किसानों और वैज्ञानिकों के संवाद का माध्यम बनें किसान मेले
हर बार रबी-खरीफ से पहले आयोजित किए जाते किसान मेलों और शिविरों में पीएयू लुधियाना, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा विकसित फसलों के बीज किसानों को उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस बार किसानों को खरीफ की फसलों के बारे में जानकारी और बीज देने के लिए आईसीएआर तथा आईएआरआई द्वारा तीन दिवसीय किसान मेला 25 से 27 फरवरी तक दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
पीएयू किसान मेलों की शुरुआत 10 मार्च को नागकलां जहांगीर (अमृतसर) में लगाए जा रहे मेले के साथ हो रही है। फिर 12 मार्च को रौणी (पटियाला), 14 मार्च को बल्लोवाल सौंखड़ी (शहीद भगत सिंह नगर), 17 मार्च को फरीदकोट और 24 मार्च को बठिंडा में किसान मेले लगाए जाएंगे। मुख्य मेला 20 और 21 मार्च को पीएयू परिसर लुधियाना में लगाया जाएगा। पीएयू द्वारा अंतिम किसान मेला 27 मार्च को गुरदासपुर में लगाया जाएगा। पंजाब यंग फार्मर्स एसोसिएशन रखड़ा 17 मार्च को आईएआरआई-कोलैबोरेटिव आउटस्टेशन रिसर्च सेंटर रखड़ा में किसान शिविर लगा कर धान और बासमती के बीज उपलब्ध करवाएगा और आईएआरआई द्वारा विकसित धान की किस्में जिनमें पूसा-2090 और पूसा-1824 (पूसा-44 के विकल्प) और पूसा बासमती-1509, पूसा बासमती-1885 और पूसा बासमती-1401 किस्मों के बीज भी शामिल होंगे। पीएयू द्वारा किसान मेलों में पीएयू की ओर से विकसित किस्मों के बीज तथा रखड़ा और नई दिल्ली (पूसा) में लगने वाले मेलों में आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा विकसित किस्मों के बीज किसान खरीद सकेंगे।
पंजाब में खरीफ की मुख्य फसल धान है, जिसकी बासमती समेत 32 लाख हेक्टेयर पर काश्त की जाती है। अमरीका के साथ हो रहे समझौते के बाद बासमती उत्पादकों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। चाहे इस साल अब तक पिछले साल के मुकाबले भारत से बासमती का अधिक निर्यात हो चुका है, लेकिन अब अमरीका तथा अन्य देशों को अधिक निर्यात किए जाने से इसमें और वृद्धि होने की संभावना है। निर्यात में पंजाब का 40 प्रतिशत तक योगदान है। पूसा बासमती की किस्मों के बीज किसान दिल्ली और रखड़ा के मेलों में खरीद सकेंगे। पीएयू द्वारा विकसित किस्मों के बीज पीएयू के मेलों में खरीदे जा सकेंगे।
इन किसान मेलों और शिविरों का बहुत महत्व है, परन्तु इन मेलों को व्यापारिक या राजनीतक नहीं बनने देना चाहिए। प्रबंधकों को इन मेलों में किसानों तथा वैज्ञानिकों का सम्पर्क करवाने पर ज़ोर देना चाहिए। इससे वैज्ञानिकों और प्रबंधकों को किसानों की प्रतिक्रिया भी मिलेगी। इन मेलों में लगने वाली प्रदर्शनियों में भी सुधार लाने की ज़रूरत है। ये व्यापारिक दुकानें नहीं होनी चाहिएं। इसमें संदेह नहीं कि मेलों और शिविरों में खर्च पूरा करने के लिए प्रबंधक प्रदर्शनियों के लिए उच्च कीमतों पर स्टाल बुक करते हैं, जहां व्यापारी सामान बेचते हैं, जो किसान नेताओं के मुताबिक गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिकों द्वारा सिफारिश नहीं किया होता। पीएयू से सम्मानित और पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के साथ ‘कृषि करमन पुरस्कार’ प्राप्त बिशनपुर छन्ना (पटियाला) के प्रगतिशील किसान राजमोहन सिंह कालेका कहते हैं कि मेलों में बेचे जा रहे कृषि के सामान की शुद्धता और तकनीकी सफलता की ज़िम्मेदारी मेला प्रबंधकों की होनी चाहिए। प्रबंधकों को चाहिए कि वे इन मेलों को राजनीतिक और व्यापारिक रूप धारण न करने दें। किसान राजनीतिक और व्यापारिक भाषण सुनना नहीं, वैज्ञानिकों से सम्पर्क तथा उनसे तकनीकी जानकारी लेना चाहते हैं।
ये मेले कृषि समस्याओं को उभारने का भी माध्यम हैं, जिनमें किसान आपस में विचार-विमर्श करते हैं और वैज्ञानिकों को सही प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जो अनुसंधान को ज़्यादा लाभदायक और सम्पूर्ण बनाने में सहायक सिद्ध होगी। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और बासमती के प्रसिद्ध निर्यातक विजय सेतिया कहते हैं कि किसानों द्वारा कम्बाईन से काटने के तुरंत बाद नमी वाली जो उपज मंडी में लाई जाती है, उसे बंद करने के लिए सरकार बड़ी मशीनों पर सब्सिडी देने की बजाय किसानों को भंडारण के लिए गोदाम तथा बीज रखने के लिए ड्रम पर सहायता दे। पूसा बासमती-1509, जिसकी सभी किस्मों से ज़्यादा काश्त की जाती है, किसानों द्वारा मंडी में तुरंत लाने पर 2500-2600 रुपये प्रति किंवटल तक बिकी, जबकि अब सूखी फसल 3900 से 4000 रुपये प्रति क्ंिवटल तक बिक रही है।
खुली मंडी में अनधिकृत किस्मों (नव-विकसित किस्में कह कर) के बीज किसानों को बहुत महंगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। कई लोग बीज विक्रेता बन कर दुकानें चलाने लग पड़े। अनधिकृत किस्मों (जो सिफारिशशुदा नहीं हैं) के बीज किसानों को इन दुकानों पर बेचे जा रहे हैं। ऐसी प्रणाली में भी सुधार लाने की ज़रूरत है और ऐसे मामलों पर भी इन मेलों में विचार-विमर्श होना चाहिए।
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