भगवान महादेव की राजनगरी है
जो पृथ्वी पर होने पर भी पृथ्वी से संबद्ध नहीं है, स्वार्गादि लोकों से भी अधिक प्रतिष्ठित एवं उच्चत्तर है जो जागतिक सीमाओं से आबद्ध होने पर भी सभी का बंधन काटने वाली मोक्षदायिनी है, जो सदा त्रिलोक पावनी भगवती भागीरथी के तट पर सुशोभित तथा देवताओं से सुसंचित है वह त्रिपुरारी भगवान महादेव की राजनगरी वाराणसी की भूमि है। वाराणसी के बारे में ये विचार स्कन्दपुराण में वर्णित हैं।
अपनी साड़ियों के लिए विश्व-विख्यात वाराणसी पान और चाट के लिए भी जाना जाता है। संस्कृति व संस्कृत का यह केन्द्र बिन्दु है। पूरे भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों के लोग सद्भावना के साथ यहां रहते हैं। आज वाराणसी पर्यटन के लिए प्रमुखता से जाना जाता है। हिंदुओं का यह धार्मिक नगर मन्दिरों, घाटों व गलियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां गंगा हरिद्वार की भांति ही मोक्षदायिनी मानी गयी है। विदेशों से खींचे चले आ रहे पर्यटक यहीं के होकर रहने की सोचते हैं। यह गुण ही वाराणसी की विशिष्टता को प्रतिपादित करता है।
वाराणसी के दर्शनीय स्थल
तुलसी घाट
यह वाराणसी के प्रमुख घाटों में से एक है। इसी घाट पर हिंदू संस्कृति के पथ प्रदर्शक, राम चरितमानस के रचयिता प्रसिद्ध रामभक्त कवि गोस्वामी तुलसीदास बहुत दिनों तक रहे थे तथा विक्रमी संवत् 1680 में तुलसीदास ने यहीं पर अपनी देह त्यागी थी। देह त्यागने से पूर्व उन्होंने इस घाट पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की थी जो उनकी चरण पादुकाओं सहित आज भी सुरक्षित है। भगवान कपिल, शिव, अर्कविनायक सहित एक पानी का कुण्ड यहां दर्शनीय हैं।
काशी-करवत
औरंगजेब द्वारा बनाई गई मस्जिद के पास यह स्थान एक गली में है। यहां एक अंधेरे कुएं में शिवलिंग है। कुएं में जाने का आम रास्ता बंद रहता है। वह किसी निश्चित समय पर ही खुलता है। कुएं में ऊपर से ही अक्षत और पुष्प चढ़ाए जाते हैं। इसके आस-पास भी कुछ मंदिर हैं।
काल भैरव
यह मंदिर भैरवनाथ मोहल्ले में स्थित है। यहां चांदी से मढ़ी हुई भगवान भैरवनाथ की चार भुजाओं वाली मूर्ति है। भैरव जी का वाहन काला कुत्ता है। इसको नगर का कोटपाल माना जाता है। कार्तिक कृष्णा अष्टमी, मार्ग शीर्ष कृष्णा अष्टमी तथा चतुर्दर्शी व रविवार के दिन यहां भक्तों का भारी जनसैलाब रहता है।
कुरुक्षेत्र तीर्थ
यह एक सरोवर है जिसके आस-पास सिद्धकुण्ड तथा कृमिकुण्ड हैं। यहां के कुटदन्त विनायक प्रसिद्ध हैं। आस-पास अन्य कुण्ड व मंदिर भी हैं। लोग श्रद्धा भाव से इसके जल का स्पर्श करते हैं।
गोरखनाथ मंदिर
यह मंदिर गोरखनाथ के चरण चिन्हों के लिए प्रसिद्ध है। गोरखनाथ सम्प्रदाय के साधु यहां रहते हैं। हिंदू समाज में गोरखनाथ को भगवान जैसा माना जाता है। चूंकि गोरखनाथ ने सभी हिंदू तीर्थों की यात्राएं की थी, इस कारण से आमजन को जहां कहीं भी उनके स्मृति चिन्ह का भान होता है, उसके दर्शन वे अवश्य ही करते है।
पंचकोशी
यह परिक्रमा 47 किमी. लम्बी है। इसके मार्ग में धर्मशालाएं, बाजार इत्यादि हैं तथा खाने-पीने का उचित बंदोबस्त है। मार्गशीर्ष तथा फाल्गुन महीने में लोग बड़े चाव से इस स्थान की परिक्रमा करते हैं। दोनों माहों सहित अधिक मास में भी यहां मेला भरता है। पंचकोशी परिक्रमा आमतौर पर 5 दिनों में समाप्त हो जाती है लेकिन कई लोग जानबूझ कर शिवरात्रि को ही इस परिक्रमा को पूरी करते हैं ताकि अधिक फल मिले।
रामनगर
यह गंगा के दाहिने तट पर स्थित है। यह मालवीय पुल से चार मील तथा असि संगम घाट से दूर अवस्थित है। नगवा से नाव द्वारा गंगा पार करके लोग रामनगर पहुंचते है। यहां राजमहल है जो प्राचीन है। जहां रजवाड़े के अवशेषों को देखा जा सकता है। आश्विन मास में यहां एक महीने तक रामलीला होती है। यहां मंदिर सहित तालाब दर्शनीय है।
सारनाथ
सारनाथ भारत का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह वाराणसी शहर से तीन मील, सड़क मार्ग से चार मील तथा वाराणसी छावनी से पांच मील की दूरी पर स्थित है। वाराणसी से सारनाथ जाने के लिए अनेक साधन हैं। यह बौद्ध तीर्थ इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं पर दिया था।
यहां अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तम्भ जो हमारा राष्ट्रीय चिन्ह है जिसके तीन ही छोर छायाचित्र में देखे जा सकते है, विशेष दर्शनीय है। भगवान बुद्ध से जुड़े स्मृति चिन्हों के स्थान के रूप में भी सारनाथ जाना जाता है। हालांकि मो. गौरी के आक्रमण के पश्चात् सारनाथ अधिकांशत: तहस-नहस हो गया था मगर सन् 1905 में पुरातत्व विभाग द्वारा इस स्थान की सुध लिए जाने के पश्चात् बौद्ध धर्मानुयायियों ने इस स्थान की तरफ देखा। फलस्वरूप आज यह विस्तृत पर्यटन स्थल के रूप में उभरता जा रहा है।
वाराणसी में भगवान शंकर के उनसठ (59) शिवलिंग अवस्थित हैं। 56 मूर्तियां भगवान विनायक की हैं, 12 सूर्य भगवान तथा 8 भैरव की, 9 दुर्गा की 13 नृसिंह की 16 केशव की प्रतिमाएं वाराणसी की छवि को धर्मनगरी का रूप दिए हुए है। काशी विश्वनाथ शिवलिंग, कालभैरव मंदिर, दुर्गा मंदिर तथा संकटनाशक हनुमान मंदिर के दर्शनों सहित आगन्तुक को गंगा स्नान अवश्य ही करना चाहिए।
वाराणसी देश का प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो सड़क मार्ग द्वारा देश के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है। यहां ठहरने तथा खाने-पीने का उचित बंदोबस्त है। यहां किसी भी ऋतु में यात्रा की जा सकती है मगर ध्यान रहे ऋतु बचाव के कपड़ों के साथ। (उर्वशी)





