मणिपुर-एक यत्न और
मणिपुर में एक बार फिर सरकार बनाने का यत्न किया गया है। इससे पहले एक वर्ष तक यह छोटा-सा उत्तर पूर्वी राज्य राष्ट्रपति शासन अधीन रहा है। चार वर्ष पूर्व 2022 के चुनावों में एक बार फिर भाजपा ने यहां सरकार बनाई थी। एन. बीरेन सिंह इसके मुख्यमंत्री बने थे। वह बड़े सूझवान राजनीतिज्ञ और प्रबन्धक थे। उस समय भाजपा की नई सरकार बनने पर यह उम्मीद जगी थी कि यह प्रदेश के विकास में बड़ा योगदान डालने में समर्थ हो सकेगी। मणिपुर का समाज हमेशा ही अनेक कबीलों के समूहों में बंटा हुआ होने के कारण यह प्रदेश बहुत जटिलता भरपूर बना रहा है।
इस समय यहां लगभग 36 कबीले रहते हैं। इनमें कुछ समुदायों के लोग बड़ी संख्या में हैं। इनमें मैतेई लोगों की संख्या सबसे अधिक है, जो कि इम्फाल घाटी (वैली) (इम्फाल मणिपुर की राजधानी है) में रहते हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 53 प्रतिशत है। इस घाटी के चारों ओर की पहाड़ियों में नागा और कुकी ज़ोय आदि बड़े कबीलों के लोगों के साथ-साथ अन्य दर्जनों कबीलों के लोग भी बसे हुए हैं। मैतेई कबीले में बहुसंख्या में हिन्दू समुदाय के लोग हैं और नागा और कुकी कबीलों से संबंधित जनसंख्या की बहुसंख्या इसाई समुदाय के साथ संबंध रखती है। पहाड़ों पर रहने वाले इन कबीलों को अनुसूचित कबीलों का दर्जा मिला हुआ है। जिस कारण उनके पहाड़ी क्षेत्र बड़ी सीमा तक सुरक्षित रहते हैं। मैतेई कबीले के लोग भी विगत लम्बी अवधि से इस दर्जे की मांग करते रहे हैं। सरकार बनने के एक वर्ष बाद प्रदेश की हाईकोर्ट ने मैतेईयों को भी अनुसूचित कबीलों को मिलती सुविधाएं देने की बात मान ली, जिस पर पहाड़ी कबीलों के लोगों को यह प्रतीत होने लगा कि उनके इन क्षेत्रों में घाटी वाले कबीलों के लोग घुसपैठ कर लेंगे। इस फैसले का पहाड़ी कबीलों के लोगों ने कड़ा विरोध किया और मणिपुर में भीषण गृह युद्ध शुरू हो गया, जिसमें अब तक कम से कम 260 लोग मारे गए और 60 हज़ार से अधिक शरणार्थी बन गए। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में पहले से ही सक्रिय हथियारबंद संगठनों ने भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं। हालात यहां तक बिगड़ गए कि घाटी के लोगों को निशाना बनाया जाने लगा और प्रतिक्रिया स्वरूप घाटी के लोगों ने संगठित रूप में पहाड़ी कबीलों के लोगों को अपनी हिंसा का शिकार बनाना शुरू कर दिया। आज भी यह दोनों गुट एक दूसरे के दुश्मन बने दिखाई देते हैं। यह आपसी लड़ाई 3 मई, 2023 को शुरू हुई थी, जिस पर एन. बीरेन सिंह की सरकार काबू पाने में असमर्थ रही।
एन. बीरेन सिंह प्रभावशाली और कुशल प्रशासन चलाने वाले मुख्यमंत्री माने जाते थे परन्तु वह मैतेई समुदाय से संबंध रखते थे, इसलिए उनका झुकाव घाटी के लोगों की ओर अधिक रहा और वह जानबूझ पहाड़ी कबीलों के लोगों के प्रति लापरवाही दिखाते रहे। लगातार बढ़ते इस हिंसक संघर्ष के कारण एन. बीरेन सिंह को 9 फरवरी, 2025 को त्याग-पत्र देने के लिए विवश होना पड़ा था। उसके बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर दी गई थी। अब एक वर्ष के बाद केन्द्र सरकार ने सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाली नई सरकार बनाने की कवायद शुरू की है। इस नई सरकार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बड़ी पार्टी भाजपा द्वारा मैतेई समुदाय से संबंधित पूर्व स्पीकर यूमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया है, जबकि कुकी कबीले के विधायक नेमचा किपजिन को उप-मुख्यमंत्री और नागा पीपल्ज़ फ्रंट के विधायक लोसी दिखो को दूसरा उप-मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। इस तरह केन्द्र सरकार ने इन सभी कबीलों में एक संतुलन बनाने का यत्न किया है। इस विधानसभा का समय एक वर्ष शेष रह गया है, इस दौरान नई सरकार मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए यत्नशील होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस नई सरकार को शुभकामनाएं देते हुए आशा प्रकट की है कि नई सरकार प्रदेश के विकास के लिए जहां यत्नशील होगी, वहीं अलग-अलग समुदायों और कबीलों को साथ लेकर प्रदेश में पुन: सद्भावना स्थापित करने में भी सफल रहेगी। कुछ हथियारबंद संगठनों ने इस सरकार को भी कड़ी चुनौतियां दी हैं, जिनसे निपटना इस नई सरकार के लिए बड़ी समस्या होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

