उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष कौन-सा है ?

‘दीदी, प्रतियोगी परीक्षा में खासकर राज्य स्तर के कम्पटीशन में राज्य से संबंधित प्रश्न मालूम किये जाते हैं।’
‘हां, ऐसा तो है।’
‘अभी मैं कहीं पढ़ रहा था कि एक प्रतियोगी परीक्षा में मालूम किया गया कि उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष कौन सा है? मुझे तो मालूम नहीं, क्या आप बता सकती हैं।’
‘अशोक है, जो पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है।’
‘अशोक का वैज्ञानिक नाम क्या है?’
‘सराका असोका है।’
‘उत्तर प्रदेश ने इसे ही अपना राजकीय वृक्ष क्यों चुना?’
‘इसकी अनेक वजहें हैं।’
‘जैसे?’
‘सबसे पहली बात तो यह है कि अशोक का पेड़ अपने सदाबहार पत्तों व फूलों के लिए विख्यात है।’
‘अच्छा।’
‘इसकी छाल और पत्तियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। यह भारत का एक पवित्र पारम्परिक पेड़ है। लेकिन ऐसा नहीं है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता है। वैसे इसे दु:ख या शोक रहित पेड़ भी कहा जाता है।’
‘ऐसा क्यों?’
‘अशोक का अर्थ है ‘किसी भी प्रकार का शोक न होना’। पौराणिक महत्व के अलावा, अशोक के पेड़ को इसके स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जाना जाता है। हालांकि यह सभी जगह पाया जाता है, लेकिन अधिकतर यह मंदिरों के आसपास दिखायी देता है।’
‘अशोक का पेड़ देखने में कैसा होता है?’
‘यह छोटा व सीधा पेड़ होता है। फरवरी से अप्रैल के महीनों में इस पर सुगंधित फूल लगते हैं। इसकी पट्टियां गहरे हरे रंग की होती हैं, जो घने गुच्छों में उगती हैं। अशोक के पेड़ का मूल क्षेत्र भारत ही है और यह आमतौर पर दक्षिण पठार, पश्चिम घाट के बीच के हिस्सों और हिमालय की तलहटी में उगाया जाता है। यह समूचे उत्तरी भारत में भी फैला हुआ है। ये मिट्टी के कटाव को रोकने में मददगार है।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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