अनुभव से सीख
दीपावली का त्योहार निकल गया था। बच्चे दीपावली का त्योहार मनाकर तथा छुट्टियों के पश्चात विद्यालय आए थे। विद्यालय की सभी कक्षाओं में बच्चों की अनुपस्थिति काफी थी। कक्षा के इंचार्ज अध्यापकों द्वारा पूछे जाने पर कक्षाओं के बच्चों ने बताया था कि कई बच्चे दुकानों की मिलावट वाली मिठाई खाकर बीमार पड़ गए थे। कई बच्चों का अधिक फॉस्ट फूड खाकर गला खराब हो गया था। किसी के हाथ में अनार चल गया था। किसी के हाथ में आतिशबाजी चल गई थी। किसी ने बड़े बम से अपना हाथ जलवा लिया था। कोई चकरी चलाते हुए घायल हो गया था। किसी बच्चे को चमड़ी रोग हो गया था। एक बच्चे की तो आंखों को भी नुकसान पहुंचा था।
सुरिंदर सिंह जो कि क्रिकेट के खेल का बहुत अच्छा खिलाड़ी था, उसने कुछ दिन के पश्चात प्रांतीय स्तर पर विद्यालय की टीम में खेलने जाना था, उसका पांव एक पटाखा बम चलाते हुए बुरी तरह जल गया था। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। डॉक्टर ने उसे कह दिया कि उसे ठीक होने में कम से कम दो महीने लगेंगे। शारीरिक शिक्षा अध्यापक ने उसे दीपावली की छुट्टियों से पहले घर जाते समय कह भी दिया था कि वह पटाखे चलाते समय अपना ध्यान रखे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य तथा अध्यापकों को इस बात को लेकर चिन्ता थी कि सुरिंदर सिंह के बगैर क्रिकेट की टीम प्रांतीय स्तर पर कैसे खेलेगी। विद्यालय के बहुत सारे बच्चों को चमड़ी का रोग, खांसी, बुखार तथा आंखों में जलन का रोग हो गया था। कुछ दिनों के पश्चात जब बच्चों ने अपना स्वास्थ्य ठीक होने पर विद्यालय आना शुरू कर दिया तो एक दिन सभी कक्षाओं के बच्चों को विद्यालय के सभागार में बुलाया गया। विद्यालय के एक विजान अध्यापक ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, बच्चो हर वर्ष की तरह आपको इस वर्ष भी दीपावली की छुट्टियों से पहले कहा गया था कि आप दीपावली का त्योहार बड़ी सावधानी से मनाना होगा लेकिन जिन बच्चों ने अध्यापकों द्वारा दी गई नसीहत पर अमल नहीं किया उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। कोई बम और आतिशबाजी से घायल हो गया, कोई मिलावटी मिठाई और अधिक फॉस्ट फूड खाने से बीमार पड़ गया।
विज्ञान के अध्यापक ने बच्चों को बम से सुरिंदर सिंह के पांव के जलने के बारे में भी बताया। उसने बच्चों को अधिक पटाखे चलाने से वातावरण में बढ़ने वाले प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा, बच्चो- हर वर्ष आपको दीपावली के पर्व पर वातावरण में दिन प्रति दिन बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए कम से कम पटाखे चलाने के लिए कहा जाता है। पटाखे चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मिलावल वाली मिठाई और अधिक फॉस्ट फूड ना खाने की सीख दी जाती है। परन्तु जो बच्चे अध्यापकों की नसीहत पर अमल नहीं करते, उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। आप सभी बच्चों को इन बच्चों के कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए कम से कम पटाखे चलाने चाहिए ताकि वातावरण में प्रदूषण ना बढ़े। पटाखे सावधानी से चलाने चाहिए। मिलावटी मिठाइयां तथा अधिक फॉस्ट फूड नहीं खाने चाहिए। बच्चों ने वायदा किया कि भविष्य में वे अध्यापकों की नसीहत पर अमल ज़रूर करेंगे।
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