बढ़ती हुई राजनीतिक सक्रियता

आगामी वर्ष के शुरू के मास जनवरी और फरवरी में पंजाब विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इस वर्ष के शेष महीनों में प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों को और भी बढ़ने जाने की सम्भावना बन गई है। जैसे-जैसे समय निकट आता जाएगा, वैसे-वैसे ही राजनीतिक पारा भी बढ़ता जाएगा। ‘आप’ की प्रदेश सरकार ने भी अपनी गतिविधियों को पूरी तरह गर्मा दिया है। अपने पिछले 4 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा करने के साथ-साथ इसने आगामी महीनों में तैयार की गई अपनी नई योजनाओं का भी विस्तारपूर्वक खुलासा करना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व भी प्रत्येक स्तर पर प्रशासकीय और पार्टी यूनिटों की सक्रियता को लगातार देख रही है और किए गए लेखा-जोखा के आधार पर अपनी ओर से नये कदम उठाने की तैयारी में है।
इसी तरह प्रदेश से संबंधित प्रत्येक राजनीतिक पार्टी अपनी-अपनी नीतियां बना रही है, जो आगामी दिनों में सामने आएंगी। इसी संबंध में प्रत्येक घटित हो रहे घटनाक्रम को सभी की ओर से गम्भीरता के साथ देखा जा रहा है और एकाएक उनके संबंध में भी भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विगत दिवस प्रदेश में दो महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम घटित हुए हैं। पहला है जालन्धर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संक्षिप्त दौरा। यहां रविदासिया समुदाय से संबंधित महत्त्वपूर्ण धार्मिक अस्थान सचखंड डेरा बल्लां में आकर उनका डेरा प्रमुख संत निरंजन दास जी से मिलना और आशीर्वाद लेना। इससे पहले उन्होंने आदमपुर में स्थित हवाई अड्डे का नाम गुरु रविदास जी के नाम पर रखने की भी घोषणा की थी। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समुदाय भारी संख्या में बसा हुआ है। उन्हें अपने साथ जोड़ कर रखने के लिए प्रत्येक पार्टी यत्नशील है। इस सन्दर्भ में ही प्रधानमंत्री  के इस दौरे को भी देखा जा रहा है। चाहे विगत लम्बी अवधि से पंजाब में भाजपा का बड़ा आधार नहीं बना परन्तु कुछ वर्षों से उसने विशेष नीति के तहत प्रदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं, जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप में देखा और महसूस भी किया जाने लगा है। एक निर्धारित नीति के तहत यह पार्टी प्रदेश के सभी छोटे-बड़े समुदायों तक अपना सम्पर्क बनाने हेतु यत्नशील प्रतीत होती है। इसी समय में घटित दूसरा घटनाक्रम 7 मास की अवधि के बाद प्रभावशाली अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ज़मानत दिया जाना है। स. मजीठिया ने बाहर आते ही प्रदेश सरकार पर एक बार फिर निशाना साधना शुरू कर दिया है और भविष्य में भी दृढ़ रह कर प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता को जारी रखने संबंधी बयान दिए हैं।
नि:संदेह अकाली दल आज बुरी तरह बिखरा और बंटा हुआ दिखाई देता है। स. मजीठिया की सक्रियता अकाली कतारों में कितना धड़कन पैदा कर सकेगी, यह देखने वाली बात होगी। स. मजीठिया अकालियों के बिखराव को कितना एकजुट करने में सहायक हो सकेंगे, यह भी देखा जाएगा। उन्हें ज़मानत मिलने का बहुत-सी विपक्षी पार्टियों ने जहां स्वागत किया है, वहीं सरकारी पक्ष ने उनकी ज़मानत पर किन्तु-परन्तु उठाए हैं और अंतिम फैसले तक उन्हें बरीअलज़मा करार नहीं दिया। कांग्रेस का विगत लम्बी अवधि से प्रदेश में अपना प्रभाव बना रहा है परन्तु पार्टी कतारों को पुन: नई दिशा देने और नेतृत्व में और अनुशासन लाने की उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती होगी। हम समझते हैं कि इस सक्रियता के प्रसंग में सभी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं की यह बड़ी ज़िम्मेदारी होगी कि वे पंजाब और पंजाबियों की समस्याओं को हल करने के लिए लोगों के समक्ष एक समुचित भावी नक्शा पेश करें और उसे अमल में लाने के लिए भी लोगों का विश्वास जीतें। इस आधार पर ही वे लोगों के मन में अपनी जगह बनाने में सहायक हो सकेंगे।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

#बढ़ती हुई राजनीतिक सक्रियता