आधुनिक दौर की सुरैया हैं वसुंधरा दास

हाल ही में एक पार्टी के दौरान जब मैंने ‘वेयर्स द पार्टी टूनाईट’ गीत सुना तो मैंने इस गीत की गायिका को एकदम पहचान लिया। लेकिन साथ ही मुझे ख्याल आया कि इस गायिका के बारे में वर्षों से कोई जानकारी सामने नहीं आयी है और न ही इसकी आवाज़ में कोई नया गाना किसी फिल्म में सुनने को मिला है, जबकि 2000 के दशक में इस गायिका के गाने हर जगह बज रहे थे, पार्टियों में, रूह को सुकून पहुंचाते हुए एकांत की घड़ियों में और दोस्तों के साथ लांग ड्राइव पर जाते हुए कार स्टीरियो पर। इसके बावजूद वह जिस तेज़ी से शुहरत की बुलंदियों पर पहुंची थी, उतनी ही तेज़ी से गायब भी हो गई और उसके फैन यह सोचते रह गये कि उसकी खामोश विदाई क्योंकर हुई। अब तो आप समझ ही गये होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूं। 
जी, वसुंधरा दास की, जो बेंग्लुरु में रहने वाली हिंदुस्तानी क्लासिकल गायिका हैं, जिन्होंने दोनों संगीत व फिल्मों में अपनी प्रभावी गायकी व शानदार अभिनय से अपने लिए हिंदी, मलयालम, तमिल आदि फिल्मों में सशक्त पहचान बनायी थी। वसुंधरा ने जब तमिल फिल्म ‘मुधाल्वन’ के लिए ए.आर. रहमान के संगीत निर्देशन में शाकालाका बेबी गीत गाया तो वो रातोंरात संगीत प्रेमियों के दिलों पर छा गईं क्योंकि यह गीत न सिर्फ ज़बरदस्त हिट हुआ बल्कि 2001 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक गायिका (तमिल) का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला। नतीजतन उनका प्लेबैक करियर परवान चढ़ने लगा। यह जल्द ही ज़ाहिर हो गया कि वसुंधरा हर किस्म के गीत गाने में निपुण हैं, जैसे ‘ओ रे छोरी’, जोकि रहमान का ही कम्पोजीशन था, जिससे उनकी रेंज सबको मालूम हो गई। फिर उन्होंने शंकर-एहसान-लॉय के साथ ब्लॉकबस्टर ट्रैक दिये जैसे ‘वेयर्स द पार्टी टूनाईट’ (कभी अलविदा न कहना) और ‘इट्स द टाइम टू डिस्को’ (कल हो न हो)। यह दोनों ही फिल्में शाहरुख खान की थीं और यह गीत बॉलीवुड पॉप कल्चर का हिस्सा बन गये। 
वसुंधरा ने 2004 में फिल्मोद्योग में अपना स्थान अतिरिक्त मज़बूत कर लिया ‘चलें जैसे हवाएं’ (मैं हूं न) जैसे ज़बरदस्त हिट गीतों से। उन्होंने अभिषेक बच्चन की फिल्म ‘धूम’ में ‘सलामे’ गीत के लिए भी अपनी आवाज़ दी और प्रीती ज़िंटा व स़ैफ अली खान की फिल्म ‘सलाम नमस्ते’ का टाइटल गीत भी गाया। ‘जाने तू... या जाने न’ फिल्म में वसुंधरा ने ‘कहीं तो होगी वो’ गीत गाया जिसे आज तक पसंद किया जाता है। अमिताभ बच्चन व रवीना टंडन की फिल्म ‘अक्स’ में उन्होंने सुखविंदर सिंह के साथ मिलकर ‘रब्बा रब्बा’ गीत भी गाया था। प्लेबैक गायकी के अतिरिक्त वसुंधरा ने अभिनय में भी अपना समानांतर करियर विकसित किया। उनकी डेब्यू फिल्म कमल हासन के साथ ‘हे राम’ थी। इसके बाद तो उनकी एक के बाद एक फिल्में आयीं, जैसे ‘मानसून वेडिंग’, ‘कॉर्पोरेट’, ‘वज्रम’, ‘लंकेश पत्रिके’, ‘रावणप्रभु’, ‘सिटीजन’, ‘गौरी’ आदि और उनको आधुनिक दौर की सुरैय्या समझा जाने लगा, जो दोनों गायन व अभिनय में माहिर व सफल थीं। मलयालम फिल्म ‘रावणप्रभु’ में वह मोहन लाल की हीरोइन थीं और तमिल फिल्म ‘सिटीजन’ में उनके हीरो अजित कुमार थे। कन्नड़ फिल्म ‘लंकेश पत्रिके’ में वह दर्शन के साथ थीं। मीरा नायर की अंतर्राष्ट्रीय फिल्म ‘मानसून वेडिंग’ का भी वसुंधरा हिस्सा थीं।  वसुंधरा को ज़बरदस्त कामयाबी मिली और वह आज भी अपने प्रशंसकों के जहन में हैं। इसलिए दो महत्वपुर्ण सवाल उठते हैं। एक, फिल्म दुनिया से वह अचानक गायब क्यों हो गईं? दूसरा यह कि क्या वह फिल्मी दुनिया में पुन: वापसी पर विचार कर रही हैं? वह इस बात को तो स्वीकार करती है कि एक समय में सिनेमा उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन अब वह अपनी ज़िंदगी के अलग चरण में हैं, नई राहों पर चल रही हैं। उन्हें कोई खेद नहीं है कि अपने करियर के चरम पर वह प्रतिस्पर्धा से हट गईं और साथ ही उन्हें अब उस संसार में लौटने की चाहत भी नहीं है। वह आज जिस राह पर चल रही हैं उस पर ही फोकस किये हुए हैं। वसुंधरा का जन्म बेंग्लुरु में किशन दास व निर्मला दास के घर में हुआ था। उन्होंने छह साल की आयु में ही संगीत की तालीम लेना शुरू कर दी थी, अपनी दादी इंदिरा दास के म्यूजिक स्कूल में। बाद में उन्होंने हिन्दुस्तानी क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग ललित कला अकादमी में की और अपने गुरु पंडित परमेश्वर हेगड़े की निगरानी में संगीत की शिक्षा जारी रखी। प्रारम्भिक शिक्षा क्लूनी कान्वेंट हाई स्कूल और श्री विद्या मंदिर से हासिल करने के बाद वसुंधरा ने माउंट कारमेल कॉलेज, बेंग्लुरु से गणित, अर्थशास्त्र व स्टेटिस्टिक्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। 
साल 2013 में वसुंधरा ने बेंग्लुरु के एमजी रोड मेट्रो स्टेशन पर कम्युनिटी ड्रमजैम स्थापित किया अपने पति के साथ। यह एक संगीत पहल है। वह स्कूलों में संगीत सत्रों का आयोजन करती हैं और उन बच्चों के लिए भी जो खतरे में हैं, बुज़ुर्ग जिनको डेमेंशिया है व लाइलाज कैंसर रोगियों के लिए भी। वसुंधरा का फोकस अब म्यूजिक थैरेपी और ध्वनि उपचार पर है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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