गुग्गु और गोलू की दोस्ती

एक छोटे से सुंदर गांव में गुग्गु और गोलू नाम के दो बच्चे रहते थे। दोनों की उम्र लगभग दस साल थी। वे एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि गांव के सभी लोग उनकी मिसाल दिया करते थे। गुग्गु को चित्र बनाना बहुत पसंद था। जब भी उसे खाली समय मिलता, वह अपनी रंगों की डिब्बी लेकर बैठ जाता और तरह-तरह के सुंदर चित्र बनाता। कभी वह पहाड़ों का चित्र बनाता, कभी नदी और पेड़ों का, तो कभी अपनी कल्पना की एक नई दुनिया बना देता।
दूसरी ओर, गोलू को नई-नई चीजें बनाना और खेलना बहुत पसंद था। वह हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करता रहता था। दोनों दोस्तों की रुचियां अलग थीं, लेकिन यही उनकी दोस्ती को खास बनाती थीं। गुग्गु गोलू को चित्र बनाना सिखाता था और गोलू गुग्गु को नई-नई चीजें बनाना सिखाता था। एक दिन स्कूल से छुट्टी के बाद दोनों मैदान में बैठे थे। गुग्गु अपनी रंगों की डिब्बी खोलकर एक सुंदर चित्र बना रहा था। चित्र में हरे-भरे पहाड़, बहती नदी और चहचहाते पक्षी बने थे।
गोलू चित्र देखकर बोला, ‘वाह गुग्गु! तुम्हारा चित्र तो बहुत सुंदर है। काश! मैं भी इतना अच्छा चित्र बना पाता।’
गुग्गु मुस्कुराया और बोला, ‘क्यों नहीं गोलू? तुम भी बना सकते हो। बस मन लगाकर अभ्यास करो।’
गोलू ने कहा, ‘क्या तुम मुझे अपने रंग दे सकते हो? कल स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता है। मैं भी उसमें भाग लेना चाहता हूँ।’ गुग्गु ने तुरंत अपनी रंगों की डिब्बी उसकी ओर बढ़ा दी और बोला, ‘क्यों नहीं दोस्त! ये लो मेरे रंग। बस इन्हें ध्यान से इस्तेमाल करना, क्योंकि ये मेरे सबसे पसंदीदा रंग हैं।’
गोलू ने खुशी से कहा, ‘चिंता मत करो। मैं इनका पूरा ध्यान रखूँगा।’ गोलू जमीन पर बैठकर चित्र बनाने लगा। वह बहुत ध्यान से पेड़, घर और सूरज बना रहा था। गुग्गु भी उसके चित्र को देखकर खुश हो रहा था। कुछ देर बाद गोलू ने लाल रंग उठाने के लिए हाथ बढ़ाया। अचानक उसका हाथ रंगों की बोतल से टकरा गया...छन्न! लाल रंग की बोतल जमीन पर गिरकर टूट गई और पूरा रंग मिट्टी में फैल गया। गुग्गु यह देखकर घबरा गया। वह कुछ देर तक टूटी हुई बोतल को देखता रहा। फिर गुस्से में बोला, ‘गोलू! तुमने मेरे रंग खराब कर दिए। तुम्हें मेरी चीजों की बिल्कुल परवाह नहीं है।’
गोलू को बहुत दुख हुआ। उसने धीरे से कहा, ‘गुग्गु, मुझसे गलती हो गई। मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।’
लेकिन गुग्गु बहुत नाराज था, ‘अगर तुम्हें ध्यान रखना आता तो ऐसा नहीं होता। अब मैं तुम्हें अपने रंग कभी नहीं दूँगा।’
गोलू की आंखें भर आईं। वह बोला, ‘मुझे लगा तुम मेरे अच्छे दोस्त हो, लेकिन तुमने मेरी बात समझने की कोशिश ही नहीं की।’
इतना कहकर गोलू वहां से चला गया। उस दिन दोनों दोस्तों ने एक-दूसरे से बात नहीं की। अगले दिन स्कूल में भी वे अलग-अलग बैठे रहे। जो गुग्गु और गोलू हमेशा साथ दिखाई देते थे, अब एक-दूसरे से दूर थे। गुग्गु मन ही मन सोच रहा था, ‘गोलू ने मेरी पसंदीदा चीज खराब कर दी। मुझे उससे नाराज होने का अधिकार है।’ उधर गोलू सोच रहा था, ‘मुझसे गलती तो हुई, लेकिन गुग्गु को मेरी बात समझनी चाहिए थी।’
दोनों अपने-अपने विचारों में खोए हुए थे। उनकी अध्यापिका ने दोनों को उदास देखा। उन्होंने पूछा, ‘क्या बात है बच्चों? तुम दोनों इतने चुप क्यों हो?’ एक बच्चे ने बताया कि गुग्गु और गोलू की लड़ाई हो गई है। अध्यापिका ने दोनों को पास बुलाया और सारी बात सुनी। फिर उन्होंने प्यार से कहा, ‘बच्चों, गलती होना स्वाभाविक है। दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जिससे कभी गलती न हुई हो। लेकिन छोटी-सी गलती के कारण अच्छी दोस्ती खो देना समझदारी नहीं है।’
गुग्गु चुप रहा।
अध्यापिका ने आगे कहा, ‘गुग्गु, सोचो अगर कभी तुमसे कोई गलती हो जाए और तुम्हारा दोस्त तुम्हें माफ न करे तो तुम्हें कैसा लगेगा?’
गुग्गु ने सिर झुका लिया।
फिर अध्यापिका ने गोलू से कहा, ‘और गोलू, तुम्हें भी दूसरों की चीजों का ध्यान रखना चाहिए। दोस्ती में विश्वास के साथ जिम्मेदारी भी ज़रूरी होती है।’
दोनों बच्चों को अपनी गलती का एहसास हुआ। छुट्टी के बाद गुग्गु धीरे-धीरे गोलू के पास गया।
‘गोलू,’ उसने कहा, ‘मुझे माफ कर दो। मुझे तुम पर इतना गुस्सा नहीं करना चाहिए था। मुझे पता है कि तुमने जानबूझकर मेरे रंग नहीं गिराए थे।’
गोलू मुस्कुराया और बोला, ‘मुझे भी माफ कर दो गुग्गु। मुझे तुम्हारे रंगों का और ध्यान रखना चाहिए था। मुझे भी गुस्से में तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था।’
दोनों दोस्तों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। गुग्गु बोला, ‘एक रंग की बोतल हमारी दोस्ती से बड़ी नहीं हो सकती।’ गोलू हंसते हुए बोला, ‘हां, और अब से हम किसी भी बात पर लड़ने से पहले एक-दूसरे से बात करेंगे।’
दोनों ने हाथ मिलाकर वादा किया कि वे भविष्य में कभी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा नहीं करेंगे और हमेशा एक-दूसरे का साथ देंगे। कुछ दिनों बाद स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। इस बार गुग्गु और गोलू ने मिलकर एक बड़ा सुंदर चित्र बनाया। चित्र में दो बच्चे हाथों में हाथ डाले खड़े थे और उनके ऊपर लिखा था, ‘सच्ची दोस्ती में प्यार, विश्वास और माफी सबसे ज़रूरी होती है।’ उनके चित्र को पहला पुरस्कार मिला।
अध्यापिका ने कहा, ‘तुम दोनों ने केवल सुंदर चित्र ही नहीं बनाया, बल्कि दोस्ती का असली अर्थ भी समझ लिया है।’ गुग्गु और गोलू मुस्कुरा दिए। अब वे पहले से भी अच्छे दोस्त बन चुके थे। 
(सुमन सागर)

#गुग्गु और गोलू की दोस्ती