स्वयं की ऊर्जा और क्षमता को पहचानें युवा
स्वयं की क्षमता, शक्ति एवं ऊर्जा को पहचानना आज के नव युवकों के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं के विकास से तात्पर्य खुद के लिए अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोज़गार की तलाश राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान भी हो सकता है।
भारत की विशाल आबादी के हिसाब से भारत नौजवानों का देश है और भारत सरकार के लिए इतने युवा लोगों के लिए नौकरी उपलब्ध कराना संभव भी नहीं है। ऐसे में पढ़े-लिखे नौजवानों का यह महती दायित्व बन जाता है कि वह स्वयं की क्षमता को पहचान कर मेक इन इंडिया या स्वावलंबी होने का भरसक प्रयास करें। स्वयं की क्षमता को पहचानने वाला व्यक्ति समाज में एक आदर्श बन कर उभरता है और उसकी प्रसिद्धि समाज में स्वयं हो जाती है। युवक स्वयं का रोज़गार शुरू कर न सिर्फ खुद की बेरोज़गारी दूर करता है, बल्कि वह दूसरों के लिए भी रोज़गार का साधन बन जाता है। यह राष्ट्रीय हित में अत्यंत आवश्यक समीचीन तथा राष्ट्रीय विकास के लिए एक अच्छे सूचक के रूप में सामने आता है। स्वयं अपनी क्षमताओं को पहचानना एवं अपने अंदर के उद्यमी को रोज़गार के लिए उपयोग में लाना मनुष्य का एक तरह का अलंकार या आभूषण ही है जो मनुष्य के लिए सुखी होने का बड़ा स्रोत है। वैसे भी नौकरी करके युवा एक तरह से परतंत्र, पराधीन हो जाता है और अपनी क्षमताओं का खुलकर प्रयोग नहीं कर पाता। यही कारण है कि राष्ट्र के समग्र विकास में उसकी क्षमताओं का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय योजना मेक इन इंडिया के अंतर्गत आह्वान किया गया है कि नौजवानों को अपनी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल का उपयोग कर भारत देश के लिए हर तरह के आवश्यक वस्तुओं का स्वयं निर्माण करें एवं दूसरे नौजवानों के लिए आदर्श स्थापित करें जिससे संपूर्ण देश स्वावलंबी बने। स्वयं की क्षमताओं को पहचानने वाला व्यक्ति स्वतंत्र, स्वाभिमानी होकर स्वयं पर पूर्ण विश्वास करने वाला आत्मविश्वासी व्यक्ति होता है। ऐसे में भविष्य में जितनी भी मुश्किल है या कठिनाई आती है, उसका वह अपने ज्ञान और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करने से नहीं घबराता है। अपनी क्षमताओं को पहचानने के कारण व्यक्ति अत्यंत सरल, सहज एवं आत्मविश्वासी होकर दूसरों की मदद करने से भी पीछे नहीं हटता। स्वावलंबन को दूसरों पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं होती एवं अपने ही ज्ञान तथा क्षमता से वह उन्नति करता जाता है एवं राष्ट्र के लिए एक धरोहर की तरह होता है। खुद की क्षमता पहचान कर अपना उद्यम डालने से न सिर्फ समाज में विकास होता बल्कि देश में भी विकास के योगदान में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होता है।
कोलंबस ने भी अपनी शक्ति, क्षमता को पहचान कर अमरीका की खोज की और गरीब मां-बाप की संतान अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अमरीका का सर्वोच्च पद प्राप्त किया। राइट ब्रदर्स ने अपने ज्ञान का समुचित विकास एवं उपयोग कर हवाई जहाज़ की खोज की। खुद की शक्ति एवं ऊर्जा के विकास और स्वावलंबन का सबसे बड़े उदाहरण महात्मा गांधी रहे जिन्होंने न सिर्फ अपनी क्षमता को पहचाना बल्कि पूरे हिंदुस्तानियों को दिशा दिखा कर स्वतंत्रता का आह्वान कर स्वाधीनता प्राप्त की। उन्नत शिक्षित परिश्रमी एवं सदाचारी युवाओं से ही कोई राष्ट्र महानता की श्रेणी में पहुंच जाता है।
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