फिलाडेल्फिया म्यूजियम ऑ़फ आर्ट में स्थित रॉकी स्टेच्यू

फिलाडेल्फिया म्यूजियम ऑ़फ आर्ट में 72 ग्रे स्टोन सीढ़ियां चढ़ने के बाद आप आइकोनिक ‘रॉकी स्टेच्यू’ तक पहुंच जाते हैं। काल्पनिक किरदार रॉकी बाल्बोया को बड़े पर्दे पर सिल्वेस्टर स्टेलोन ने इसी नाम की फिल्म में अदा किया था। मूर्ति कांस्य की बनी हुई है और उसके दोनों हाथ जीत की मुद्रा में ऊपर की तरफ उठे हुए हैं। पर्यटक इस चर्चित सीन की नकल करने का प्रयास करते हैं, जब रॉकी ने वापसी का प्रयास करते हुए तेज़ी से सीढ़ियां चढ़ी थीं, उसकी आंखों में खून उतरा हुआ था और कालजयी खेल गान ‘सर्वाइवर्स आई’ पृष्ठभूमि में बज रहा था। 
लेकिन खेल प्रेमी इस साइट को विजिट करते हुए यह सावधानी बरतते हैं कि मूर्ति पर अपनी जर्सी या झंडा न डालें। वह रॉकी के श्राप से डरते हैं। मान्यता यह है कि अगर खेल प्रेमी अपनी पसंद की टीम की जर्सी मूर्ति को पहना देंगे या अपना राष्ट्रीय झंडा उस पर लपेट देंगे, तो उनकी टीम आखिरकार पराजित हो जायेगी। ब्राज़ील के फैन स्टेडियम और सेंटर मार्किट के निकट फूड कोर्ट में एक-दूसरे से यह कहते हुए सुने गये, ‘क्या तुमने रॉकी पर जर्सी या झंडा तो नहीं डाला था?’ जवाब ‘न’ में मिलने पर तुरंत राहत और प्यार की झप्पी मिलती है। अमरीका, कनाडा व मैक्सिको में खेले जा रहे 23वें फुटबॉल विश्व कप में अपने-अपने अंधविश्वास हैं। मूर्तिकार, थॉमस शूमबर्ग ने यह मूर्ति 1982 की फिल्म ‘रॉकी 3’ के लिए बनायी थी। अब यह फिलाडेल्फिया की संस्कृति का हिस्सा बन गई है और फिल्म के स्थायी सांस्कृतिक प्रभाव के प्रतीक के रूप में खड़ी है। स्टेलोन ने स्वयं इस मूर्ति को म्यूजियम को दान में दी थी। 
इस मूर्ति से अपशगुन कैसे जुड़ गया, यह किसी को मालूम नहीं है, लेकिन हर कोई यह जानता है कि एनएफएल की टीम न्यू इंग्लैंड पेट्रियट्स ने रॉकी को टॉम ब्रैडी शर्ट में ड्रेसअप किया था और वह सुपर बॉल में ईगल्स से हार गई थी। इसके पांच साल बाद सैनफ्रांसिस्को 49एर्स ने मूर्ति को अपनी ड्रेस पहनायी और वह एनएफसी चैंपियनशिप 7-31 से हार गई। वाशिंगटन कमांडर्स का भी पिछले साल यही हाल ईगल्स के विरुद्ध हुआ और श्राप का जन्म हो गया। इसलिए खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ और फैंस मूर्ति पर झंडा या किट डालने से बचते हैं। एक बात यह प्रचलित है कि वाशिंगटन के एक फैन ने श्राप को उल्टा करने का प्रयास किया, मूर्ति पर ईगल्स की जर्सी डालकर। दांव काम न आया- श्रापों की भी चेतना होती है। 
दरअसल, यह एक प्रकार की शहरी लीजेंड बन गई है कि फिलाडेल्फिया के पर्यटन विभाग ने इंस्टाग्राम पोस्ट से वार्निंग जारी की, ‘एक अच्छे मेज़बान की तरह हम यह जानकारी साझा करना चाहते हैं कि फिलाडेल्फिया में ‘द रॉकी स्टेच्यू कर्स’ है जो साबितशुदा है। हमें खेद है कि हम यह जानकारी पिछले सप्ताह साझा न कर सके, लेकिन अब कर रहे हैं। अनगिनत फुटबॉल टीमों (जैसा कि अमेरिकन फुटबॉल में है, न कि फुत्बोल- समान श्राप, अलग खेल) ने रॉकी स्टेच्यू को अपने कलर्स में ड्रेस-अप किया है और वह हार गई हैं। पिछले सप्ताहांत पर इक्वेडोर ने रॉकी को ड्रेस किया था और उसे हार का मुंह देखना पड़ा। संयोग? अफसोस, इतिहास न कहता है। फिलाडेल्फिया आपकी मेज़बानी करने के लिए बेसब्र है (लेकिन रॉकी को आपकी किट नहीं चाहिए)।’ 
गौरतलब है कि इक्वेडोर के फैन जी बेनाविडेस, जो रॉकी के भी फैन हैं, ने एक शर्ट स्वयं तैयार की, पीठ पर रॉकी का नाम प्रिंट कराया और अपने गांव से 3,000 मील की यात्रा करके अपनी टीम को चीयर करने के लिए पहुंचे। मूर्ति का साइज़ उसने ऑनलाइन लिया था ताकि वह फिट आये। शर्ट पर रॉकी के नाम के ऊपर लिखा, ‘सपना साकार करो और इतिहास बनाओ।’ यात्रा से पहले उसने स्थानीय अखबारों से कहा था, ‘रॉकी अनुशासन व निरंतरता की मिसाल है। वह हमेशा अपने से अधिक सम्पन्न व्यक्तियों का सामना करता रहा, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। हमें यही स्पिरिट चाहिए।’ 
मैच से एक दिन पहले वह फिलाडेल्फिया में आ गया, म्यूजियम गया और कुछ अन्य फैंस की मदद से उसने शर्ट रॉकी को पहना दी। वह अपने होटल पहुंचा ही था कि उसके इनबॉक्स में नफरती संदेशों की बाढ़ आ गई, लेकिन उसने सोचा, ‘इक्वेडोर रॉकी के श्राप को तोड़कर शहर को आज़ाद कर देगा।’ ऐसा हुआ नहीं। आइवरी कोस्ट ने खेल के 90वें मिनट में गोल दाग दिया और उसका दिल टूट गया, रॉकी के श्राप को सच करते हुए। उसने कहा, ‘मैं इतना अधिक रो रहा था कि ब्राज़ील व बोस्टन के लड़कों ने मुझे गले लगाकर दिलासा दिया।’ 
बेनाविडेस की बदकिस्मती ने ब्राज़ील के फैंस को सतर्क कर दिया, जिन्होंने पूरे शहर को पीला रंग दिया था। साओ पाउलो से आये एलेक्स ने कहा, ‘हमें श्राप की जानकारी नहीं थी और हम भी ऐसा ही करते। हम रॉकी के लिए डबल एक्सएल जर्सी लेकर आये थे। शुक्र है कि ग्रुप में किसी ने बेनाविडेस का वीडियो शेयर किया और हमने तय किया कि ब्राज़ील से संबंधित कोई चीज़ रॉकी पर नहीं डालेंगे।’ एक फैन ने कहा, ‘मैं श्राप या अपशगुन में विश्वास नहीं करता, लेकिन मैं कोई चांस भी नहीं लेना चाहता हूं।’ यह मात्र संयोग है या श्राप है, लेकिन कोई भी रॉकी के गुस्से को जगाना नहीं चाहता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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