अंगूठे से गेहूं अलाट करने के कारण इस वर्ष 3.94 लाख लाभपात्र परिवार घटे


चंडीगढ़, 9 नवम्बर (हरकवलजीत सिंह) : पंजाब में गरीबी रेखा से निचले लोगों को सस्ती दरों पर दी जाती गेहूं की बांट में उस समय बड़ा घोटाला सामने आया जब वित्त वर्ष दौरान दूसरी छमाही के लिए सरकार द्वारा गेहूं अंगूठा लगाकर बायोमीट्रिक ढंग से जारी करने का फैसला लिया गया। पिछले वर्ष से अंगूठे से गेहूं जारी होने के कारण 3 लाख, 94 हज़ार कार्ड होल्डर ही गायब हो गए तथा उन परिवारों में कोई भी सदस्य गेहूं लेने के लिए सामने नहीं आया। खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा परिवार के हर सदस्य को प्रति माह 5 किलो के हिसाब से 6 माह के लिए 30 किलो गेहूं दी जाती है तथा औसतन हर परिवार के 5 सदस्य समझे जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार दौरान ही खाद्य व आपूर्ति विभाग द्वारा डीलरों को दूर कर गेहूं की बांट का काम सीधा विभाग के इंस्पैक्टरों के हवाले कर दिया गया था तथा पिछली सरकार द्वारा राज्य में सस्ती गेहूं की बांट के लिए कोई 35.26 लाख परिवारों की पहचान की गई थी। मौजूदा सरकार के सत्ता सम्भालने के बाद दोबारा किए गए संशोधन दौरान एक लाख से अधिक लाभपात्रियों के नाम यह कह कर काट दिए गए थे कि वे बोगस लाभपात्री हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा कांग्रेस सरकार द्वारा भी लगभग कोई 3 छिमाहियों की गेहूं की जो बांट की गई उसके अनुसार 95 से 96 प्रतिशत लाभपात्री गेहूं प्राप्त कर रहे थे लेकिन वित्त वर्ष दौरान दूसरी छिमाही की गेहूं की बांट बायोमीट्रिक ढंग से होने के बाद 3 लाख 94 हज़ार अन्य लाभपात्री गायब हो गए जोकि लगभग पिछली बार से कोई 12 प्रतिशत कम थे। विभाग द्वारा चाहे इस बात का दावा किया जा रहा है कि डीलरों द्वारा अंगूठा लगाकर सस्ती गेहूं अलाट करने की प्रणाली शुरू करने से जहां कोई 4 लाख बोगस लाभपात्री सामने आए वहां सरकार की कोई एक लाख मीट्रिक टन गेहूं भी बच गई। सूचना अनुसार विभाग के मंत्री से लेकर विभागीय मंत्रियों द्वारा इस घपले संबंधी कोई जवाब देने से इन्कार किया जा रहा है तथा न ही किसी तरह की जांच की ज़रूरत समझी गई है। उक्त घपला जोकि वार्षिक सैकड़ों करोड़ों का है, के चर्चा में आने के बाद आज मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा निदेशक खाद्य आपूर्ति को इस सारे मामले की जांच कर आरोपी सामने लाने के लिए आदेश जारी किए गए।