गाज़ियाबाद का दुखांत

गाज़ियाबाद में अपने घर की 9वीं मंज़िल से कूद  कर तीन बहनों द्वारा की गई आत्महत्या ने देश का ध्यान एक बार फिर सोशल मीडिया के युवाओं और विशेष रूप से कम उम्र के किशोरावस्था बच्चों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की ओर खींचा है। गाज़ियाबाद की ये लड़कियां निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) अपने परिवार के साथ सैटेलाइट टाउन साहिबाबाद के भारत सिटी अपार्टमैंट में रहती थीं। उनके पिता चेतन कुमार एक व्यापारी हैं और उनकी दो पत्नियां (दोनों बहनें) और 5 बच्चे थे जिनमें चार लड़कियां और एक लड़का शामिल था। बुधवार 4 फरवरी को चेतन कुमार, उसकी दोनों पत्नियां और एक छोटा लड़का और लड़की एक कमरे में सो रहे थे जबकि तीन लड़कियां दूसरे कमरे में सो रही थीं। आत्महत्या करने वाली तीनों लड़कियों ने रात्रि लगभग 2.15 बजे अपार्टमैंट की बालकनी से नीचे छलांग मार दी और एक पड़ोसी ने उन्हें ऐसा करते देख भी लिया। बाद में इन लड़कियों को एम्बूलैंस द्वारा अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत्त करार दे दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तीनों बहनें ज्यादा समय इकट्ठे ही रहती थीं और ऑनलाइन खेल खेलने की उन्हें आदत पड़ चुकी थी। इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा था। पिछले दो-अढ़ाई वर्ष से उन्होंने स्कूल जाना भी बंद कर दिया था। यह बात भी सामने आई है कि आजकल उन्हें ‘कोरियन लव गेम’ खेलने की आदत पड़ चुकी थी और ज्यादा समय वह इस उद्देश्य के लिए अपने फोन पर ही व्यतीत करती थीं। उनके पिता चेतन कुमार के अनुसार उन्हें फोन पर ज्यादा समय व्यतीत करने से रोका गया तो उन्होंने  सुसाइड नोट लिख कर अपार्टमैंट की बालकनी से रात को कूद कर आत्महत्या करने का रास्ता अपना लिया। इस तरह किशोर उम्र के युवाओं द्वारा आत्महत्या करने का देश में यह पहला मामला नहीं है। पंजाब सहित देश भर में समय-समय पर ऐसी अनेक घटनाएं घटित हो चुकी हैं। नि:संदेह पिछले वर्षों में सूचना के क्षेत्र में हुई क्रांति ने अनेक पक्षों से हमें लाभ पहुंचाया है। कम्प्यूटर और मोबाइल फोन के इस्तेमाल ने हमें अनेक तरह के लाभ दिए हैं, परन्तु इन चीज़ों का दुरुपयोग अब हमें भारी नुक्सान भी पहुंचाने लगा है। जहां तक ऑनलाइन खेलों का संबंध है, इस बारे में बताया जा रहा है कि ज्यादातर खेलों में खेलने वालों को करने के लिए ‘टास्क’ दिए जाते हैं और ऐसी खेलों में आत्महत्या करने तक के ‘टास्क’ भी शामिल होते हैं। विगत अवधि में ‘ब्ल्यू वेल्ज़’ नामक इस तरह की ऑनलाइन खेल अधिक प्रचलित हुई थी जिस कारण विश्व के कई देशों में इसे खेलने वाले बच्चों ने आत्महत्याएं कर ली थीं। कई देशों ने फिर यह खेल खेलने पर प्रतिबंध भी लगाया था। आजकल इस तरह की जो ऑनलाइन खेलें प्रचलित हैं उनमें ‘कोरियाई लव गेम’, ‘ब्लैक आऊट चैलेंज’ और ‘सॉल्ट एंड आईस चैलेंज’ आदि खेलें शामिल हैं।
किशोर उम्र के बच्चों का स्वास्थ्य और विशेष रूप से मानसिक स्थिति पर ऐसी खेलों के पड़ रहे दुष्प्रभावों के कारण अब विश्व स्तर पर चिंता बढ़ने लगी है। भिन्न-भिन्न देशों ने अपनी नई पीढ़ी को सोशल मीडिया के ऐसे दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आस्ट्रेलिया विश्व का ऐसा पहला देश है, जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए कानून बनाया है। फ्रांस में भी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यूरोपियन देश डैनमार्क, स्पेन, जर्मनी आदि भी इस दिशा में कदम बढ़ाने लगे हैं। मलेशिया ने यह घोषणा की है कि वह 2027 तक 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा देगा। इस सन्दर्भ में भारत, जिसके 70 करोड़ से अधिक इंटरनैट उपभोक्ता 25 वर्ष से कम उम्र के हैं, को भी आगामी समय में ठोस कदम उठाने पड़ेंगे। नि:संदेह हमें इस संबंध में प्रभावी कानून बनाने की ज़रूरत है, परन्तु यह बात भी सभी को स्पष्ट होनी चाहिए कि इस गम्भीर समस्या का हल सिर्फ कानून बनाने से नहीं होगा, अपितु बच्चों के अभिभावकों और उनके शैक्षणिक संस्थानों को भी इस संबंध में सक्रिय भूमिका निभानी पड़ेगी। बच्चों के साथ संवाद बना कर रखना पड़ेगा। घरों और शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को सोशल मीडिया के लाभ के साथ-साथ इसके दुरुपयोग से होने वाले नुक्सान संबंधी भी जागरूक करने की ज़रूरत होगी। इस तरह के सामूहिक यत्नों से ही हम अपनी नई पीढ़ी को सोशल मीडिया और विशेष रूप से ऑनलाइन खेलों की आदत से बचाने के समर्थ हो सकेंगे।

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