ट्रम्प के खिलाफ गुस्सा
एक तरफ ये खबरें आ रही हैं कि अमरीका द्वारा ईरान पर बड़े हमले करके खार्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा, क्योंकि ईरान से संबंधित खारू द्वीप और खार्ग द्वीप में ही उसके कच्चे तेल के बड़े भंडार हैं और वह इस स्थान से ही दूसरे देशों को कच्चा तेल भेजता है। इसी कारण पिछले माह से चल रहे युद्ध में अमरीका और इज़रायल ने पहले इस द्वीप पर हमले किए थे परन्तु बाद में इन द्वीपों पर तेल के भंडारों को नष्ट न करने की मंशा से हमले रोक दिए गये थे। इसी प्रकार होर्मुज जलडमरू का समुद्री इलाका ईरान के बहुत निकट होने के कारण यह इसके एक तरह से काबू में है। इसी रास्ते से ही विश्वभर के देशों का व्यापार होता है। खासतौर पर तेल का 20 प्रतिशत व्यापार होर्मुज के रास्ते से ही होता है। ईरान द्वारा इस रास्ते से जाने वाले जहाज़ों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। इसी कारण यहां जहाज़ों का आवागमन पूरी तरह से ठप्प होकर रह गया है जिससे विश्वभर में कच्चे तेल की कमी पैदा हो गई है और तेल की कीमतें लगातार बढ़ने लगी हैं।
अमरीक के शासक डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपियन देशों से ईरान का ऐसा कब्ज़ा हटाने संबंधी मदद मांगी थी परन्तु उनके इन्कार के बाद ट्रम्प बेहद बौखलाहट में आ गये प्रतीत होते हैं। ऐसी बौखलाहट में वह आगामी दिनों में ईरान पर और भी बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे मध्यपूर्व में और भी बेहद तबाही की सम्भावना बन गई है। खाड़ी के कई अहम देशों में अमरीका के सैनिक अड्डे हैं। ईरान द्वारा इन देशों पर किए जा रहे हमलों के कारण स्थिति और भी तनावपूर्ण बनती नज़र आ रही है। इसी तरह यमन के एक बड़े हिस्से पर हूती ब़ािगयों ने कब्ज़ा किया हुआ है। साल 2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी साना सहित और काफी बड़े इलाके पर कब्ज़ा कर लिया था, जिससे खाड़ी देशों के लिए और भी बड़ी चुनौती पैदा हो गई थी। हूतियों ने पिछले समय में भी अरब सागर के दक्षिण भाग में बाब एल-मंदेब के समुद्री मार्ग पर कब्ज़ा कर लिया था। खाड़ी देशों का तेल का ज़्यादातर व्यापार लाल सागर के इसी रास्ते से होता है। हूतियों के सक्रिय होने से यह स्थिति और भी गम्भीर बन गई है। अमरीका तथा इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले करने शुरू किए थे, परन्तु महीना बीत जाने के बाद भी इस युद्ध का कोई समाधान दिखाई नहीं देता। इतने दिन गुज़रने के साथ मध्य-पूर्व में नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने हैं, परन्तु आते ही उन्होंने दूसरे देशों से अमरीका में होते आयात पर भारी टैरिफ लगाने, अमरीका में होते अवैध प्रवास को रोकने सहित बहुत-से ऐसे कड़े फैसले लिए, जिनसे विश्व के ज़्यादातर देश नाराज़ हो गए हैं। उनकी इन नीतियों से अमरीका में भी महंगाई बढ़ने लगी है और यह प्रभाव बना दिखाई देने लगा है कि राष्ट्रपति ने ईरान के साथ युद्ध शुरू करके एक बड़ी मुसीबत सहेज ली है। इन नीतियों के कारण ही अमरीका में पहले कई बार उनके खिलाफ बड़े तथा सख्त प्रदर्शन हो चके हैं।
गत वर्ष जून में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। फिर अक्तूबर में देश भर में प्रदर्शन हुए। अब तीसरी बार सारे देश में लाखों की संख्या में लोग हज़ारों स्थानों पर प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति के कारण ट्रम्प रक्षात्मक नीति पर अवश्य आ गए प्रतीत होते हैं, परन्तु इसके साथ-साथ जो हालात पैदा हो रहे हैं, उनको देखते हुए जल्द इस विनाशकारी युद्ध के समाप्त होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यदि ट्रम्प बिना कोई जीत प्राप्त किए पीछे हट जाते हैं, तो विश्व भर में अमरीका तथा उसकी प्रतिष्ठा बहुत कम हो जाएगी। इसी कारण उन्होंने इस युद्ध को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। फिर भी अपने-अपने ढंग-तरीके से विश्व के अधिकतर देश इस युद्ध को समाप्त करवाने के लिए प्रयासरत हैं। नि:संदेह यह युद्ध समाप्त होना चाहिए, नहीं तो इसके कारण विश्व के सभी देशों के लिए ऊर्जा की कमी सहित अन्य भी बहुत-सी मुश्किलें पैदा हो जाएंगी। यह बड़े विनाश को आमंत्रित देने वाली बात होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

