तरक्की रामों की दुनिया
मेहरबान, कद्रदान,
आज हमारे यहां की दुनिया तरक्की पसन्दों की नहीं, तरक्की रामों की हो गई है। तरक्की पसन्द वे होते हैं जिनकी पैठ अब केवल भारतीय नेताओं के सीने से लगी भारतीय संविधान की पुस्तक तक रह गई। यहां तरक्की पसन्दों का लक्ष्य, इनके अनथक प्रयास के साथ देश भर में धर्म-निरपेक्ष समाजवाद की स्थापना लिखा हुआ है लेकिन इस व्यवस्था में सिर्फ चन्द लोग बहुमूल्य प्रासादों और बहुमंज़िली इमारतों में रहते हैं, और शेष सब लोग टूटी, बिना मुरम्मत की सड़कों पर ठिकाना तलाशते हैं या अगर गांव में हैं तो खपरैल रहित झोपड़ियों में जीते हैं। उनके चन्द मुहाफिज बड़े प्रासादों में रह कर उनके साथ अपने भाषणों या आख्यानों में हमदर्दी का प्रगटावा करते रहते हैं।
जो सड़कों पर रह गये, वे छिद्रान्वेषण का यह तमाशा भी देश के सबसे बड़े मंच पर देख लेते हैं, जहां इन दिनों कथित तरक्की पसन्द सदस्यों द्वारा यह बहस होती है कि पवित्र संविधान के मूलपाठ में समाजवाद नहीं लिखा गया, इसलिये क्यों न इसे हटा दिया जाये? लेकिन बाद में इसे वास्तविकता का बहुत साहस पूर्ण स्वीकार बन सकने के कारण छोड़ दिया गया, और फैसला किया गया कि इसे फिलहाल छोड़ दिया जाये। यह आदर्श भरा लक्ष्य है, इस पवित्र किताब में बना रहेगा।
आखिर इस दुनिया के नवीनतम आंकड़ों ने बता तो दिया है, कि अपने देश में आज़ादी का अमृत-महोत्सव मना लेने के बाद अमीर और अमीर और गरीब और गरीब ही नहीं, फटीचर हो गये हैं।
इस देश में आंकड़ों की भी कुछ मुरम्मत हो गई है। पहले बहुत देश की सम्पदा का दस प्रतिशत पाते थे। दस प्रतिशत लोगों के पास नब्बे प्रतिशत लोगों की सम्पदा थी। आंकड़ों में अब यह बदलाव हुआ है, कि इन दस प्रतिशत लोगों में से भी केवल एक प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनकी करोड़पति से अरबपति बन जाने की गति दुनिया में सर्वाधिक है। एशिया में भारत है, और भारत में एशिया के सबसे अधिक अरबपति बसते हैं।
यह अरबपति बहुत भाग्यवान लोग हैं क्योंकि यहां देश में कोविड फैलता है तो करोड़पति अरबपति होते हैं। सड़कें और पुल टूटते हैं, तो इनका टैंडर भरने वालों की पौ बारह होती है। पौ बारह की समझ स्पष्ट हो चुकी है। यहां हथेली पर सरसों जमा सकने वाले बाजीगर और रंक से राजा हो जाने वाले राजनीतिज्ञ का अर्थ पूरी तरह से समझ आ गया है। कानून के दागी आरोपित हो जाने के बावजूद देश की संसद और विधानसभाओं की कुर्सियों पर चुनाव परिणामों का शृंगार बनते हैं, क्योंकि आरोपित अपराधी नहीं कहलाता। यह बात अभी भी कानूनी किताबों का स्वर्ण सूत्र है। अब इसमें एक और स्वर्ण वाक्य जुड़ गया है, भ्रष्टाचार या अनाचार की किसी भी सज़ा के अपराधी हो, महीनों बीत जाने के बाद भी केस ठीक से पेश न हो पाने के कारण ज़मानत पर रिहा हो जाये तो उनकी मुक्तियात्रा को शोभायात्रा में बदल दो। आपको पता है कि नये दण्ड विधान के अंतर्गत ही अब उन पर मुकद्दमा चलेगा, जहां पेशियों में तारीख पर तारीख अभी भी ज़िंदा है। जो ज़िंदा है, वह ज़िंदा रहेगी, अन्तहीन काल तक, और इस बीच आरोपित नेता शर्मिन्दगी का चश्मा ओढ़ने के स्थान पर क्रांति का बिगुल बजायेंगे। दुबारा जनता के मसीहा हो जाएंगे। अपने प्रासादों में एक और मंज़िल डालेंगे, और देश के आम आदमी के हाथ से अतिक्रमण के नाम पर सड़क का ठिकाना छिन जाने को भी पहले जन्म के पापों का फल कह कर उपेक्षित कर देंगे। तरक्की का बुलडोज़र चलेगा, जिसे शार्टकट संस्कृति के नये मसीहा चलाएंगे, और भ्रष्टाचार, महंगाई, और लालफीताशाही के उपकार से पिसते हुए लोग अपने अतीत पर गर्व करने का सन्देश पाकर वर्तमान को भूल जाएंगे।
क्योंकि बाहर देश के प्रांगण में ज़माना तरक्की-पसन्दों का नहीं, तरक्की रामों का हो गया है। यह तरक्की राम शार्टकट संस्कृति से आभूषित होकर देश में बदलाव का बिगुल बजा रहे हैं। यह एक ऐसा बिगल है जो सस्ते राशन की दुकानों के बाहर लगी लम्बी कतारों में बजता है, और बताता है कि अब ये कतारें नौकरी प्रदान करने की सम्भावना तलाशने वाली खिड़कियों के बाहर नहीं लगतीं। उपकार संस्कृति का महिमा-मण्डन करने वाली सस्ता राशन या रियायतें बांटने वाली खिड़कियों के बाहर लगती हैं।
बड़े आकर्षक नतीजे बांटती हैं कि देश आर्थिक दृष्टि से दुनिया के सबसे सशक्त देशों में चौथे नम्बर पर आ गया है, शीघ्र ही तीसरे नम्बर पर आ जाएगा और जब सन 2047 में अपने देश में आज़ादी शतक का महोत्सव मनाएंगे तो यह अमरीका और चीन को पछाड़ कर दुनिया की नम्बर एक की ताकत बन सकता है। यह ताकत भी किसी चमत्कार से कम नहीं होगी, क्योंकि इस तरक्की के साथ रियायत संस्कृति के सिरमौर मुफ्त या सस्ता राशन बांटने वाला रिकार्ड और किसी को भी भूख से न मरने देने वाली गारण्टी अभी ज़िन्दा रहेगी। हां, इस देश के लोगों को यथोचित रोज़गार देने की गारण्टी देना तब भी सम्भव नहीं होगा, क्योंकि कृत्रिम मेधा, और रोबोट युग की कृपा से देश इतना डिजिटल हो जाएगा कि हम यह गारण्टी नहीं दे सके। हां बहुत से लोगों के निठल्लेपन की सुविधा अवश्य बांट सके हैं।



