धार्मिक आस्था की कीमत जान देकर चुकाते श्रद्धालू !
देश भर के धार्मिक आयोजन स्थलों पूजा पंडालों तीर्थ मंदिरों स्नान घाटों पर बदइंतजामी चरम पर है कमोवेश सभी जगह एक सी हालत है अब कोलकाता के उत्तर हिस्से में चित्तरंजन एवेन्यू के पास चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में 17 अक्तूबर शनिवार शाम मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 24 घायल हो गए।
घायलों में एक की हालत गंभीर है। मृतकों में चार पुरुष, दो बच्चे और 13 महिलाएं शामिल हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे बंगाल में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूजा समिति के पदाधिकारी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। हादसे के बाद सरकार ने भीड़ संभालने के लिए नौ आईपीएस अधिकारियों को तैनात किया है।
तमाम हिन्दू धार्मिक आयोजनों में कुप्रबंध बना रहता है आम श्रद्धालु घंटों भूख प्यास सह कर भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता है। अधिकांश बड़े मंदिरों पर तो बाकायदा पैसे देकर वीआईपी दर्शन की सुविधा को ही वैधता दे दी गई है। बहरहाल इस सब बदइंतजामी के चलते अब आस्था का मोल श्रद्धालु अपनी जान देकर चुकाने को मजबूर हैं। आपको याद दिला दें कि श्रावण मास का तीसरा सोमवार 17 अगस्त, 2026 श्रद्धालुओं के जीवन पर भारी पड़ गया। इस दिन विभिन्न राज्यों में धार्मिक स्थलों पर हुई भगदड़ और हादसों में कुल 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य हादसों में कम से कम बीस जान गयीं हैं जबकि हताहतों की तादाद सैकड़ों की संख्या में है, घायल हुए। दरअसल यह हादसों की पहली बार नहीं है हिन्दू धर्म स्थानों पर कुप्रबंध अव्यवस्था रखरखाव में गड़बड़ी संकीर्ण गलियारे और श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद असंयमित व्यवहार के साथ ही अफवाहों की साजिशें हर पर्व त्योहार दर्शन स्नान मेलों में हादसों की श्रृंखला बना रहे हैं।
आपको बता दें पिछले दिनों मध्यप्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर सहित चार राज्यों में विभिन्न हादसों और भीड़ के दबाव के कारण कुल 27 लोगों की जान चली गई। अभी दो माह पहले ही महाराष्ट्र के परभणी ज़िले की मानवत तहसील स्थित यशवाड़ी मारुति मंदिर में शनिवार को हुआ दर्दनाक हादसा पूरे देश को झकझोर दिया। मंदिर परिसर के सामने बना सभा मंडप अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके कारण कई श्रद्धालु मलबे में दब गए छह लोगों की मौत हो गई थी।
आपको याद होगा कि महाकुंभ मेला, प्रयागराज जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में पवित्र स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। अखाड़ा मार्ग पर तीर्थयात्रियों के अत्यधिक दबाव से अचानक बैरिकेड्स ढह गए। इस दर्दनाक हादसे में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और 60 से ज्यादा घायल हुए। इसी तरह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश में जनवरी 2025 वैकुंठ एकादशी त्योहार के दौरान वीआईपी और सामान्य दर्शन टिकट लेने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई। इस भीड़ के अनियंत्रित होने से मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं हाथरस सत्संग, उत्तर प्रदेश 2 जुलाई 2024 को एक धार्मिक आयोजन में बरती गयी लापरवाही सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान ले गयी। यह हाल के वर्षों की सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। क्षमता से तीन गुना अधिक यानी करीब 2.5 लाख लोग एक अस्थायी टेंट में जमा हो गए थे। बाबा के जाने के बाद धूल छूने की होड़ और अत्यधिक गर्मी व उमस के कारण मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई।
माता वैष्णो देवी भवन जनवरी 2022 को नए साल के मौके पर जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हुई रेलमपेल में 12 लोगों की जान चली गई थी। रतनगढ़ माता मंदिर, दतिया मध्यप्रदेश में अक्तूबर 2013 नवरात्रि के दौरान मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं के बीच पुल टूटने की अफवाह उड़ी, जिससे मची भगदड़ में 89 लोगों की मौत हुई थी। छठ घाट पर नवंबर 2012 में बिहार की राजधानी पटना में छठ पर्व के दौरान नदी घाट पर अचानक मची अफरा-तफरी के कारण 20 व्रतियों और श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2008 भूस्खलन और चट्टानें गिरने की झूठी अफवाह के बाद फैली दहशत से 162 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई थी। वास्तविकता यह है कि अनेक धार्मिक आयोजन स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन आधारभूत ढांचे का विस्तार और रखरखाव उसी गति से नहीं हो पा रहा। आवश्यक है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इन हादसों की निष्पक्ष जांच कराएं और इन तमाम हादसों के पीछे के तमाम कारणों का विश्लेषण कर जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।



