सांझा मोर्चा के बैनर तले संघर्ष करने वाले अध्यापकों का मामला - शिक्षा विभाग द्वारा 5 अध्यापक नेताओं की सेवाएं समाप्त



एस.ए.एस. नगर, 15 जनवरी (अ.स.): गत लंबे समय से पूरे वेतन पर रेगूलर करने की मांग को लेकर सांझा मोर्चा के बैनर तले संघर्ष कर रहे अध्यापक नेताओं पर पंजाब सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। पटियाला में चले धरने पर मरणव्रत वाले संघर्ष में सम्मिलन करने वाले 5 अध्यापक नेताओं की सेवाएं शिक्षा विभाग पंजाब द्वारा समाप्त कर दी गई हैं। डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा पंजाब द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि हरदीप सिंह टोडरपुर पंजाबी मास्टर सरकारी सी.सै. स्कूल ककराला ज़िला पटियाला, भारत कुमार एस.एस. मास्टर सरकारी मिडल स्कूल कछवां ज़िला पटियाला, हरविन्द्र सिंह साईंस मास्टर सरकारी मिडल स्कूल खेड़ी जट्टां ज़िला पटियाला, दीदार सिंह मुद्दकी साईंस मास्टर सरकारी सी.सै. स्कूल मुद्दकी ज़िला फिरोज़पुर व हरजीत सिंह जिंदा अंग्रेज़ी मास्टर सरकारी हाई स्कूल कोठे नत्था सिंह वाला ज़िला बठिंडा की नियुक्ति ठेका आधार पर सर्व शिक्षा अभियान अथार्टी पंजाब अधीन 10 अगस्त 2009 को इकरार में दी शर्तों के अनुसार आपसी सहमति के आधार पर हुई थी। जारी आदेशों के अनुसार ज़िला शिक्षा अधिकारी पटियाला द्वारा 8 अक्तूबर 2018 को दी रिपोर्ट के अनसुर उक्त अध्यापकों द्वारा स्कूल समय के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाने की जगह धरने में भाग लिया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर उक्त 5 अध्यापकों को मुअत्तल कर दिया गया था। उक्त अध्यापकों को 9 अक्तूबर 2018 तक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर 3 अक्तूबर को समाचार पत्रों के माध्य में सार्वजनिक सूचना जारी की गई। डीपीआई (सै.शि) द्वारा उक्त अध्यापकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उनके द्वारा कुछ नहीं कहा गया। 27 नवम्बर 2018 को पुन: सार्वजनिक सूचना जारी कर निज़ी तौर पर पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया, जिस पर उक्त 5 अध्यापकों द्वारा दिए जवाब में कहा गया कि उनके विरुद्ध लगे दोष बेबुनियाद, झूठेव आधारहीन हैं। इनके द्वारा दिए जवाब को जांचने पश्चात् यह तथ्य सामने आया कि उक्त अध्यापकों द्वारा अपने जवाब में इस दोष को कहीं भी नहीं नकारा गया कि वे 8 अक्तूबर 2018 को स्कूल समय के दौरान धरने में शामिल नहीं हुए। उक्त अध्यापकों ने आवश्यक कार्य का हवाला देकर बिना वेतन छुट्टी प्राप्त की थी, जबकि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार वे 8 अक्तूबर 2018 को धरने में शामिल हुए थे, जिससे साबित होता है कि उनके द्वारा गलत बयानी करके छुट्टी प्राप्त की गई है। दोष सिद्ध होने पर उक्त अध्यापकों के नियुक्ति पत्रों की शर्तों के अनुसार विभाग द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त की जाती हैं।