अब समोसे का नंबर है जी

बाजार के बीचों बीच स्थित जयपाल समोसे वाले की दुकान से उठती समोसों की खुशबू बाजार में आने जाने वालों के लिए स्वयं ही विज्ञापन का काम करती है। अक्सर आने जाने वालों के कदम दुकान के पास अनायास ही रुक जाते हैं। वहां जमा भीड़ के कारण बाइक पर चलने वालों के ब्रेक भी लग जाते हैं। ब्रेक लगने पर समोसों की खुशबू उनके नथुनों से टकराती है तो वो भी बिना समोसा लिए आगे नहीं बढ़ते। ऐसे में शहर के प्रसिद्ध जलपुरुषसढ़ौरा जी किसी काम से बाजार से गुजर रहे थे कि उनके नासिका छिद्रों में समोसों की खुशबू ने उनकी मूंछों के बैरिकेड तोड़कर बिना कोई टोल दिए प्रवेश कर लिया। जलपुरुष के कदम एकाएक थम गए। उन्होंने जयपाल जी से दुआ सलाम किया और उनके समोसों की तारीफ में जमीन आसमान तो क्या हिंदुस्तान और पाकिस्तान एक कर दिया। आसपास के लोग उनके मुंह की तरफ ऐसे देख रहे थे जैसे कह रहे हों कि मसरी के पेड़ की ऊंची टहनी से जयपाल जी अब गिरे कि कब गिरे। जयपाल जी, विनम्रता की प्रतिमूर्ति बने हर वाक्य में दो बार ‘जी’ का इस्तेमाल करते हैं। वे जलपुरुष जी के हर सवाल का जवाब समोसे तलते हुए अपने ब्रह्मवाक्य ‘जी भाई जी’ के साथ दे रहे हैं। उनका ध्यान समोसे तलने में ज्यादा हैं, जलपुरुष की बातों में कम। फिर भी वे समोसों के साथ-साथ संवाद को बनाए रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
‘जयपाल जी! एक चाय बनाने वाला पिछले ग्यारह साल से प्रधानमंत्री की गद्दी पर जमा हुआ है।’
‘जी भाई जी।’
‘चाय और समोसे की तो जय और वीरू जैसी दोस्ती होती है।’
‘जी भाई जी।’
‘जब एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो एक समोसे वाला प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता?’
‘जी भाई जी’
‘मैं पूछ रहा हूं, क्यों नहीं बन सकता?’
‘जी भाई जी यह तो आप ही बेहतर जाने।’
‘अरे बन सकता है पर कोई समोसे वाला सामने तो आए। यदि आप चाहें तो क्या नहीं हो सकता?’ 
‘जी भाई जी। वो कैसे?’
चाय बनाते समय पानी बर्बाद होता है।
‘जी भाई जी।’
‘जबकि समोसे बनाते समय पानी की इतनी बर्बादी नहीं होती।’
‘जी भाई जी!’
‘चाय एक बीमारी है, जो एसिडिटी जैसे गंभीर और खतरनाक रोगों को जन्म देती है। जबकि समोस। समोसा भूखे का पेट भरने के काम आता है। आज किट्टी पार्टी हो या कवि गोष्ठी, कोई छोटी पार्टी हो या बड़ी पार्टी हर पार्टी की शान क्या है भला?’
‘जी भाई जी! समझ गया।’
‘जयपाल जी आपका यह समोसा हर पार्टी की शान है। आजकल चाय का स्थान कोल्डड्रिंक्स ने ले लिया पर समोसे का स्थान लेने की हिम्मत किसी की नहीं हुई।’
‘जी भाई जी।’ फिर थोड़ा रुककर अपने नौकर को आवाज़ देते हुए बोले, ‘अरे छोटे! सढौरा जी के लिए एक प्लेट समोसा लगाओ।’
जलपुरुष जी ने बड़े ही आदर भाव के साथ समोसे का प्रसाद ग्रहण किया और जयपाल जी को राजनीति में आने का निमंत्रण दे डाला। उन्हें देश का भविष्य बताते हुए कहा, ‘अगर चाय को कोई प्रधानमंत्री की गद्दी से हटा सकता है तो वह समोसा ही है। यदि एक चाय वाला पंद्रह साल प्रधानमंत्री रह सकता है तो एक समोसे वाला तो बीस साल प्रधानमंत्री रहेगा।’
‘जी भाई जी।’
‘तो मेरे समझाने का कुछ फर्क पड़ा जयपाल जी।’
‘जी भाई जी। आपको मेरी दुकान यहां अच्छी नहीं लग रही।’
‘अच्छी है, पर मैं राजनीति में आपके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कर रहा था।’
‘भाई जी, कभी बिहार में कहा जाता था कि जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में लालू। भाई जी, समोसे में तो आलू आज भी है, पर बिहार में लालू को गायब हुए तो एक अरसा हो गया है। इसलिए भाई जी, हमारे लिए यह दुकान ही दिल्ली है।’
‘ठीक है जयपाल जी। अपने अपने भाग्य की बात है।’ कहकर जलपुरुषसढौरा जी आगे बढ़ गए। उधर यह बात अखबारों के माध्यम से वायरल हो गई तो बहुत से विपक्षी नेताओं ने समोसा बनाने का अभ्यास शुरू कर दिया।
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