चीनी यानि धीमा श्वेत विष



वैज्ञानिक तकनीकी विकास से पहले खाद्य पदार्थों में शक्कर का उपयोग नहीं होता था। आवश्यकता होने पर मीठे फलों या अन्य शर्करायुक्त पदार्थों की शर्करा कम से कम रूपांतरित करके उपयोग में लाई जाती थी। आजकल चीनी के रूप में शक्कर खाना सभ्य व सम्पन्न लोगों की निशानी बन गई है। गुड़ व शीरा आदि शर्करायुक्त पदार्थ गरीबी के सूचक हैं। इन्हें खाने वाले लोग गरीब होते हैं, ऐसा बहुत लोगों का मानना है। चीनी में शरीर के पोषण के लिए कोई तत्व नहीं होता है। चीनी का इन्सुलिन बनाने वाली ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है और उसकी इन्सुलिन बनाने की शक्ति नष्ट हो जाती है, जिसके कारण व्यक्ति मधुमेह का शिकार हो जाता है। शरीर को ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट्स तथा शक्कर से प्राप्त होती है, लेकिन इसके लिए चीनी का सेवन करना लाभदायक नहीं है। चीनी एक धीमा श्वेत विष है। ज्यादा चीनी सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आती है। शरीर को चीनी की कोई ज़रूरत नहीं होती। शरीर को शक्कर की जितनी ज़रूरत होती है उतनी शक्कर दूध, फल, अनाज और साग-सब्ज़ी आदि से शरीर को मिल जाती है। कुछ लोगों का मानना है कि चीनी के सेवन से शीघ्र शक्ति की प्राप्ति होती है, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। चीनी तो एक प्रकार का सफेद विष है, जो शरीर को नुक्सान पहुंचाता है।
चीनी में कोई विटामिन भी नहीं होता, बल्कि इसके सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण रक्त वाहिनियों में कोलेस्ट्रोल का जमाव होने लगता है जो उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का कारण बनता है। 
चीनी के अधिक सेवन से हाइपोग्लुकेमिया नामक रोग हो जाता है। इस रोग से ग्रसित होने पर व्यक्ति कमजोर हो जाता है, झूठी भूख लगती है। रोगी कांपते हुए बेहोश होकर गिर जाता है। चीनी के पाचन के समय एसिड पैदा होता है, जिसके कारण पेट और छोटी आंत में जलन होती है। चीनी का सेवन करने के कारण ही त्वचा रोग होते हैं। चीनी का ज्यादा सेवन करने वाले बच्चों के दांत क्षय होने लगते हैं। इसलिए बच्चों को पीपरमेंट गोली, चॉकलेट आदि शक्करयुक्त चीजें नहीं खलानी चाहिएं। चॉकलेट में मौजूद टायरानीम नामक पदार्थ सिरदर्द को पैदा करता है। चीनी और चॉकलेट के कारण आधा सीसी का दर्द पैदा होता है। चीनी को परिष्कृत करने के दौरान उसके खनिज लवण, विटामिंस व एंजाइम्स आदि नष्ट हो जाते हैं। इसलिए चीनी के निरंतर उपयोग से अनेकों बीमारियां व विकृतियां शरीर में पैदा होने लगती हैं। ज्यादा शक्कर खाने से शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस का संतुलन बिगड़ जाता है। शक्कर के पाचन के लिए कैल्शियम की ज़रूरत होती है तथा शरीर में कैल्शियम की कमी होने से आर्थराइटिस, कैंसर, वायरस संक्रमण आदि होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 
अधिक शक्कर खाने से पाचन तंत्र में विटामिन बी कांपलेक्स की कमी होने लगती है। ज्यादा चीनी खाने से लीवर में ग्लाइकोजिन की मात्रा घटने लगती है, जिससे व्यक्ति थकान, उद्विग्नता, सिरदर्द, घबराहट, दमा, डायबिटीज आदि रोगों का शिकार हो जाता है। शारीरिक ऊर्जा के लिए गुड़, मुनक्का, खजूर, अंगूर, शहद, मौसमी, केला, आम, खरबूजा, पपीता, गन्ना शक्करकंदी आदि का सेवन करना चाहिए।
हदयरोगों के लिए चर्बी जितनी ही ज़िम्मेदार चीनी है। कॉफी उतनी हानिकारक नहीं है जितनी हानिकारक चीनी है। चीनी खाने में जितनी मीठा लगती है, उतना ही शरीर को नुक्सान भी पहुंचाती है। यह सफेद विष है इसलिए इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। (स्वास्थ्य दर्पण)
—राजा तालुकदार