आज भी कम नहीं हुआ पुस्तकालय का महत्व 

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पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, विचार, अनुसंधान और सभ्यता की विरासत को संरक्षित रखने वाले जीवंत केंद्र हैं। मानव इतिहास की प्रत्येक महान सभ्यता ने अपने ज्ञान को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए पुस्तकालयों की स्थापना की। यही कारण है कि पुस्तकालयों को किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक विकास की मज़बूत नींव माना जाता है। आज भले ही दुनिया तेज़ी से डिजिटल युग की ओर बढ़ रही है, फिर भी पुस्तकालयों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि वे और अधिक आधुनिक, व्यापक तथा जन-सुलभ बन गए हैं।
भारत में प्रतिवर्ष 12 अगस्त को राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उनकी दूरदर्शी सोच ने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के भंडार से आगे बढ़ा कर ज्ञान के सक्रिय केंद्र के रूप में स्थापित किया। ‘लाइब्रेरी’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द ‘लिबर’ से मानी जाती है, जिसका अर्थ है ‘पुस्तक’। वास्तव में पुस्तकें ही मनुष्य की सोच को दिशा देती हैं, ज्ञान का विस्तार करती हैं और श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करती हैं। इसलिए पुस्तकालय को ज्ञान का मंदिर और विचारों का खज़ाना कहा जाता है।
भारत की प्राचीन शिक्षा परम्परा में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों के विशाल पुस्तकालय ज्ञान और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र थे। इन पुस्तकालयों में हज़ारों दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित थीं, जिनका अध्ययन करने के लिए विश्व भर से विद्वान आते थे। समय के साथ अनेक पुस्तकालय नष्ट हो गए, किंतु ज्ञान के संरक्षण और प्रसार की परम्परा कभी समाप्त नहीं हुई।
वर्तमान में पुस्तकालय केवल मुद्रित पुस्तकों तक सीमित नहीं रहे हैं। ई-पुस्तकें डिजिटल अभिलेख, ऑनलाइन शोध सामग्री, ऑडियो पुस्तकें, ई-जर्नल तथा डिजिटल डाटाबेस ने आधुनिक पुस्तकालयों को नई पहचान प्रदान की है। विश्वविद्यालयों, विद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में इंटरनेट आधारित सेवाओं ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा पाठकों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं। डिजिटल तकनीक ने दूर-दराज क्षेत्रों तक भी उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री पहुंचाना संभव बना दिया है।
इसके बावजूद इंटरनेट पर उपलब्ध अपार जानकारी के बीच पुस्तकालयों का महत्व इसलिए बना हुआ है, क्योंकि यहां प्रमाणिक, व्यवस्थित और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध होती है। पुस्तकालय पढ़ने की आदत विकसित करते हैं, एकाग्रता बढ़ाते हैं, आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं तथा जीवन भर सीखते रहने की संस्कृति को मज़बूत बनाते हैं। यही कारण है कि पुस्तकालयों को समाज के बौद्धिक विकास का सबसे विश्वसनीय आधार माना जाता है। यदि पुस्तकालय समाज का ज्ञान-केंद्र है, तो विद्यालयी पुस्तकालय भविष्य के ज़िम्मेदार नागरिकों के निर्माण का केंद्र है। विद्यार्थी केवल पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए नहीं पढ़ता, बल्कि जीवन जीने की कला, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनाएं भी सीखता है। विद्यालयी पुस्तकालय उसे इतिहास, विज्ञान, साहित्य, आत्मकथाएं, पर्यावरण, खेल, कला तथा समसामयिक विषयों का व्यापक ज्ञान प्रदान करता है।
आज शिक्षा व्यवस्था में परीक्षाओं और अंकों की दौड़ ने पढ़ने के आनंद को कहीं न कहीं कम कर दिया है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और त्वरित मनोरंजन ने बच्चों का अधिक समय अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। ऐसे समय में एक सक्रिय और आकर्षक पुस्तकालय विद्यार्थियों को स्वस्थ एवं रचनात्मक विकल्प उपलब्ध करा सकता है। अच्छी पुस्तकें केवल जानकारी ही नहीं देतीं, बल्कि सोचने, प्रश्न पूछने, तर्क करने और सही निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। यदि देश के प्रत्येक गांव, पंचायत और विद्यालय में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पुस्तकालय स्थापित किए जाएं, तो बच्चों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोज़गार तथा कौशल विकास से संबंधित विश्वसनीय जानकारी सहज रूप से उपलब्ध हो सकती है। अनेक राज्यों ने पुस्तकालयों के विकास के लिए विशेष बजट भी जारी किए हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जिनमें पंजाब भी शामिल है। सामुदायिक पुस्तकालय सामाजिक सद्भावए जन-जागरूकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पुस्तकालय संस्कृति को सशक्त बनाने पर विशेष बल देती है। जब तक मनुष्य में सीखने की जिज्ञासा जीवित रहेगी, तब तक पुस्तकालयों का महत्व भी सदैव बना रहेगा।
-मो. 90412-95900

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