुर साहिब भी इसके नज़दीक ही पड़ता है। माता नैणा देवी का प्रसिद्ध मंदिर भी आनंदपुर साहिब के आगे पहाड़ी पर बना हुआ है। आनंदपुर की धरती पर मार्च माह में होले महल्ले का एतिहासिक जोड़ मेला लगता है। लगभग एक सप्ताह चलने वाले इस जोड़ मेले में एक अनुमान के अनुसार 50 से 60 लाख लोग श्रद्धा अर्पित करने के लिए आनंदपुर साहिब की धरती पर जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार 15 लाख के लगभग श्रद्धालु बंगा-गढ़शंकर-आनंदपुर साहिब द्वारा ही आनंदपुर साहिब आते जाते हैं। इतनी महानता तथा ऐतिहासिक संस्थाओं वाले इस पवित्र शहर को माझा, दोआबा व जम्मू क्षेत्र के साथ जोड़ने वाली 60 किलोमीटर के लगभग सड़क की हालत इतनी दयनीय है कि यहां से गुज़रने वाले लोग इस सड़क मार्ग से परहेज़ करते हैं। देश-विदेश में खालसे की जन्म भूमि व विरासत-ए-खालसा की बहुत मान्यता होने के कारण प्रवासी पंजाबी भी भारी संख्या में यहां दर्शनों के लिए आते हैं, परन्तु सड़कों पर उड़ती धूल, टूटी सड़कें व खड्डों में एक-दूसरे से टकराते डेढ़-दो घण्टे का सफर जब 4-5 घण्टे में पूरा करके आते हैं तो उनका हाल पूछते ही पता चलता है। बंगा से गढ़शंकर होकर आनंदपुर साहिब की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। 1999 में खालसे का 300वां जन्मदिवस मनाए जाने के समय यह सड़क विशेष तौर पर बनाई गई थी, परन्तु उसके बाद कभी भी इस सड़क का नव-निर्माण या मुरम्मत करने का कार्य नहीं हुआ। गत करीब 7 वर्षों से तो यह सड़क अपना अस्तित्व ही खो चुकी है। कई ऐसे स्थानों हैं, जहां एक-एक किलोमीटर तक किसी सड़क का नाम ही नहीं। सभी जगह पर सड़क पर खड्डे हैं व इन खड्डों से गुज़रते ही वाहनों का भी नुक्सान होता है। सड़क की दयनीय हालत तो है ही, इस पर बनाए पुलों की हालत भी बहुत खस्ता है। कई पुलों पर तो सरिए नंगे दिखाई दे रहे हैं। अकाली-भाजपा सरकार ने 7 वर्ष से अब कैप्टन सरकार ने 11 माह में पंजाब की इस अहम सड़क की सुध लेने का प्रयास भी नहीं किया। मिली जानकारी के अनुसार आनंदपुर साहिब के साथ सतलुज दरिया के किनारे रहते गांव अगंमपुर अवैध रेत के खड्डों का बड़ा केन्द्र बना हुआ है। अकाली-भाजपा शासन के में तो इस स्थान पर राजनीतिक संरक्षण में पूरे धड़ल्ले से अवैध रेत निकाली जाती थी व अब उनके स्थान पर नई सरकार के करिंदे संभाल के लिए हैं व यह अवैध धंधा पहले जैसे ही चल रहा है। पता चला है कि रेत व बजरी के ज्यादा भार वाले ट्रकों व टिप्परों के बोझ ने ही इस सड़क का बुरा हाल किया है। इस समय आनंदपुर साहिब को माझा-दोआबा के साथ जोड़ने वाला सतलुज का पुल भी अधिक भार सहने के कारण खतरे के कगार आया बताया जाता है। पता चला है कि यहां से गुज़रते 15 टन भार ढोने वाले टिप्परों में 50-55 टन रेत-बजरी भर कर लेकर जाया जाता है। पुलिस भी अवैध रेत बजरी कारोबार वालों के साथ सांझ होने के कारण कभी भी ऐसे ट्रकों या टिप्पर वालों को नहीं रोकती। पूरा दिन सड़क पर धूल उड़ते रहने के कारण नज़दीक खेतों में फसलों का ही बड़ा नुक्सान नहीं हो रहा, बल्कि इसके साथ क्षेत्र में रहते लोगों को सांस, दमा व अन्य बीमारीयों का भी खतरा बना रहता है।
होला महल्ला आया नज़दीक
होला मोहल्ला का वार्षिक जोड़ मेला आ गया है, परन्तु सरकार अभी भी कुछ नहीं कर रही है। गत वर्ष घोषित हुआ था कि बंगा-आनंदपुर साहिब सड़क राष्ट्रीय राज मार्ग घोषित किया जा रहा है व केन्द्र सरकार इस रास्ते को चार मार्गीय सड़क के रूप में निर्माण करेगी परन्तु इस फैसले पर कोई अमल नहीं हुआ। कैप्टन सरकार बनने के बाद पंजाब सरकार ने सड़क की मुरम्मत के लिए 88 लाख रुपए खर्च करने का ऐलान किया था, परन्तु आर्थिक तंगी के कारण सरकार एक पैसा भी खर्च लायक नहीं। कीरतपुर साहिब में 25 से 27 फरवरी तक पहले पड़ाव में होला महल्ला होना है व दूसरे पड़ाव में आनंदपुर साहिब में होला महल्ला 28 फरवरी से 2 मार्च तक होगा। दोआबा, माझा व जम्मू क्षेत्र की संगत के लिए यह सड़क सबसे अहम रास्ता है, परन्तु इस रास्ते की हालत इतनी दयनीय है कि यहां तो आम दिनों में भी गुज़रना बहुत कठिन होता है, होले-मोहल्ले की भीड़ के समय क्या होगा? यह तो भगवान ही जानता है।