झोलाछाप डाक्टरों के मकड़जाल में फंसी गांवों की  स्वास्थ्य सुविधाएं


माहलपुर, 12 जनवरी (अ.स.): गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं झोलाछाप डाक्टरों के सहारे ही चल रही हैं। इन डाक्टरों की कार्यशैली पढ़ने व जांचने से कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे आम आदमी दांतों तले अंगुली दबा लेता है। पत्रकारों की टीम ने जब गांवों के दौरे किए तो एक बात स्पष्ट तौर पर दिखाई कि हर गांव में लगभग 3 से पांच तक ऐसे डाक्टर बैठे हैं। पर्ची से बगैर दवा देने वाले यह डाक्टर सरकारी निर्देशों के उलट खुली दवाईयां बेच रहे हैं। इन डाक्टरों द्वारा यह दवाइयां भी दी जा रही हैं जोकि एक फार्मासिस्ट भी नहीं दे सकता और सरकारी तौर पर इन दवाइयाें पर पाबंदी है। मैडीकल स्टोरों से वह दवाईयां खरीद रहे हैं जिनके ऊपर किसी कम्पनी का नाम नहीं होता और 50 से 100 की संख्या तक प्लास्टिक के लिफाफे में मिलती हैं। रंग-बिरंगी गोलियां जिनकी कीमत  2 से 5 रुपए होती है, की तीन-तीन खुराकें बनाकर 30 से 50 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नाक तले चल रहे इन कथित डाक्टरों के पास कोई भी लाईसैंस नहीं है जबकि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी व ड्रग इंस्पैक्टर इन मिनी अस्पतालों को देखकर किनारा कर गुजर जाते हैं। इस संबंधी सिविल सर्जन डा. रेनु सूद के साथ सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि जब कोई शिकायत आए तो उस संबंधित  कथित डाक्टर की चैकिंग होती है और बनती कार्रवाई की जाती है। जब उन्हें किसी विरुद्ध की कार्रवाई बारे पूछा तो वह गोल-मोल जवाब दे गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह एलोपैथी दवाईयां नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि इनमें से कई दूसरे राज्यों की डिग्रियां लिए बैठे हैं।