हरियाणा में अब चलेगा तबादलों का दौर


हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में नई सरकार बनने के साथ ही अब राज्य भर में तबादलों का जोर रहने के आसार हैं। नई सरकार बनने के बाद विधानसभा के दो संक्षिप्त सत्र होने और राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार होने के साथ ही दमदार बोर्डों व निगमों में चेयरमैन लगाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री व दो पुराने मंत्रियों को छोड़कर ज्यादातर नए मंत्री बने हैं। विभागों का बंटवारा होने के बाद अब प्रदेश में बड़े स्तर पर आलाधिकारियों के तबादले होने वाले हैं। जल्दी ही बड़े पैमाने पर आईएएस व आईपीएस अधिकारियों के तबादले होंगे और उसके बाद एचसीएस व एचपीएस अधिकारियों के तबादलों की भी सूचियां जारी होंगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मंत्रियों को सत्ता का एहसास करवाने के लिए उन्हें 15 दिनों के लिए दूसरे, तीसरे व चौथे दर्जे के कर्मचारियों के तबादलों का अधिकार दे दिया है। इसके चलते मंत्रियों के साथ-साथ विधायकों, चेयरमैनों, पूर्व मंत्रियों व पूर्व विधायकों के यहां तबादला करवाने वालों की खूब भीड़ रहने लगी है, जिसके अगले कई दिनों तक बने रहने के आसार हैं। 
पिछले कई महीनों से सचिवालय जो सुनसान रहता था, उसमें भी खूब भीड़ नजर आने लगी है। वैसे हरियाणा कर्मचारी महासंघ व सर्व कर्मचारी संघ सहित अनेक कर्मचारी संगठनों ने नवंबर-दिसंबर महीने में मंत्रियों को तबादलोें की शक्तियां देने का विरोध किया है। उनका कहना है कि कर्मचारियों के बच्चों की परीक्षाएं बिल्कुल सिर पर आ गई हैं और इस वक्त कर्मचारियों के तबादलों से उनके भविष्य व पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा  कर्मचारी मिड सैशन में अपने बच्चों का कहां दाखिला करवाएंगे और कैसे उनकी पढ़ाई पूरी होगी। इन संगठनों का मानना है कि यह समय तबादलों के लिए सही नहीं है। सरकार को चाहिए कि कर्मचारियों के तबादले मार्च-अप्रैल के बाद किए जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई खराब न हो। 
निर्दलीय विधायकों को मिली चेयरमैनी
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस बार बहुमत नहीं मिल पाया था। भाजपा ने जजपा व निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बनाई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भाजपा विधायकों में से स्पीकर के अलावा अपने सहित 9 विधायक भाजपा कोटे से मंत्री बनाए थे और निर्दलीय विधायकों में से रानियां के विधायक चौधरी रणजीत सिंह और जजपा कोटे से उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के अलावा राज्य मंत्री अनूप धानक को मंत्रिमंडल में शामिल किया था। रणजीत सिंह पहले भी कैबिनेट रैंक में कृषि मंत्री रहने के अलावा राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वह कैबिनेट रैंक में योजना आयोग में भी रह चुके हैं। वह पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के बेटे हैं और उनके राजनीतिक कद को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने उन्हें खट्टर सरकार में बिजली मंत्री बनाया है। मंत्रिमंडल में अभी दो स्थान रिक्त हैं और जजपा कोटे से अभी एक या दो मंत्री बनाए जाने बाकी हैं। सात में से एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाए जाने से बाकी निर्दलीय विधायक मायूस न हो जाएं इसलिए मुख्यमंत्री ने निर्दलीय विधायकों में से दादरी के विधायक सोमवीर सांगवान को हरियाणा पशु धन विकास बोर्ड, फरीदाबाद के  नयनपाल रावत को हरियाणा भंडार निगम, पूंडरी के रणधीर सिंह गोलन को हरियाणा पर्यटन निगम और नीलोखेड़ी के धर्मपाल गोंदर को हरियाणा वन विकास निगम का चेयरमैन नियुक्त किया है। अब तक सात में से पांच निर्दलीय विधायकों को सरकार ने गाड़ी व कोठी का बंदोबस्त कर दिया है और बाकी बचे मेहम व बादशाहपुर के दो निर्दलीय विधायकों को भी सरकार जल्दी ही कोई अच्छा पद देने की जुगत में है। 
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व राज्यसभा पद पाने के प्रयास  
इस बार भाजपा के अनेक दिग्गज नेता व मंत्री विधानसभा चुनाव हार गए। हारने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा, पूर्व कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व महिला व बाल विकास मंत्री कविता जैन, पूर्व परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार, पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर, पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री करण देव कंबोज व पूर्व राज्यमंत्री कृष्ण बेदी के अलावा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला भी चुनाव हार गए थे। अब सुभाष बराला की जगह नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होना है। चुनाव हारने वाले कई दिग्गज नेता सुभाष बराला की जगह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के लिए दौड़-धूप कर रहे हैं। इसी बीच प्रदेश में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो चुकी हैं। इनमें से एक सीट इनेलो के राज्यसभा सांसद राम कुमार कश्यप के भाजपा टिकट पर विधायक बनने के बाद दिए गए त्यागपत्र के चलते खाली हुई है और दूसरी सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह के त्यागपत्र से खाली हुई है। कश्यप के कार्यकाल के करीब 7 महीने बाकी थे और बीरेंद्र सिंह के राज्यसभा सदस्य कार्यकाल के करीब पौने 3 साल बाकी हैं। बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे बृजेंद्र सिंह को हिसार से भाजपा का लोकसभा टिकट दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल व राज्यसभा से अपना इस्तीफा भाजपा आलाकमान को सौंप दिया था। लेकिन उनका इस्तीफा अब उपराष्ट्रपति के पास पंहुचने के बाद मंजूर हुआ है।
 अब इन दो सीटों के साथ-साथ अगले 6 महीने बाद कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा की राज्यसभा सीट भी खाली होने जा रही है। इन तीन में से एक सीट कांगे्रस की झोली में जा सकती है। बाकी दो सीटों पर राज्यसभा जाने के लिए विधानसभा चुनाव हारे भाजपा के कई नेता दिन-रात प्रयासरत हैं। इनमें से राज्यसभा के लिए किसकी लॉटरी लगती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का पद और राज्यसभा की सीट पाने के लिए प्रदेश भाजपा के तमाम दिग्गज नेता कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। 
संदीप का छक्का
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे संदीप सिंह डीएसपी की नौकरी छोड़कर जब पिहोवा विधानसभा हल्के से भाजपा टिकट पर चुनाव मैदान में आए थे तो कई लोगों ने उनके इस निर्णय पर तरह-तरह के सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि डीएसपी की नौकरी छोड़कर राजनीति में आना कोई समझदारी नहीं कही जा सकती। वह हरियाणा में भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने वाले तीन नामी खिलाड़ियों में से इकलौते खिलाड़ी हैं जो चुनाव जीत गए जबकि योगेश्वर दत्त व बबीता फौगाट दोनों ही चुनाव हार गए। संदीप सिंह चुनाव जीतने के बाद प्रदेश की भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार में खेल मंत्री भी बन गए। संदीप सिंह को मंत्री बनाने से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक साथ कई वर्गों को खुश कर दिया। वह न सिर्फ सिखों का प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि पंजाबियों और अल्पसंख्यकोें की नुमाइंदगी भी करते हैं। इतना ही नहीं, संदीप सिंह खिलाड़ियों, युवाओं और अति पिछड़े वर्ग का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
 उनको मंत्रिमंडल में शामिल करके मुख्यमंत्री ने एक साथ 6 वर्गों को खुश कर दिया। संदीप सिंह ने भी मंत्री बनते ही अपने जोहर दिखाने शुरू कर दिए हैं और साफ कर दिया है कि खेल विभाग का जो भी अधिकारी व कोच अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाएगा उसके खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अपने पहले दौरे के दौरान ही दो अधिकारियों को निलंबित करके अपने इरादे और कार्यप्रणाली साफ कर दी है। अब लगने लगा है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी संदीप सिंह के मंत्री बनने के बाद निश्चित तौर पर हरियाणा खेलों के मामलों में और आगे जाएगा।